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मुंबई: अब कहां पैसे जमा करेंगी ये 5,000 सेक्स वर्कर

Sat, 30 Jun 2018 04:01 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Sat, 30 Jun 2018 04:01 PM IST
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Mumbai: now where 5000 sex workers will deposit their money

मुंबई से सटे कमाठीपुरा को भारत का दूसरा सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया कहा जाता है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में मौजूद एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट इलाके सोनागाछी के बाद कमाठीपुरा का ही नाम लिया जाता है। यहां करीब 5,000 सेक्स वर्कर महिलायें रहती हैं। इन महिलाओं का कहना है कि भारत में सेक्स वर्क चूंकि अवैध है इसलिए उनके जीवन में तमाम तरह की समस्याएं हैं।

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समाज में इन महिलाओं की कोई पहचान नहीं है। उनके पास उनके होने का कोई आधिकारिक कागजी सबूत नहीं है। लेकिन अब इन महिलाओं के आगे एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। इन महिलाओं के पास अपनी कमाई जमा करने के लिए जो इकलौता बैंक था, वो भी अब बंद हो गया है। कमाठीपुरा रेड लाइट इलाके में रहने वाली पांच हजार सेक्स वर्कर महिलाओं में से ज्यादातर के पास किसी मुख्यधारा के बैंक में खाता नहीं है।
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कुछ सेक्स वर्कर बताती हैं कि खाता खोलने के लिए बैंक वाले उनसे आधार कार्ड और अन्य कागजात मांगते हैं और वो कागजात उनके पास हैं नहीं। इस वजह से बैंकों की सेवाएं लेना इन महिलाओं के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है। हालांकि कमाठीपुरा रेड लाइट इलाके में साल 2007 में एक सहकारी बैंक की स्थापना की गई थी ताकि सेक्स वर्कर महिलाओं की मदद की जा सके। इसका नाम 'संगिनी विमेन्स को-ऑपरेटिव बैंक' रखा गया था। लेकिन फंडिंग की कमी के कारण बीते साल दिसंबर में ये बैंक बंद हो गया।
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सेक्स वर्करों से पैसे लेकर बैंक में जमा करवाने वाली चांद बी बताती हैं, "यहां रहने वाली महिलायें बैंकों में नहीं जाती हैं। कुछ महिलाएं बैंकों में गयी थीं तो उन्हें बैंक वालों ने बेइज्जत किया। अब वो वहां जाने से बचती हैं। बैंक वाले उनसे स्थायी पता पूछते हैं और उसके सबूत लाने को कहते हैं। वो इन गरीब महिलाओं के पास हैं नहीं।" संगिनी विमेन्स को-ऑपरेटिव बैंक की स्थापना इन सेक्स वर्करों की इसी समस्या को हल करने के लिए की गई थी।

सिर्फ एक तस्वीर के आधार पर इन सेक्स वर्करों के बैंक खाते खोले जाते थे

Mumbai: now where 5000 sex workers will deposit their money

इस सहकारी बैंक के कुछ संस्थापक सदस्यों ने बताया कि संगिनी बैंक में सिर्फ एक तस्वीर के आधार पर इन सेक्स वर्करों के बैंक खाते खोले जाते थे। बैंक की स्थापना साल 2007 में अमेरिका की एक संस्था से फंड लेकर की गई थी। लेकिन साल 2009 में उस संस्था ने फंड देना बंद कर दिया। इसके बाद इंडिया-800 फाउंडेशन ने बैंक के संचालन की जिम्मेदारी ली। लेकिन कुछ वक्त बाद इंडिया-800 फाउंडेशन संगिनी बैंक से अलग हो गया।

संगिनी बैंक को कोलकाता के सोनागाछी रेड लाइट इलाके में चलने वाले उषा को-ऑपरेटिव बैंक की तर्ज पर शुरू किया गया था। लेकिन 10 साल में ही इस बैंक ने दम तोड़ दिया। कई सेक्स वर्कर कहती हैं कि इस बैंक ने पैसे बचाने में उनकी काफी मदद की। चांद बी कहती हैं कि संगिनी बैंक में कईयों ने तो 65,000 रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक जमा कर लिये थे। यहां 200 से 2000 रुपये रोज कमाने वाली महिलाओं के लिए ये एक बड़ी बचत थी। सेक्स वर्कर तनुजा खान का भी संगिनी बैंक में खाता था। वो अब अपने पैसों को लेकर चिंता में रहती हैं।

तनुजा ने बताया, "हम जो पैसा कमाते हैं, उसे अब सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। बैंक बंद होने से हमारी तकलीफ बढ़ी है। बिस्तर के पास 500 से हजार रुपये रखेंगे तो उन्हें कोई भी ले जायेगा। इसलिए पैसे कहीं इधर-उधर छिपा कर रखने पड़ते हैं।" अन्य महिलाओं का कहना था कि यहां से कपड़े और बर्तन तक चोरी हो जाते हैं तो खुले में पैसे कैसे रखे जा सकते हैं। बहरहाल, बैंक के बंद होने के पीछे मुख्य वहज थी फंड की कमी। इसकी वजह से अब कमाठीपुरा में कई औरतों को भविष्य की चिंता सताने लगी है।

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