दल-बदल कानून का उल्लंघन करने पर एक दिन भी पद पर रहने का हक नहीं : सुप्रीम कोर्ट
- शीर्ष कोर्ट ने कहा, स्पीकर की शक्तियों पर भी हो विचार
- जांच के लिए स्वतंत्र संस्था के गठन पर विचार करे संसद
- कहा- ऐसे मामलों में ज्यादा समय लंबित नहीं रखना चाहिए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दलबदलुओं के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई सांसद या विधायक दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) का उल्लंघन करता है तो उसे एक दिन भी पद पर रहने का हक नहीं। कोर्ट ने कहा, लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष को मुनासिब समय में सदस्य की अयोग्यता पर फैसला करना चाहिए। अध्यक्ष को ऐसे मामलों में ज्यादा समय लंबित नहीं रखना चाहिए।
जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस वी रामा सुब्रह्मणयम की पीठ ने विधायकों-सांसदों की अयोग्यता के मामले में स्पीकर की शक्तियों पर भी सख्त टिप्पणी की। पीठ ने कहा, संसद को अब इस पर भी विचार करना चाहिए कि स्पीकर, जो खुद किसी पार्टी के सदस्य होते हैं, क्या उन्हें सांसद-विधायक की अयोग्यता पर फैसला लेना चाहिए?
कोर्ट ने कहा, संसद को इस प्रावधान में संशोधन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। ऐसे मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र इकाई बननी चाहिए। क्यों न इसके लिए सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्थायी ट्रिब्यूनल गठित हो, जिससे ऐसे विवादों का जल्द व निष्पक्ष निपटारा हो सके। इससे इस कानून के प्रावधान और कारगर हो जाएंगे जो लोकतंत्र के उचित कार्यपद्धति के लिए बेहद जरूरी है।
चार हफ्ते में याचिका पर फैसले का निर्देश
कोर्ट ने यह टिप्पणी मणिपुर के भाजपा विधायक तथा के वन व पर्यावरण मंत्री टी श्यामकुमार को अयोग्य ठहराने की मांग वाली कांग्रेस नेता केशाम मेघचंद्र सिंह की याचिका पर की। कोर्ट ने मणिपुर विधानसभा स्पीकर को कहा, वह श्यामकुमार को अयोग्य ठहराने की याचिका पर चार हफ्ते में फैसला लें। पीठ ने कांग्रेस विधायक फजुर रहीम और के. मेघचंद्र से कहा, अगर स्पीकर चार हफ्ते में फैसला नहीं लेते तो वे फिर सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं।
कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे कुमार
कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीते श्यामकुमार भाजपा में शामिल हो हुए और मंत्री बन गए। उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए कांग्रेस नेताओं ने स्पीकर से आग्रह किया, लेकिन अब तक इस पर निर्णय नहीं हो सका है। गौरतलब है कि पिछले साल कर्नाटक में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। तब स्पीकर ने कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों को अयोग्य ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, हालांकि अयोग्य ठहराए गए विधायकों को उपचुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी।