फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mp and MLA can also do their business says Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल, क्या सांसद और विधायक अपना बिजनेस भी कर सकते हैं?

Tue, 12 Sep 2017 09:03 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 12 Sep 2017 09:03 PM IST
विज्ञापन
Mp and MLA can also do their business says Supreme Court
सांसदों और विधायकों की संपत्तियों में बेतहाशा वृद्धि के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह सवाल उठाया है कि क्या जनप्रतिनिधि होते हुए सांसद और विधायक अपना व्यवसाय कर सकते हैं? शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया है कि दागी नेताओं के खिलाफ जांच और ट्रायल जल्द खत्म होना चाहिए।
विज्ञापन


कोर्ट ने इस पर हैरानी जताई कि भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन क्यों नहीं किया जा रहा है। 

न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर सांसद और विधायक यह बता भी देते हैं कि उनकी संपत्तियों में बेतहाशा वृद्धि उनके अपने व्यवसाय के कारण हुई है, तो यह सवाल उठता है कि क्या जनप्रतिनिधि होने के नाते सांसद व विधायक साथ-साथ अपना व्यवसाय भी कर सकते हैं?
विज्ञापन


पीठ ने यह सवाल लोक प्रहरी नामक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया। याचिका में गुहार लगाई गई है कि चुनाव में पर्चा दाखिल करते वक्त उम्मीदवारों को न केवल खुद की बल्कि परिवार के सभी सदस्यों की आमदनी का स्रोत बताना जरूरी किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने यह कहते हुए इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि अब समय आ गया है जब मतदाताओं को प्रत्याशियों के बारे में संपूर्ण जानकारी देनी चाहिए। चुनाव में पारदर्शिता को अहम बताते हुए कहा कि आखिर उम्मीवारों को अपने बारे में जानकारी क्यों छिपानी चाहिए?

जनप्रतिनिधि की वैध आय के सभी स्रोतों के बारे में जानकारी हासिल करना काफी नहीं है। इसकी भी जांच होनी चाहिए कि उस जनप्रतिनिधि ने इतनी बेशुमार दौलत कैसे कमाई।

वहीं सुनवाई केदौरान पीठ ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के उस हलफनामे पर भी गौर किया जिसमें उन सांसदों एवं विधायकों का ब्यौरा दिया गया है जिनके चुनावी हलफनामे और आयकर रिटर्न में काफी अंतर पाया गया है।

हलफनामे में कहा गया है कि सात लोकसभा सांसदों और 98 विधायकों की संपत्तियों में खासी वृद्धि का पता चला है और इसकी जांच की जा रही है। इन इन सभी द्वारा चुनावी हलफनामे में संपत्तियों के बारे में दी गई जानकारी आयकर रिटर्न में दी गई जानकारी से अलग है।

सीबीडीटी ने सीलबंद लिफाफे में इन सांसदों व विधायकों ने नाम भी दिए हैं। पीठ ने मंगलवार को सीलबंद लिफाफे को खोला और लेकिन नाम सार्वजनिक नहीं किए। पीठ ने कोर्ट मास्टर को फिर से इस जानकारी को सीलबंद करने का निर्देश दिया।

सरकार ने कहा-सबको एक चश्मे से न देखा जाए

Mp and MLA can also do their business says Supreme Court
वोहरा कमेटी की रिपोर्ट का क्या हुआ
न्यायमूर्ति चेलमेश्वर और एस अब्दुल नजीर की पीठ ने राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यवसायियों और अपराधियों के गठजोड़ पर वोहरा कमेटी की रिपोर्ट पर अमल को लेकर भी सवाल किए। पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि उस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू किया जाए।

सीलबंद लिफाफे का क्या मतलब
न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने सवाल उठाया कि जब सब कुछ अखबारों में छप चुका है तो सीलबंद लिफाफे में सूचना देने का क्या मतलब है। इस पर सीबीडीटी के वकील ने कहा कि अखबारों में सिर्फ सांसदों और विधायकों की संख्या छपी है, उनके नाम और दूसरे ब्यौरे नहीं।

सबको एक चश्मे से न देखा जाए
सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से आग्रह किया कि सभी राजनेताओं को एक चश्मे से न देखा जाए क्योंकि कई सांसद शानदार काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि हर आरोप को भ्रष्टाचार का मामला न माना जाए।

उन्होंने विशेष अदालत के गठन की मांग का यह कहते हुए विरोध किया कि सरकार को पहले मामले को निपटाने का समय दिया जाना चाहिए। पहले भी सुप्रीम कोर्ट ऐसा कर चुकी है। 

शक के दायरे में कितने जनप्रतिनिधि
लोक प्रहरी ने आरोप लगाया है कि लोकसभा के 26, राज्यसभा के 11 और राज्य विधानसभाओं के 257 सदस्यों की संपत्तियों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इस आधार पर उसने जनप्रतिनिधियों की आमदनी के स्रोत को भी उजागर किए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed