फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Muslim woman affidavit in the Supreme Court said that such organizations should be banned

'मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और हाफिज सईद के संगठन में कोई फर्क नहीं'

Wed, 07 Sep 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Sep 2016 12:29 AM IST
विज्ञापन
Muslim woman affidavit in the Supreme Court said that such organizations should be banned
सुप्रीम कोर्ट

एक मुस्लिम महिला वकील ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड(एआईएमपीएलबी) व भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन(बीएमएमए) और हाफिज मोहम्मद सईद व उसके संगठन जमात-उद-दावा में कोई फर्क नहीं है। महिला वकील ने कहा कि इन सभी की विचारधारा एक हैं। इस महिला वकील को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक से जुड़े मामलों में दखल देने की इजाजत दी है। 

विज्ञापन


महिला वकील फरहा फैज ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में शर्रियत कोर्ट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात करते हुए कहा है कि इसके जरिए देश की न्यायपालिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं और सरकार को चुनौती दी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश को बचाने के लिए एआईएमपीएलबी और बीएमएमए जैसे संगठन को समाप्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि उनकी विचारधारा हाफिज सईद के समान है।
विज्ञापन


हलफनामे में कहा गया है कि देश में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, जिला अदालतें और फैमली कोर्ट के अलावा संघीय शर्रियत कोर्ट भी है। संघीय शर्रियत कोर्ट केसाथ-साथ मजबूत न्यायिक प्रणाली होने के बावजूद रूढ़िवादी लोग संतुष्टï नहीं हैं और अपनी शर्रियत कोर्ट चल रहे हैं। मध्यस्थता, त्वरित और कर्म खर्च में न्याय दिलाने केनाम पर ये लोग भोले-भाले लोगों को गुमराह रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

'मदरसा शिक्षा प्रणाली में पूरी तरह का बदलाव करना चाहिए'

Muslim woman affidavit in the Supreme Court said that such organizations should be banned
सुप्रीम कोर्ट

हलफनामे में महिला वकील ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेशन एक्ट, 1937, मुस्लिम वूमन(प्रोटेक्टशन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) एक्ट, 1986 आदि कई दिशानिर्देश बनाए गए हैं लेकिन बावजूद इसकेमुस्लिम महिला असुरक्षित है। महिलाओं के साथ भेदभाव जारी है। उन्होंने ट्रिपल तलाक को गैर इस्लामिक बताया है। मालूम हो कि एआईएमपीएलबी ने ट्रिपल तलाक की तरफदारी की है। 

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि धर्मगुरु और राजनेता कुरान की बातों को गलत तरीके से पेश कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं और वे मुस्लिम समुदाय को सरकार और देश केखिलाफ जाने का निर्देश दे रहे हैं।

वे देश में असहिष्णुता का सामना नहीं कर रहे हैं लेकिन मुस्लिम समुदाय केलोगों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं।  महिला ने अपने हलफनामे में कहा कि मदरसा शिक्षा प्रणाली में पूरी तरह का बदलाव करना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed