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सुरजेवाला Vs मुरलीधर राव: चुनाव के वक्त तेलंगाना में क्यों हैं BJP प्रभारी? रणदीप एमपी में सजा रहे फील्डिंग

Wed, 25 Oct 2023 04:12 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 25 Oct 2023 04:12 PM IST
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सार
MP Election: तीन साल पहले भाजपा हाईकमान ने मुरलीधर राव को प्रदेश की कमान सौंपी थी। राव ने 'अबकी बार 200 पार' का नारा दिया था। पिछले दो सालों में सप्ताह के दो से तीन दिन उनका भोपाल सहित अन्य जिलों में कैंप रहा है, लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले उनका मध्यप्रदेश आना जाना औपचारिक रह गया है...
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MP Election: Where is BJP MP incharge during elections? but while randeep surjewala is very active
MP Election - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

मध्यप्रदेश में प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। भाजपा-कांग्रेस दोनों दल अब मैदान में उतर गए हैं। लेकिन इसी बीच भाजपा के प्रदेश प्रभारी पी. मुरलीधर राव की सक्रियता कम हो गई है। जबकि कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बहुत आक्रामक नजर आ रहे हैं। तीन साल पहले भाजपा हाईकमान ने मुरलीधर राव को प्रदेश की कमान सौंपी थी। राव ने 'अबकी बार 200 पार' का नारा दिया था। पिछले दो सालों में सप्ताह के दो से तीन दिन उनका भोपाल सहित अन्य जिलों में कैंप रहा है, लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले उनका मध्यप्रदेश आना जाना औपचारिक रह गया है। दशहरा के दिन और उससे पहले भी राव तेलंगाना के चुनाव कार्यक्रमों में व्यस्त नजर आए।

इसलिए चुनावी पिक्चर से गायब हुए राव

दरअसल, पी. मुरलीधर राव के चुनाव से 'गायब' होने को उनके विवादित बयानों से जोड़ कर देखा जा रहा है। उन्होंने पिछले साल बयान दिया था कि मेरी 'एक जेब में बनिया और दूसरी में ब्राह्मण हैं' राव के इस बयान के बाद विवाद खड़ा गया था। पार्टी और संगठन सहित कई पूर्व मंत्रियों ने इस मामले में नाराजगी जाहिर की थी। सूत्र बताते हैं कि संगठन ने उन्हें तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए कह दिया है।

सूत्रों का कहना है कि चुनाव की घोषणा से ठीक पहले प्रदेश भाजपा के प्रबंधन की कमान खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले ली थी। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को चुनाव प्रबंधन समिति की कमान सौंपी गई। जबकि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को राज्य का चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को सह प्रभारी बनाया गया। इन सभी नेताओं ने जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश में तुरंत मोर्चा संभाल लिया। रणनीति से लेकर चुनावी प्रबंधन और टिकट वितरण में इन सभी नेताओं की सक्रियता नजर आ रही है। लेकिन राव इन सब से दूर हैदराबाद में लोगों से मिल रहे हैं और चुनावी कार्यक्रमों में शामिल होते दिख रहे हैं। हाल ही में मीडिया सेंटर के उदघाटन कार्यक्रम में राव की मौजूदगी प्रतीकात्मक थी। जनआशीर्वाद यात्राओं में भी वह यदाकदा ही नजर आए।

सुरजेवाला ने संभाला मोर्चा

दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला पार्टी की ताकत बनकर उभरे हैं। सांसद सुरजेवाला अपने बयानों को लेकर अकसर सुर्खियों में रहते हैं। सोशल मीडिया से लेकर रैलियों में सुरजेवाला आक्रामक नजर आ रहे हैं। भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के मामले हों या फिर नेताओं की गतिविधियां, सभी पर सुरजेवाला लगातार अपने बयानों और पोस्ट से हमलावर हैं। हाल ही में 17 अगस्त को सुरजेवाला को मध्यप्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। जिम्मेदारी संभालने के बाद सुरजेवाला ने रणनीति पर तो काम किया ही साथ ही स्थानीय नेताओं के अलग गुटों के साथ भी तालमेल बैठाया।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी सुरजेवाला ही प्रभारी थे। उन्होंने सबसे पहले सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच संतुलन बनाया। कर्नाटक में चार गारंटियों को प्रचारित करने पर जोर दिया। जब कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने गारंटियों के कैंपेन पर सवाल उठाया, तो उन्होंने कह दिया कि लंबा घोषणा पत्र कोई नहीं पढ़ता है। इसलिए खास बातों को प्रसारित करेंगे। ऐसी ही खरी-खरी बात वे यहां के नेताओं को भी कहते हुए दिखाई दे रहे हैं।

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