मुलायम सिंह यादव: जब पहली बार बने CM तब अस्तित्व में नहीं थी समाजवादी पार्टी, जानें क्यों बनाना पड़ा अपना दल
सपा की स्थापना नेताजी ने ही की। आखिर मुलायम सिंह यादव को अपना एक अलग दल बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? खासकर तब जब वे पहले ही कई मुख्यधारा के राजनीतिक दलों में अहम भूमिकाएं निभा चुके थे। आइये जानते हैं मुलायम के समाजवादी पार्टी बनाने की पूरी कहानी...
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समाजवादी पार्टी के संस्थापक उत्तर प्रदेश के पूर् मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उन्होंने 82 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। मुलायम के निधन के बाद पूरे समाजवादी कुनबे में शोक का माहौल है। यह वही पार्टी है, जिसकी मुलायम सिंह यादव ने न सिर्फ नींव रखी, बल्कि इसमें अपना खून-पसीना सब कुछ लगा दिया। मुलायम के आखिरी दिनों में जरूर पार्टी उनके बेटे अखिलेश यादव के पास थी, पर मुलायम की लोकप्रियता इतनी रही कि उन्हें पार्टी के मार्गदर्शक बनाए रखा गया।
सपा की स्थापना नेताजी ने ही की। आखिर मुलायम सिंह यादव को अपना एक अलग दल बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? खासकर तब जब वे पहले ही कई मुख्यधारा के राजनीतिक दलों में अहम भूमिकाएं निभा चुके थे। आइये जानते हैं मुलायम के समाजवादी पार्टी बनाने की पूरी कहानी...
कहां से हुई राजनीतिक सफर की शुरुआत?
1. सोशलिस्ट पार्टी
मुलायम सिंह यादव की जड़ें गांव से जुड़ी हुई हैं। 22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई में पैदा हुए मुलायम को उनके पिता सुघर सिंह पहलवान बनाना चाहते थे, लेकिन मुलायम ने राजनीति के अखाड़े में सफलता पाई। इटावा से ग्रेजुएशन किया और राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए आगरा पहुंचे। छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। राममनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से जबरदस्त रूप से प्रभावित हुए। पहली बार 1966 में इटावा पहुंचने के बाद उन्हें लोहिया का सानिध्य मिला। 1967 में उन्होंने लोहिया की संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ा। वे जसवंतनगर सीट से उम्मीदवार बने और जीत हासिल की।
2. भारतीय क्रांति दल1967 में लोहिया के निधन के बाद सोशलिस्ट पार्टी कमजोर हुई। नतीजा यह रहा कि मुलायम सिंह यादव को भी 1969 के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। यूपी में इसके बाद का दौर काफी उथल-पुथल भरा रहा। हालांकि, कुछ समय बाद ही किसान नेता चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल यूपी में मजबूत हो रहा था। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी ने जबरदस्त पैठ बना ली। लोहिया के निधन से कमजोर हो रही संयुक्त सोशलिस्ट दल को छोड़कर मुलायम भारतीय क्रांति दल के साथ हो लिए। 1974 में भारतीय क्रांति दल के टिकट पर चुनाव जीते और विधानसभा पहुंचे।
3. भारतीय लोकदल
1974 में इमरजेंसी से ठीक पहले चरण सिंह ने अपनी पार्टी का विलय कमजोर पड़ चुकी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के साथ कर लिया। इसी के साथ भारतीय क्रांति दल बन गया लोकदल। यह मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक करियर की तीसरी पार्टी रही। मुलायम ने इस पार्टी में रहते हुए प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई।
4. जनता पार्टी
इस बीच इंदिरा गांधी सरकार के दौर में देशभर में आपातकाल लगा। इसके खिलाफ प्रदर्शन में शामिल रहने के लिए मुलायम सिंह यादव की मीसा में गिरफ्तारी हुई। इमरजेंसी के ठीक बाद 1977 में देश में जयप्रकाश नारायण की जनता पार्टी का उभार हुआ। चौधरी चरण सिंह के लोकदल का विलय इसी पार्टी में हो गया। 1977 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राज्य में जनता पार्टी सरकार बनी। नई सरकार में मुलायम सिंह को मंत्री भी बनाया गया। हालांकि, जनता पार्टी 1980 में ही टूट गई और इसके घटक दल एक-एक कर अलग हो गए।
5. जनता पार्टी (सेक्युलर)
जनता पार्टी की टूट से कई पार्टियां बनीं। चौधरी चरण सिंह ने भी जनता पार्टी से अलग होकर जनता पार्टी (सेक्युलर) बनाई। मुलायम भी चरण सिंह के साथ चले गए। 1980 के विधानसभा चुनाव में मुलायम को दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में मुलायम चौधरी चरण सिंह की जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर चुनाव लड़े थे।
6. लोकदल
1980 के चुनाव के बाद चरण सिंह की जनता पार्टी सेक्युलर का नाम बदलकर लोकदल कर दिया गया। 1985 में राज्य में हुआ विधानसभा चुनाव में मुलायम लोकदल के टिकट पर ही जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1987 में जब चौधरी चरण सिंह के निधन के बाद जब उनके बेटे अजीत सिंह और मुलायम में विवाद हो गया। इसके बाद लोकदल के दो टुकड़े हो गए। एक दल बना अजीत सिंह का लोकदल (अ) और दूसरा मुलायम सिंह के नेतृत्व वाला लोकदल (ब)।
1989 में जब विश्वनाथ प्रताप सिंह बोफोर्स घोटाले को लेकर कांग्रेस से बगावत कर अलग हुए, तब विपक्षी एकता की कोशिशें फिर शुरू हुईं। इसी के साथ एक बार फिर जनता दल का गठन हुआ और मुलायम सिंह यादव ने अपने लोकदल (ब) का विलय इसी जनता दल में करा दिया। इस फैसले का मुलायम को काफी फायदा भी हुआ और वे 1989 में ही पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे। 1990 में केंद्र में वीपी सिंह की सरकार गिर गई तो मुलायम सिंह चंद्रशेखर की जनता दल (समाजवादी) में शामिल हो गए।अप्रैल 1991 में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया तो मुलायम सिंह की सरकार गिर गई। 1991 में यूपी में मध्यावधि चुनाव हुए जिसमें मुलायम सिंह जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े।
7. समाजवादी पार्टी की नींव पड़ी
मुलायम सिंह यादव ने 4 अक्तूबर 1992 को समाजवादी पार्टी की स्थापना की। इस पार्टी का चुनाव चिह्न साइकिल बना। पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव को 2016 में समाजवादी पार्टी का संरक्षक घोषित कर दिया था।