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महाराष्ट्र विधान भवन में झड़प का मामला: दो आरोपियों को मिली जमानत, कोर्ट ने कहा- जेल में रखने का कोई मतलब नहीं
Tue, 22 Jul 2025 10:58 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Tue, 22 Jul 2025 10:58 PM IST
सार
मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा परिसर में झड़प के मामले में गिरफ्तार दो राजनीतिक समर्थकों को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच में कोई खास प्रगति नहीं हुई और दोनों आरोपी जमानत की शर्तों का पालन करने को तैयार हैं। झड़प 17 जुलाई को एनसीपी (एसपी) विधायक जितेंद्र आव्हाड और बीजेपी विधायक गोपीचंद पडलकर के समर्थकों के बीच हुई थी।
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भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर और एनसीपी (एससीपी) नेता जितेंद्र आव्हाड के समर्थकों में झड़प
- फोटो : X-@Vikasmakwana111
विस्तार
मुंबई की एक अदालत ने विधानसभा परिसर में हुई मारपीट के मामले में गिरफ्तार दो राजनीतिक समर्थकों को जमानत दे दी है। ये समर्थक एनसीपी (शरद) विधायक जितेंद्र आव्हाड और बीजेपी विधायक गोपीचंद पडलकर से जुड़े थे। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपी जमानत की शर्तों का पालन करने को तैयार हैं, इसलिए उन्हें जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (प्रभारी), एस्प्लेनेड कोर्ट केएस जानवर ने सोमवार को आव्हाड के समर्थक नितिन देशमुख और पडलकर के समर्थक सरजे राव टकले को जमानत दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस को पर्याप्त कस्टडी मिलने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह घटना किसके कहने पर हुई। साथ ही जांच में किसी भी ठोस मकसद का पता नहीं चला।
25 हजार के मुचलके पर मिली जमानत
दोनों आरोपियों को ₹25,000 के जमानती बॉन्ड पर रिहा किया गया। इनकी गिरफ्तारी 18 जुलाई को उस समय हुई जब मानसून सत्र के दौरान विधानसभा भवन के लॉबी क्षेत्र में दोनों दलों के समर्थक आपस में भिड़ गए थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां उन्हें पहले पुलिस रिमांड में भेजा गया और फिर न्यायिक हिरासत में रखा गया।
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दलील सुनने के बाद क्या बोली अदालत?
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस समय जांच मुख्यतः तकनीकी है, जैसे घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा करना। ऐसे में दोनों आरोपियों को जेल में रखना अब व्यर्थ है। अदालत ने माना कि दोनों जमानत की शर्तों का पालन करने को तैयार हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें- 'अंतरिक्ष से पृथ्वी पर कोई सीमा दिखाई नहीं देती...', शुभांशु के ये शब्द कक्षा में पढ़ेंगे छात्र
पुलिस ने दी थी जमानत का विरोध करने की दलील
हालांकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना गंभीर थी और जांच अभी जारी है। पुलिस ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। लेकिन अदालत ने यह मानते हुए कि अब तक जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, जमानत को मंजूरी दे दी।
ये भी पढ़ें- 'पति और ससुराल वालों से सार्वजनिक माफी मांगे IPS पत्नी', विशेषाधिकार से सुप्रीम कोर्ट का फैसला
एक दिन पहले हुई थी दोनों नेताओं में बहस
झड़प की यह घटना 17 जुलाई को विधानसभा भवन की ग्राउंड फ्लोर पर हुई, जब मानसून सत्र जारी था। एक दिन पहले, 16 जुलाई को, दोनों विधायक आपस में तीखी बहस में उलझ गए थे। इसके बाद उनके समर्थकों के बीच टकराव हुआ। मरीन ड्राइव पुलिस ने इस मामले में अनधिकृत जमावड़ा, सार्वजनिक शांति भंग करने की मंशा से अपमान, और दंगा रोकने वाले सार्वजनिक सेवक को बाधित करने जैसे आरोप लगाए थे।
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अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (प्रभारी), एस्प्लेनेड कोर्ट केएस जानवर ने सोमवार को आव्हाड के समर्थक नितिन देशमुख और पडलकर के समर्थक सरजे राव टकले को जमानत दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस को पर्याप्त कस्टडी मिलने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह घटना किसके कहने पर हुई। साथ ही जांच में किसी भी ठोस मकसद का पता नहीं चला।
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25 हजार के मुचलके पर मिली जमानत
दोनों आरोपियों को ₹25,000 के जमानती बॉन्ड पर रिहा किया गया। इनकी गिरफ्तारी 18 जुलाई को उस समय हुई जब मानसून सत्र के दौरान विधानसभा भवन के लॉबी क्षेत्र में दोनों दलों के समर्थक आपस में भिड़ गए थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां उन्हें पहले पुलिस रिमांड में भेजा गया और फिर न्यायिक हिरासत में रखा गया।
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दलील सुनने के बाद क्या बोली अदालत?
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस समय जांच मुख्यतः तकनीकी है, जैसे घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा करना। ऐसे में दोनों आरोपियों को जेल में रखना अब व्यर्थ है। अदालत ने माना कि दोनों जमानत की शर्तों का पालन करने को तैयार हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जा सकता है।
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पुलिस ने दी थी जमानत का विरोध करने की दलील
हालांकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना गंभीर थी और जांच अभी जारी है। पुलिस ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। लेकिन अदालत ने यह मानते हुए कि अब तक जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, जमानत को मंजूरी दे दी।
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एक दिन पहले हुई थी दोनों नेताओं में बहस
झड़प की यह घटना 17 जुलाई को विधानसभा भवन की ग्राउंड फ्लोर पर हुई, जब मानसून सत्र जारी था। एक दिन पहले, 16 जुलाई को, दोनों विधायक आपस में तीखी बहस में उलझ गए थे। इसके बाद उनके समर्थकों के बीच टकराव हुआ। मरीन ड्राइव पुलिस ने इस मामले में अनधिकृत जमावड़ा, सार्वजनिक शांति भंग करने की मंशा से अपमान, और दंगा रोकने वाले सार्वजनिक सेवक को बाधित करने जैसे आरोप लगाए थे।
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