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मुंबई में पहली बार नहीं हुई बंधक बनाने की घटना: डबल डेकर बस के यात्री से लेकर फ्लैट में बच्ची तक, जानें मामले
Fri, 31 Oct 2025 10:17 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 31 Oct 2025 10:17 AM IST
सार
मुंबई में आने वाले पवई स्थित एक स्टूडियो में रोहित आर्य नाम के व्यक्ति ने 17 बच्चों और दो वयस्कों को बंधक बना लिया। पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया। इस दौरान हुई फायरिंग में बंधक बनाने वाले शख्स को गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसकी मौत हो गई।
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मुंबई में बच्चे बनाए गए थे बंधक।
- फोटो : PTI
विस्तार
देश की वित्तीय राजधानी- मुंबई में गुरुवार को एक शख्स की तरफ से बच्चों को बंधक बनाए जाने की घटना ने पूरे शहर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। यूं तो पुलिस ने सूझबूझ और तत्परता से काम करते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन इस घटना ने ऐसे ही कुछ पुराने वाकयों की याद को ताजा कर दिया। दरअसल, मुंबई में बंधक बनाने यानी हॉस्टेज लेने की यह पहली घटना नहीं है। कुछ वर्षों पहले मुंबई को इस तरह के संकटों से जूझना पड़ा। तब पुलिस की क्षमताओं की भी जबरदस्त परीक्षा हुई थी।
पहले जानें- मुंबई में गुरुवार को क्या हुआ?
मुंबई में आने वाले पवई स्थित एक स्टूडियो में रोहित आर्य नाम के व्यक्ति ने 17 बच्चों और दो वयस्कों को बंधक बना लिया। बच्चों को ऑडिशन के बहाने बुलाया गया था। इसके बाद पुलिस ने उसे समझा कर बच्चों की छुड़ाने की कोशिश की। हालांकि, जब रोहित नहीं माना तो पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए वॉशरूम के रास्ते स्टूडियो में घुसकर रेस्क्यू अभियान चलाया और बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया। इस दौरान फायरिंग में रोहित को गोली लग गई। बताया गया है कि गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसकी मौत हो गई।
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पहले जानें- मुंबई में गुरुवार को क्या हुआ?
मुंबई में आने वाले पवई स्थित एक स्टूडियो में रोहित आर्य नाम के व्यक्ति ने 17 बच्चों और दो वयस्कों को बंधक बना लिया। बच्चों को ऑडिशन के बहाने बुलाया गया था। इसके बाद पुलिस ने उसे समझा कर बच्चों की छुड़ाने की कोशिश की। हालांकि, जब रोहित नहीं माना तो पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए वॉशरूम के रास्ते स्टूडियो में घुसकर रेस्क्यू अभियान चलाया और बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया। इस दौरान फायरिंग में रोहित को गोली लग गई। बताया गया है कि गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसकी मौत हो गई।
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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हाल के वर्षों में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को बंधक बनाए जाने की यह पहली घटना है। इस बीच पिछले एक दशक में मुंबई में कई अन्य बंधक नाटकों ने भी सुर्खियां बटोरी हैं। आइये उन मामलों पर भी नजर डालते हैं...
1. जब एक बच्ची को फ्लैट में बनाया गया बंधक
घटना मार्च 2010 में अंधेरी (पश्चिम) में घटी। यहां सेवानिवृत्त सीमा शुल्क अधिकारी हरीश मारोलिया ने 14 वर्षीय हिमानी नाम की लड़की को अपने फ्लैट में बंधक बना लिया था। इमारत में निर्माण कार्य को लेकर हुए विवाद के बाद उसने यह कदम उठाया था। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसने लड़की की हत्या कर दी और खुद भी आत्महत्या कर ली थी।
1. जब एक बच्ची को फ्लैट में बनाया गया बंधक
घटना मार्च 2010 में अंधेरी (पश्चिम) में घटी। यहां सेवानिवृत्त सीमा शुल्क अधिकारी हरीश मारोलिया ने 14 वर्षीय हिमानी नाम की लड़की को अपने फ्लैट में बंधक बना लिया था। इमारत में निर्माण कार्य को लेकर हुए विवाद के बाद उसने यह कदम उठाया था। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसने लड़की की हत्या कर दी और खुद भी आत्महत्या कर ली थी।
2. डबल डेकर बस के यात्रियों बने बंधक
इसी तरह की एक घटना नवंबर 2008 में हुई। बिहार के 25 वर्षीय राहुल राज ने अंधेरी से चल रही बृहन्मुंबई परिवहन उपक्रम (बेस्ट) की डबल डेकर बस में यात्रियों को बंधक बना लिया था। बस जब कुर्ला के बैल बाजार इलाके में पहुंची तो करीब सौ पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया।
पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा, जिसके बाद उसने एक नोट फेंककर कहा था कि वह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे को मारने आया है। थोड़ी ही देर बाद पुलिस ने उसे गोली मार दी।
इसी तरह की एक घटना नवंबर 2008 में हुई। बिहार के 25 वर्षीय राहुल राज ने अंधेरी से चल रही बृहन्मुंबई परिवहन उपक्रम (बेस्ट) की डबल डेकर बस में यात्रियों को बंधक बना लिया था। बस जब कुर्ला के बैल बाजार इलाके में पहुंची तो करीब सौ पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया।
पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा, जिसके बाद उसने एक नोट फेंककर कहा था कि वह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे को मारने आया है। थोड़ी ही देर बाद पुलिस ने उसे गोली मार दी।
जानें क्या बोले मामले के जानकार
बंधक मामलों में मध्यस्थता की जानकार नागपुर की सहायक पुलिस आयुक्त शैलनी शर्मा ने बताया, “बंधक स्थितियों में सबसे अहम बात यह होती है कि किसी की जान न जाए और नुकसान न्यूनतम रहे। बातचीत इन्हीं दो उद्देश्यों के साथ की जाती है।” उन्होंने कहा कि जब बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तो परिस्थिति के अनुसार कार्रवाई दल को निर्णय लेना पड़ता है।
बता दें कि शर्मा मुंबई पुलिस की पहली महिला अधिकारी हैं जिन्हें 26/11 आतंकी हमलों के बाद लंदन भेजा गया था, ताकि वे बंधक हालात से निपटने का प्रशिक्षण ले सकें। 2022 में उन्हें एनएसजी कमांडो को भी इस विषय पर प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया गया था।
बंधक मामलों में मध्यस्थता की जानकार नागपुर की सहायक पुलिस आयुक्त शैलनी शर्मा ने बताया, “बंधक स्थितियों में सबसे अहम बात यह होती है कि किसी की जान न जाए और नुकसान न्यूनतम रहे। बातचीत इन्हीं दो उद्देश्यों के साथ की जाती है।” उन्होंने कहा कि जब बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तो परिस्थिति के अनुसार कार्रवाई दल को निर्णय लेना पड़ता है।
बता दें कि शर्मा मुंबई पुलिस की पहली महिला अधिकारी हैं जिन्हें 26/11 आतंकी हमलों के बाद लंदन भेजा गया था, ताकि वे बंधक हालात से निपटने का प्रशिक्षण ले सकें। 2022 में उन्हें एनएसजी कमांडो को भी इस विषय पर प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया गया था।
2010 की अंधेरी घटना में उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन तब तक पुलिस टीम ने फ्लैट में घुसकर कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसके बाद 2013 और 2017 में उन्होंने आत्महत्या करने जा रही दो महिलाओं को समझा-बुझाकर उनकी जान बचाने में सफल रहीं। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान शर्मा नागपाड़ा थाने की प्रभारी थीं और उन्होंने प्रदर्शन को संवाद के जरिए शांतिपूर्वक ढंग से संभाला था।