फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Muslim Personal Law Board called Uniform Civil Code unconstitutional, said - an attempt to divert attention from inflation and unemployment

विरोध : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता को बताया असंवैधाानिक, कहा- महंगाई व बेरोजगारी से ध्यान हटाने का प्रयास

Wed, 27 Apr 2022 07:41 AM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 27 Apr 2022 07:41 AM IST
सार

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि भारत के संविधान में देश के हर नागरिक को अपने मजहब के आधार पर जीने की आजादी दी गई है और यह मूलभूत अधिकारों में भी शामिल है। 

विज्ञापन
Muslim Personal Law Board called Uniform Civil Code unconstitutional, said - an attempt to divert attention from inflation and unemployment
aimplb opposes uniform civil code - फोटो : social media

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की तैयारी के बीच मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) का बड़ा बयान आया है। बोर्ड ने इसका विरोध करते हुए इसे संविधान व अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया है। यह भी कहा कि महंगाई, अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी से जनता का ध्यान हटाने के लिए सरकार यह राग अलाप रही है। 

विज्ञापन


केंद्र सरकार के साथ ही उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश सरकारों ने भी समान नागरिक संहिता लागू करने की मंशा जताई है। इसका मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हजरत मौलाना सैफुल्लाह रहमानी ने बयान जारी कर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में देश के हर नागरिक को अपने मजहब के आधार पर जीने की आजादी दी गई है और यह मूलभूत अधिकारों में भी शामिल है। 
विज्ञापन


रहमानी ने कहा कि संविधान में अल्पसंख्यकों व आदिवासी जातियों को अपनी इच्छा व परंपरा के अनुसार विभिन्न पर्सनल लॉ की इजाजत दी गई है। इससे बहुसंख्यकों व अल्पसंख्यकों के बीच परस्पर एकता और परस्पर विश्वास कायम रखने में मदद मिलती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश तथा केंद्र सरकारों द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करने का राग कुछ नहीं बल्कि देश की जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, गिरती अर्थव्यवस्था की ओर से ध्यान हटाना व नफरत का एजेंडा फैलाने का प्रयास है। बोर्ड ने कहा कि वह सरकार से अपील करता है कि वह ऐसे कार्यों से बचे। 

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (UCC) बनाने के लिए एक उच्चाधिकार समिति बनाई जाएगी, जो इसका प्रारूप तैरूार करेगी। हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी सोमवार को कहा कि राज्य में यूसीसी लागू करने का परीक्षण हो रहा है। 


क्या है समान नागरिक संहिता
समान नागरिक संहिता भारत में नागरिकों के व्यक्तिगत कानूनों को बनाने और लागू करने का एक प्रस्ताव है। इसमें देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से उनके धर्म और लिंग के आधार पर बगैर भेदभाव के लागू करने की योजना है। वर्तमान में विभिन्न समुदायों के पर्सनल लॉ उनके धर्म ग्रंथों के अनुसार संचालित होते हैं। समान नागरिक संहिता संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत आती है। इसके कहा गया है कि देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा की इसकी लंबे समय से मांग करती रही है। यह उसके 2019 के चुनावी घोषणापत्र का भी हिस्सा है। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed