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यहां मिले मुगलों के जमाने के चांदी के सिक्के, रात भर लूटते रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Thu, 25 Aug 2016 04:07 AM IST
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बुधवार सुबह पहुंची पुलिस ने डाला डेरा, खजाना लूटने वालों की तलाश
- फोटो : amarujala
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कानपुर में छावनी स्थित डपकेश्वर गंगा घाट परिसर में सदियों पुराने मुगलकालीन चांदी के सिक्के मिलने पर लूटने की होड़ मच गई। सैकड़ों लोगों ने जगह-जगह खुदाई शुरू कर दी। सिक्के पाने की चाह में बरगद के हरे-भरे पेड़ को जेसीबी से उखाड़ फेंका गया। यह सिलसिला मंगलवार रात भर चला। बुधवार को पुलिस पहुंचने पर लोग भाग खड़े हुए। खुदाई में नव युवक गंगा सेवा समिति के पदाधिकारियों का नाम सामने आ रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल भी इसी स्थल के पास से चांदी के सिक्के बरामद हुए थे।
उखाड़ा बरगद का पेड़, रात भर चली खुदाई
लोगों ने बताया कि मंगलवार सुबह किसी व्यक्ति को दो-तीन सिक्के मिले। इसके बाद बात फैलती गई। शाम लगभग 5 बजे जेसीबी से यहां लगा बरगद का पेड़ उखाड़ दिया गया। इसके तने के मोटे भाग को परिसर में किनारे की ओर गाड़ दिया गया। यहां पूरी रात मिट्टी में पुरुष महिलाएं, बच्चे सिक्के ढूंढते रहे। सिक्के पाने को लोहे की जाली से मिट्टी को छाना भी गया। जो लोग फावड़ा, कुदाल, खुरपी, लेकर पहुंचे, उन्हें सिक्के नहीं मिले। जो लोग हाथ से ढूंढ रहे थे उन्हें सफलता मिली। खुदाई में छावनी के एक पार्षद और पार्षद पति का भी नाम आ रहा है।
300-400 सिक्के निकालने का अनुमान
बताया जा रहा है कि खुदाई में निकले सिक्के 1837 से 1847 वर्ष के बीच के हैं। इन पर अरबी, फारसी में कुछ लिखा है। सिक्कों पर 40 हिजरी-शाह आलम का नाम दर्ज है। लोगों ने बताया कि लगभग 300-400 सिक्के लोग बटोर ले गए हैं। एक सिक्के का वजन करीब 12 ग्राम था।
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सिक्का बेच खरीद लाया कपड़े
परिसर में घूम रहे एक युवक ने सिक्का पाने का दावा किया। बताया कि उसे एक सिक्का मिला था। उसे 1000 रुपये में बेच कर नई शर्ट, जींस खरीदी है। यहां मौजूद खुफिया ने उससे जानकारी ली। छावनी थानाध्यक्ष ने बताया कि जब फोर्स पहुंची थी तब महिलाएं भी खुदाई में जुटी थीं। पुलिस देख सभी भाग खड़े हुए।
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उखाड़ा बरगद का पेड़, रात भर चली खुदाई
लोगों ने बताया कि मंगलवार सुबह किसी व्यक्ति को दो-तीन सिक्के मिले। इसके बाद बात फैलती गई। शाम लगभग 5 बजे जेसीबी से यहां लगा बरगद का पेड़ उखाड़ दिया गया। इसके तने के मोटे भाग को परिसर में किनारे की ओर गाड़ दिया गया। यहां पूरी रात मिट्टी में पुरुष महिलाएं, बच्चे सिक्के ढूंढते रहे। सिक्के पाने को लोहे की जाली से मिट्टी को छाना भी गया। जो लोग फावड़ा, कुदाल, खुरपी, लेकर पहुंचे, उन्हें सिक्के नहीं मिले। जो लोग हाथ से ढूंढ रहे थे उन्हें सफलता मिली। खुदाई में छावनी के एक पार्षद और पार्षद पति का भी नाम आ रहा है।
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300-400 सिक्के निकालने का अनुमान
बताया जा रहा है कि खुदाई में निकले सिक्के 1837 से 1847 वर्ष के बीच के हैं। इन पर अरबी, फारसी में कुछ लिखा है। सिक्कों पर 40 हिजरी-शाह आलम का नाम दर्ज है। लोगों ने बताया कि लगभग 300-400 सिक्के लोग बटोर ले गए हैं। एक सिक्के का वजन करीब 12 ग्राम था।
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सिक्का बेच खरीद लाया कपड़े
परिसर में घूम रहे एक युवक ने सिक्का पाने का दावा किया। बताया कि उसे एक सिक्का मिला था। उसे 1000 रुपये में बेच कर नई शर्ट, जींस खरीदी है। यहां मौजूद खुफिया ने उससे जानकारी ली। छावनी थानाध्यक्ष ने बताया कि जब फोर्स पहुंची थी तब महिलाएं भी खुदाई में जुटी थीं। पुलिस देख सभी भाग खड़े हुए।
मुगल बादशाह शाह आलम के कार्यकाल के हैं सिक्के
दपकेश्वर गंगा घाट के पास मिले सिक्के मुगल शासक शाह आलम द्वितीय के समय के हैं। शाह आलम ने 1759 से 1803 तक राज किया। शाह आलम द्वितीय ब्रिटिश सरकार के काफी करीबी माने जाते थे। अंग्रेज उन्हें दिल्ली का बादशाह कहकर बुलाते थे। इन्हीं के शासनकाल में 1799 में मैसूर में टीपू सुल्तान का निष्पादन किया गया। 19 नवंबर 1803 में 78 वर्ष की उम्र में शाह का इंतकाल हुआ।
सिक्के पर दर्ज है कहानी
खुदाई में मिले सिक्कों पर फारसी भाषा में कई जानकारियां दर्ज हैं। फारसी में इस पर ‘हामी दीन आला मोहम्मद सिक्का फजल शाह आलम बादशाह जर्ब हफ्त किशवर 1803’ लिखा हुआ है। एक्सपर्ट डा. इशरत सिद्दीकी बताते हैं कि इसका मतलब ‘दीने मोहम्मद (इस्लाम धर्म) के पैरोकार बादशाह की पूरी हुकूमत में चलने वाला सिक्का होता है। यह चांदी के सिक्के हैं।
इस बाबत जब उत्तर प्रदेश के राज्य पुरातत्व संरक्षण अधिकारी, मनोज वर्मा से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'सिक्के मिलने के जानकारी मिली है। मैं अभी जालौन में हूं, गुरुवार को मौके पर पहुंचेंगे। इसके बाद निरीक्षण कर कुछ कह पाऊंगा।'
सिक्के पर दर्ज है कहानी
खुदाई में मिले सिक्कों पर फारसी भाषा में कई जानकारियां दर्ज हैं। फारसी में इस पर ‘हामी दीन आला मोहम्मद सिक्का फजल शाह आलम बादशाह जर्ब हफ्त किशवर 1803’ लिखा हुआ है। एक्सपर्ट डा. इशरत सिद्दीकी बताते हैं कि इसका मतलब ‘दीने मोहम्मद (इस्लाम धर्म) के पैरोकार बादशाह की पूरी हुकूमत में चलने वाला सिक्का होता है। यह चांदी के सिक्के हैं।
इस बाबत जब उत्तर प्रदेश के राज्य पुरातत्व संरक्षण अधिकारी, मनोज वर्मा से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'सिक्के मिलने के जानकारी मिली है। मैं अभी जालौन में हूं, गुरुवार को मौके पर पहुंचेंगे। इसके बाद निरीक्षण कर कुछ कह पाऊंगा।'