‘हे प्रभु’ चूहों से दिलाओ निजात
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सूबे के कई रेलवे स्टेशनों पर चूहे गंभीर खतरा बन गए हैं। मुसाफिरों के लिए तो ये सिरदर्द बने ही हुए हैं, रेलवे के संसाधनों का नुकसान भी कर रहे हैं। चूहों के बिल बना लेने से कई जगहों पर प्लेटफार्म धंस गए हैं। हालांकि चूहों से निजात पाने के लिए रेलवे मोटी रकम खर्च भी करता है, मगर हालात बहुत नहीं बदले हैं।
इलाहाबाद, कानपुर, अलीगढ़, गोरखपुर, मिर्जापुर, टूंडला, आगरा, मथुरा स्टेशन की तमाम समस्याओं में एक चूहे भी हैं। प्लेटफार्म और ट्रैक के बीच आसानी से मिल जाने वाली खाद्य सामग्री पर पलते ये चूहे प्लेटफार्म पर वेंडरों के लिए भी मुसीबत हैं।
मुसाफिरों को असली चुनौती ट्रेन में बैठने और सफर शुरू होने के बाद मिलती है। बर्थ के नीचे रखा सामान अक्सर चूहों के निशाने पर होता है। ऐसा नहीं कि रेलवे के अफसरों को हालात का अंदाजा नहीं मगर इस मुश्किल से छुटकारे के रेलवे के सारे इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं।
चूहे पकड़ने के लिए समय से टेंडर जारी न होने से बढ़ी समस्या
इलाहाबाद जंक्शन से चूहों को भगाने के लिए छह वर्ष पहले नैनी स्थित सेंट्रल वेयर हाउसिंग कारपोरेशन को ठेका दिया गया था। ठेका खत्म होने के बाद यहां चूहों की तादाद फिर बढ़ गई। कानपुर सेंट्रल स्टेशन और सीपीसी माल गोदाम को चूहों से छुटकारा दिलाने के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिया गया है।
हालांकि कंपनी ने अभी काम शुरू नहीं किया है। सन् 2014-2015 में 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष के हिसाब से लखनऊ की एक कंपनी को चूहे पकड़ने और ट्रैक तथा प्लेटफार्म से मिट्टी हटाने का ठेका दिया गया था। जून-जुलाई 2015 में इलाहाबाद के डीआरएम को सेंट्रल स्टेशन के निरीक्षण में प्लेटफार्म नंबर नौ के साथ ही रेलवे ट्रैक पर मिट्टी फैली मिली तो ठेका निरस्त कर दिया गया। साथ ही, तब तक हुए भुगतान की रिकवरी के भी आदेश दिए गए।
वाराणसी कैंट के वरिष्ठ स्टेशन प्रबंधक एके पांडेय ने बताया कि चूहों के खात्मे के लिए 5.50 लाख रुपये का ठेका दिया गया है। ठेकेदार काम कर रहे हैं और चूहों की संख्या में कमी भी आई है। गोरखपुर में भी चूहों की वजह से प्लेटफार्म धंस रहे हैं।
पिछले वर्ष पूर्वोत्तर रेलवे ने चूहों को मारने के लिए पांच लाख रुपये का ठेका दिया था। पूर्वोत्तर रेलवे का दावा है कि चूहे पहले से कम हुए हैं। लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन पर इस लिहाज से कोई ठोस इंतजाम नहीं है। सीनियर डीसीएम अजीत कुमार सिन्हा के मुताबिक चूहे पकड़ने के लिए इस वर्ष ठेका दिए जाने की प्रक्रिया पर विचार चल रहा है।
‘फिलहाल जोन के सभी बड़े स्टेशनों के कोचिंग डिपो और वॉशिंग लाइन से ही चूहों को हटाने का ठेका दिया गया है। स्टेशन और प्लेटफार्म के लिए यह ठेका नहीं दिया गया है। इसकी तैयारी चल रही है।’
- बिजय कुमार (सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे)