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मुख्तार अंसारी: माफिया या मसीहा?

Fri, 27 Jan 2017 02:11 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 27 Jan 2017 02:11 PM IST
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Mukhtar Ansari: Mafia or Messiah?
उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका अपराध और राजनीति के गठजोड़ के लिए 'कुख्यात' इलाकों में गिना जाता है। 'अपराध का राजनीतिकरण' या 'राजनीति का अपराधीकरण' जैसे चर्चित मुहावरों की इसी कड़ी में गाजीपुर के रहने वाले मुख्तार अंसारी का भी नाम आता है। मुख्तार अंसारी मऊ से लगातार चार बार विधायक हैं।
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एक बार बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर, दो बार निर्दलीय और एक बार खुद की बनाई पार्टी कौमी एकता दल से उनके एक और भाई सिबगतुल्ला अंसारी भी उसी पार्टी से विधायक हैं। जबकि एक अन्य भाई अफजाल अंसारी सांसद रह चुके हैं।
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यह विडंबना ही है कि स्वाधीनता आंदोलन के दौरान कांग्रेस पार्टी में शीर्ष नेताओं में गिने जाने वाले जिन मुख्तार अहमद अंसारी ने राजनीति की शुरुआत की, शताब्दी बीतते-बीतते उनके परिवार को एक माफिया नेता परिवार के रूप में राजनीति में स्थायित्व और पहचान मिल पाई।
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Mukhtar Ansari: Mafia or Messiah?
मुख्तार अंसारी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और अपने जमाने में नामी सर्जन रहे डॉक्टर एमए अंसारी के परिवार से आते हैं। यही नहीं, मुख्तार अंसारी के पिता भी स्वतंत्रता सेनानी और कम्युनिस्ट नेता थे। शुरुआत मुख्तार अंसारी ने भी छात्र राजनीति से की, लेकिन जनप्रतिनिधि बनने से पहले उनकी पहचान एक दबंग या माफिया के रूप में हो चुकी थी।

1988 में पहली बार उनका नाम हत्या के एक मामले में आया। हालांकि इस मामले में उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पुलिस नहीं जुटा पाई, लेकिन इस घटना से मुख्तार अंसारी चर्चा में आ गए। 1990 के दशक में जमीन के कारोबार और ठेकों की वजह से वह अपराध की दुनिया में एक चर्चित नाम बन चुके थे।

मुख्तार अंसारी पर आरोप है कि वो गाजीपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सैकड़ों करोड़ रुपए के सरकारी ठेके आज भी नियंत्रित करते हैं।

Mukhtar Ansari: Mafia or Messiah?
अपराध के साथ ही 1995 में मुख्तार अंसारी ने राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखा। 1996 में वो मऊ सीट से पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए। उसी समय पूर्वांचल के एक अन्य चर्चित माफिया गुट के नेता ब्रजेश सिंह से मुख्तार अंसारी के गुट के टकराव की खबरें भी खासी चर्चा में रहीं।

बताया जाता है कि अंसारी के राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ब्रजेश सिंह ने बीजेपी नेता कृष्णानंद राय के चुनाव अभियान का समर्थन किया। राय ने 2002 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहम्मदाबाद से मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को हराया था।

बाद में कृष्णानंद राय की हत्या हो गई और उसमें मुख्तार अंसारी को मुख्य अभियुक्त बनाया गया। कृष्णानंद राय की हत्या के सिलसिले में उन्हें दिसंबर 2005 में जेल में डाला गया था, तब से वो बाहर नहीं आए हैं। उनके खिलाफ हत्या, अपहरण, फिरौती सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

Mukhtar Ansari: Mafia or Messiah?
2007 में मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। बीएसपी प्रमुख मायावती ने मुख्तार अंसारी को गरीबों के मसीहा के रूप में पेश किया था। बीएसपी के टिकट पर ही मुख्तार ने वाराणसी से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा मगर वह बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी से 17,211 मतों के अंतर से हार गए।

लेकिन 2010 तक आते-आते बहुजन समाज पार्टी से उनके रिश्ते खराब हो गए और फिर उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। बीएसपी से निकाले जाने के बाद तीनों अंसारी भाइयों मुख्तार, अफजाल और सिबगतुल्लाह ने 2010 में खुद की राजनीतिक पार्टी कौमी एकता दल का गठन किया।

 

Mukhtar Ansari: Mafia or Messiah?
माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी की पहचान उनके इलाके में एक अलग रूप में भी होती है। उनके विधानसभा क्षेत्र के लोग बताते हैं कि इलाके के विकास के लिए वो अपनी विधायक निधि से भी ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। यही नहीं, इलाके में लोग तमाम विकास कार्यों को गिनाते भी हैं जो मुख्तार अंसारी ने कराए हैं।

इसके अलावा जरूरतमंद लोगों की मदद के भी तमाम किस्से उनके बारे में सुने जा सकते हैं।

फिलहाल उन्होंने एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा है और बीएसपी नेता मायावती ने यही कहते हुए उन्हें और उनके परिवार को पार्टी में जगह दी है कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ जो कुछ भी मामले हैं वो राजनीतिक द्वेष की वजह से हैं। मायावती ने ये भी आश्वासन दिया है कि निर्दोष पाए जाने पर उनके साथ न्याय जरूर किया जाएगा।
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