Pakistan: मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों को कम करने वाले बिल पर इमरान का पलटवार, कहा- दबाव बनाने की कोशिश
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने बाद में ट्वीट किया, अपराधियों के एक गिरोह के द्वारा उच्चतम न्यायालय पर हमला किया जा रहा है। उसकी शक्तियों को कम करने और उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।
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पाकिस्तान की शहबाज सरकार ने देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) की विवेकाधीन शक्तियों को कम करने के लिए संसद में विधेयक पेश किया है। इस बीच, विपक्षी पीटीआई पार्टी के प्रमुख इमरान खान ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है। पूर्व प्रधानमंत्री खान ने कहा कि इसका उद्देश्य न्यायपालिका पर और दबाव बनाना है।
सीजेपी उमर अता बंदियाल ने 22 फरवरी को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में चुनावों का स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने मंगलवार को नेशनल असेंबली में 'उच्चतम न्यायालय (अभ्यास एवं प्रक्रिया) अधिनियम, 2023' विधेयक पेश किया।
पीडीएम का एकमात्र लक्ष्य चुनाव से बचना: इमरान खान
जिओ टीवी ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख के हवाले से मंगलवार को टेलीविजन पर संबोधन में कहा, 'हममें से हर कोई न्यायिक सुधार चाहता है। लेकिन, उनका (पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट गठबंधन की पार्टियों का) एकमात्र लक्ष्य चुनाव से बचना है।'
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'उच्चतम न्यायालय पर हमला कर रहा अपराधियों का गिरोह'
70 वर्षीय खान ने बाद में ट्वीट किया, अपराधियों के एक गिरोह के द्वारा उच्चतम न्यायालय पर हमला किया जा रहा है। उसकी शक्तियों को कम करने और उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। लोग इसका मजबूती से विरोध कर रहे हैं और यह प्रतिरोध आगे भी जारी रहेगा।
'न्यायपालिका पर दबाव बनाने के लिए जल्दबाजी में लिया फैसला'
खबर के मुताबिक, खान ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने के लिए जल्दबाजी में यह फैसला किया है। स्वत: संज्ञान शक्ति संविधान के अनुच्छेद 184 के तहत अदालत के मूल अधिकार क्षेत्र पर आधारित है।
शीर्ष अदालत ने ईसीपी को दिया था राष्ट्रपति से परामर्श का निर्देश
पीठ ने एक मार्च को 3-2 के बहुमत के फैसले में चुनाव आयोग (ईसीपी) को पंजाब में चुनाव के लिए राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में चुनाव के लिए राज्यपाल गुलाम अली से परामर्श करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने पांच सदस्यीय पीठ का पुनर्गठन किया था, जिन्होंने चुनावों में देरी के खिलाफ स्वत: संज्ञान लिया था। शुरू में इस मुद्दे से निपटने के लिए नौ सदस्यीय पीठ का गठन किया था।