मातृ दिवस: कोरोना से जंग के मोर्चे पर डटी हैं ये मांएं, कभी फर्ज के आड़े नहीं आने दी ममता
कोरोना मरीजों की देखभाल करते हुए अपने लाडलों की याद सताती है, फिकर भी होती है और डर भी लगता है, लेकिन ये सुपरहीरो मांएं अपनी ममता को अपने फर्ज के आड़े नहीं आने देती हैं। आज मातृ दिवस के अवसर पर हम ऐसी ही कुछ मांओं की कहानियां बताते हैं, जो इस मुश्किल वक्त में अपने दायित्वों को बखूबी निभा रहीं हैं।
विस्तार
घर में अपने कलेजे के टुकड़ों को छोड़कर कई-कई घंटों तक कोरोना मरीजों की तीमारदारी में लगीं रहतीं हैं। कोरोना मरीजों की देखभाल करते हुए अपने लाडलों की याद सताती है, फिकर भी होती है और डर भी लगता है, लेकिन ये सुपरहीरो मांएं अपनी ममता को अपने फर्ज के आड़े नहीं आने देती हैं। आज मातृ दिवस के अवसर पर हम ऐसी ही कुछ मांओं की कहानियां बताते हैं, जो इस मुश्किल वक्त में अपने दायित्वों को बखूबी निभा रहीं हैं।
देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर की मार से कराह रहा है। इस मुश्किल वक्त में हर देशवासी अपने-अपने स्तर पर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। डॉक्टर, नर्स व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी बाकी लोगों की अपेक्षा थोड़ी अधिक है। कोविड मरीजों के आसपास रहने के चलते इनके संक्रमित होने का खतरा भी अधिक है। ऐसी स्थिति में वे महिला डॉक्टर और नर्सें जिनके छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनकी बहादुरी को सलाम करना बनता है।
आरएन मीणा : सात माह के बच्चे को घर छोड़ कर रहीं मरीजों की तीमारदारी
आरएन मीणा चेन्नई के ग्लेनीगल्स ग्लोबल हॉस्पिटल में पोस्ट कोविड वार्ड में प्रमुख नर्स के तौर पर सेवाएं दे रहीं हैं। 30 वर्षीय मीणा चेहरे पर बड़ी मुस्कान लिए मरीजों की देखभाल में व्यस्त हैं। वे मरीजों से बातचीत कर उन्हें जल्द सब ठीक हो जाएगा का भरोसा भी दिला रही हैं। आरएन मीणा अपने पति और ससुराल वालों के साथ रहती हैं। उनका सात महीने का एक बच्चा भी है, जिसकी देखरेख इन दिनों उनके परिवार वाले ही करते हैं। कोविड मरीजों की देखभाल करते हुए वे बेहद सावधानी बरतती हैं ताकि इस मुश्किल वक्त में कहीं उनका लाडला और प्रियजन भी इस वायरस की चपेट न आ जाएं। मीणा बताती हैं कि पिछले एक साल से कोविड वार्ड में सेवाएं दे रही हैं। कोविड वार्ड में काम करने का फैसला करना कठिन था, लेकिन किया। बस बच्चे को लेकर थोड़ा डरी रहती हूं कि कहीं वो इस संक्रमण की चपेट में न आ जाए।
शाइनी आर: छह माह की गर्भवती, बचा रहीं मरीजों की जान
चेन्नई के ग्लेनीगल्स ग्लोबल हॉस्पिटल में कर्करोग विभाग में सेवाएं दे रहीं शाइनी आर छह माह की गर्भवती हैं।जिस वक्त उन्हें की खुद की केयर और आराम की बेहद जरूरत है, उस दौर में वे मरीजों की जान बचा रही हैं। दरअसल, कोरोना के चलते डॉक्टर पर दबाव बढ़ गया है, ऐसे शाइनी सब छोड़ मरीजों की देखभाल में जुटीं हैं। शाइनी बताती हैं कि खतरा बहुत है, परिवार वाले चिंता में रहते हैं, लेकिन मैं उन्हें आश्वासन देती हूं कि कुछ नहीं होगा मुझे। सब ठीक होगा। मैं अपना और मरीजों का अच्छे से ख्याल रखूंगी।
डॉ. स्पुर्थी अरुण: परिवार के लिए नहीं मिलता वक्त
चेन्नई के प्रोमेड हॉस्पिटल में चिकित्सक और प्रबंध निदेशक डॉ. स्पुर्थी अरुण तीन बच्चों की मां हैं। उनके पति भी पेशे से डॉक्टर हैं। डॉ.स्पुर्थी बताती हैं कि ऐसे में परिवार हम दोनों को परिवार के साथ वक्त बिताने का समय ही नहीं मिलता। हम दोनों संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं, इसलिए बच्चों से पर्याप्त दूरी बनाकर रखती हूं। उन्हें पहले की तरह न गले लगा पाती हूं और न वक्त दे पाती हूं। वे कहती हैं कि उम्मीद है कि हालात जल्द सुधरेंगे और फिर हम पहले की तरह खुश हो पाएंगे। परिवार के साथ वक्त गुजार पाएंगे।