फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mumbai Police told Bombay High Court that woman wants to take her complaint back against Jharkhand CM Hemant Soren

मुंबई पुलिस ने अदालत से कहा: नहीं कर सकते झारखंड के सीएम सोरेन के खिलाफ जांच

Mon, 05 Apr 2021 08:40 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 05 Apr 2021 08:40 PM IST
सार

मुंबई पुलिस ने सोमवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय को बताया कि वह झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ दुष्कर्म और आपराधिक धमकी के आरोपों की जांच नहीं कर सकती। पुलिस ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि पीड़िता उच्च न्यायालय से वह याचिका वापस लेना चाहती है जिसमें प्राथमिकी दर्ज कराने की गुहार लगाई गई थी। 

विज्ञापन
Mumbai Police told Bombay High Court that woman wants to take her complaint back against Jharkhand CM Hemant Soren
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

लोक अभियोजक दीपक ठाकरे ने न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति मनीष पिटाले की पीठ से कहा कि महिला ने वर्ष 2013 में सोरेन के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेटी अदालत में अर्जी दी थी। ठाकरे ने अदालत को बताया, 'महिला ने अपनी शिकायत उसी साल वापस ले ली थी। पिछले साल अगस्त में महिला ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर कहा कि उसके साथ हादसा हो गया था और आशंका जताई कि इसके पीछे भी सोरेन का हाथ था। महिला ने बाद में वह याचिका भी वापस ले ली।'

विज्ञापन


लोक अभियोजक ने झारखंड के पूर्व पत्रकार सुनील कुमार तिवारी और गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'स्त्री रोशनी ट्रस्ट' की ओर से दाखिल दो याचिकाओं का भी विरोध किया। इन याचिकाओं में उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप करने और महिला को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं देने का अनुरोध किया गया है। ठाकरे ने कहा, 'हस्तक्षेप करने वालों (तिवारी एवं एनजीओ) का मामले से कोई संबंध नहीं है जबकि शिकायतकर्ता स्वयं अपनी याचिका वापस लेना चाहती हैं।'
विज्ञापन


उन्होंने कहा, 'हस्तक्षेप आवेदन निश्चित रूप से किसी राजनीतिक हित की वजह से दिया गया है। पुलिस किस बात की जांच करे जब शिकायत ही वापस हो गई है।' 
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं, महिला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अबाद पोंडा ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल को याचिका जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता अगर वह ऐसा नहीं चाहती। पोंडा ने कहा, 'महिला का मामले में हस्तक्षेप करने वालों से कोई संबंध नहीं है। ऐसा लगता है कि उनके पीछे भाजपा जैसी कुछ राजनीतिक पार्टियां हैं। उनका (हस्तक्षेप करने वाले) उस व्यक्ति (सोरेन) से स्वार्थ है जिसके खिलाफ महिला ने पहले याचिका दायर की थी।' उन्होंने कहा कि महिला याचिका को वापस लेना चाहती है।

पीठ ने पोंडा से पूछा कि क्या महिला न्यायाधीशों से उनके चेंबर में मिलना चाहती है। पोंडा ने इसे स्वीकार किया जिसके बाद महिला सोमवार दोपहर न्यायाधीशों से चेंबर में मिली। अदालत इस मामले की सुनवाई अब बुधवार को करेगी। ‘स्त्री रोशनी ट्रस्ट’ की ओर से पेश अधिवक्ता सतीश माणेशिंदे ने कहा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और आरोपी मुख्यमंत्री है।


माणेशिंदे ने कहा, 'कई अदालतों ने कहा है कि ऐसे अपराध केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं होता बल्कि समाज के खिलाफ होता है।' हस्तक्षेप आवेदनों में सीबीआई को मामले की जांच करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत को बताया कि अगर उच्च न्यायालय निर्देश दे तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) आरोपों की जांच करने को इच्छुक है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed