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Muslim League: राहुल के बयान से मचा घमासान, क्या है केरल की IUML, इसका पाकिस्तान मुस्लिम लीग से क्या संबंध?

Fri, 02 Jun 2023 04:23 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 02 Jun 2023 04:23 PM IST
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सार
BJP Vs Congress On Muslim League: राहुल गांधी ने मुस्लिम लीग को 'सेक्युलर' बताया है। इस पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। जानते हैं कि मुस्लिम लीग का इतिहास क्या है और राहुल ने जिस दल का नाम लिया, उसका क्या पुरानी मुस्लिम लीग से कुछ संबंध है?
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Muslim League: all you need to know about Kerala's IUML and Pakistan Muslim League
मुस्लिम लीग - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। दौरे के बीच राहुल गांधी ने मुस्लिम लीग पर एक बयान दिया। इस पर बवाल मच गया है। भाजपा राहुल को इतिहास पढ़ने की सलाह दे रही है। वहीं, कांग्रेस ने सवाल किया कि राहुल गांधी के बोलने से भाजपा को इतना डर क्यों है? देश की बात करना, PM मोदी का विरोध कैसे हो गया?

राहुल गांधी
राहुल गांधी - फोटो : SOCIAL MEDIA
आखिर राहुल ने मुस्लिम लीग को लेकर क्या कहा?
राहुल गांधी से केरल में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन करने पर सवाल पूछा गया था। जवाब में राहुल ने मुस्लिम लीग को 'सेक्युलर' बताया। इस पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। राहुल गांधी ने कहा कि इंडियन मुस्लिम लीग के बारे में कुछ भी गैर-धर्मनिरपेक्ष नहीं है। मुस्लिम लीग पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) पार्टी है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उस व्यक्ति (जिसने प्रश्न भेजा है) ने मुस्लिम लीग का अध्ययन नहीं किया है।' 
 

भाजपा ने क्या पलटवार किया?
भाजपा के अमित मालवीय ने कहा कि जिन्ना की मुस्लिम लीग, जो पार्टी धार्मिक आधार पर भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार है, राहुल गांधी उसे एक 'धर्मनिरपेक्ष' पार्टी बता रहे हैं। राहुल भले ही कम पढ़े-लिखे हों, लेकिन यहां वे गलत हैं। वायनाड में स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए राहुल गांधी की मजबूरी है कि मुस्लिम लीग को धर्मनिरपेक्ष पार्टी बताएं।

मोहम्मद अली जिन्ना
मोहम्मद अली जिन्ना - फोटो : Facebook/Ali Moeen Nawazish
क्या है मुस्लिम लीग?
'ऑल इंडिया मुस्लिम लीग' की स्थापना 30 दिसंबर, 1906 को हुई थी। तब अविभाजित भारत के कई मुस्लिम नेता ढाका में इकट्ठे हुए और कांग्रेस से अलग मुस्लिमों के लिए 'ऑल इंडिया मुस्लिम लीग' बनाने का फैसला किया। 1930 में, ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए अल्लामा इकबाल ने राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं को हल करने के मकसद से दक्षिण एशिया के वंचित मुसलमानों के लिए एक अलग देश का विचार प्रस्तुत किया। 

23 मार्च, 1940 को मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग ने लाहौर में एक अधिवेशन बुलाया। इस दौरान जिन्ना ने एक स्वतंत्र देश की स्थापना के लिए संघर्ष करने का संकल्प लेते हुए 'पाकिस्तान प्रस्ताव' को अपनाया। सात साल बाद आजादी के साथ ही बंटवारा हो गया और 14 अगस्त, 1947 को दुनिया के नक्शे पर पाकिस्तान दिखाई दिया। इसके बाद, ऑल इंडिया मुस्लिम लीग 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग' बन गई। 

आईयूएमएल का झंडा
आईयूएमएल का झंडा - फोटो : social Media
मुस्लिम लीग के नेता पाकिस्तान चले गए तो भारत में कौन चला रहा मुस्लिम लीग?
भारत की आजादी के बाद मार्च, 1948 में मद्रास (अब चेन्नई) में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की स्थापना हुई। 1952 से ही इस दल के नेता भारतीय चुनावी राजनीति का हिस्सा हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का केरल में काफी प्रभाव है। यह पार्टी राज्य के विपक्षी गठबंधन UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इस गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस कर रही है। गठबंधन की पारंपरिक सहयोगी है।

पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) का एक भी हिस्सा है। लीग के नेता ई. अहमद को पहली बार 2004 में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री का पद भी मिला था। पार्टी के वर्तमान में चार सांसद हैं - पीके कुन्हालीकुट्टी, ईटी मोहम्मद बशीर और के. नवस कनी निचले सदन लोकसभा में और पीवी अब्दुल वहाब उच्च सदन राज्यसभा में। विधानसभाओं में इसके प्रतिनिधत्व की बात करें तो केरल और तमिलनाडु में IUML के कुल 19 सदस्य हैं। 

 

क्या IUML की स्थापना करने वाले नेता आजादी के पहले मुस्लिम लीग से जुड़े थे?
1947 में जब पाकिस्तान बना तो मुस्लिम लीग का वह धड़ा जो अलग राष्ट्र की मांग कर रहा था, पाकिस्तान चला गया। इसी मुस्लिम लीग में कुछ ऐसे नेता भी थे, जो पाकिस्तान नहीं गए। ये लोग खासतौर पर वे थे, जो दक्षिण भारत के रहने वाले थे। पाकिस्तान बनने के बाद दिसंबर 1947 में मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत में रहने का निर्णय करने वाले पार्टी नेताओं को अपने भविष्य का फैसला खुद करने के लिए कह दिया। 
इसके बाद दक्षिण के मुस्लिम नेताओं ने चेन्नई में बैठक बुलाई, जहां IUML की नींव पड़ी।  

IUML in Kerala
IUML in Kerala - फोटो : AIR twitter handle
भारत में कब से चुनाव लड़ रही है इंडियन मुस्लिम लीग?
भारतीय संसद में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का प्रतिनिधित्व 1952 में हुए देश के पहले आम चुनावों से ही था। सीएच मोहम्मद कोया के नेतृत्व में IUML ने 1979 में केरल विधानसभा चुनाव जीता और राज्य में पहली बार सरकार बनाई थी। केरल विधानसभा में 1982 में इसकी सीटों की संख्या 14 थी, जो 2011 में बढ़कर 20 हो गई। 

केरल की मुस्लिम लीग और 1906 में बनी मुस्लिम लीग में क्या अंतर है?
केरल की मुस्लिम लीग ने अपनी वेबसाइट में राजनीतिक विचारधारा के बारे में बताया है। इसमें कहा गया है कि पार्टी मुस्लिम समुदाय और समाज के अन्य पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने में मदद करना चाहती है।

IUML यह भी दावा करती है कि भारत के संविधान को बरकरार रखते हुए, लीग यह सुनिश्चित करती है कि यह मुसलमानों की जिंदगी में शांति, समृद्धि और सम्मान प्राप्त करने के लिए अतीत और वर्तमान के बीच की खाई को पाट दे। लीग मुस्लिम पर्सनल लॉ की पक्षधर है। लीग का कहना है कि पर्सनल लॉ मुस्लिम समुदाय को व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जो मुख्य रूप से समुदाय के विकास के लिए आवश्यक है। 

वहीं, पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सिद्धांतों की बात करें तो यह अपने संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के नीति के सिद्धांतों में विश्वास करती है। पाकिस्तान के संविधान के 'उद्देश्य संकल्प' का हवाला देती है। यह आगे कहती है कि राष्ट्र (पाकिस्तान), लोगों के चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी शक्तियों और अधिकारों का प्रयोग करेगा, जिसमें इस्लाम द्वारा प्रतिपादित लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता, सहिष्णुता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
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