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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा-मूर्ति रखने से नहीं बदलती मस्जिद की हैसियत

Thu, 06 Aug 2020 05:50 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 06 Aug 2020 05:50 AM IST
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Muslim Personal Law Board says, keeping the idol does not change the status of mosque
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड - फोटो : social media

अयोध्या में भूमिपूजन पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बड़ा बयान जारी किया है। बोर्ड ने कहा है कि बाबरी मस्जिद कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी। हागिया सोफिया इसका बेहतरीन उदाहरण है। मस्जिद में मूर्तियां रख देने, पूजा-पाठ शुरू कर देने या एक लंबे अर्से तक नमाज पर पाबंदी लगा देने से मस्जिद की हैसियत खत्म नहीं हो जाती।

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ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि हमारा हमेशा से मानना रहा है कि बाबरी मस्जिद किसी भी मंदिर या किसी हिंदू इबादतगाह को तोड़ कर नहीं बनाई गई। बोर्ड ने कहा कि हालात चाहे जितने खराब हों हमें हौसला नहीं हारना चाहिए, मुखालिफ हालात में जीने का मिजाज बनाना चाहिए।
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मुसलमानों से अपील की गई है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मस्जिद की जमीन पर मंदिर के तामीर होने से हरगिज निराश न हों, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि खाना-ए-काबा एक लंबे अर्से तक शिर्क और बिदअत परस्ती का मरकज रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि ऐसे नाजुक मौके पर अपनी गलतियों से तौबा करें, इखलाक और किरदार को सवारें, घर और समाज को दीनदार बनाए और पूरे हौसले के साथ मुखालिफ हालात में आगे बढ़ने का फैसला करें। 

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