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पाकिस्तान में खत्म हो चुकी हैं बापू से जुड़ी अधिकांश स्मृतियां
Mon, 24 Dec 2018 02:46 AM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Mon, 24 Dec 2018 02:46 AM IST
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पाकिस्तान में महात्मा गांधी से जुड़ी अधिकांश स्मृतियां समाप्त हो चुकी हैं और अब उनसे जुड़े बहुत कम ऐसे प्रतीक बचे हैं जो आजादी से पहले की यादों को ताजा करते हैं। इन्हीं में से एक कराची में 1934 में बापू द्वारा बनवाई गई कराची इंडियन मर्चेंट एसोसिएशन की आधारशिला है।
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इस आधारशिला के बारे में ‘द इक्वेटर लाइन’ पत्रिका के हालिया प्रकाशित संस्करण में विस्तार से बताया गया है। पत्रिका का यह संस्करण महात्मा गांधी को समर्पित है। इसमें चिपको आंदोलन के प्रणेता और गांधीवादी सुंदरलाल बहुगुणा और गांधी की पौत्री तारा गांधी भट्टाचार्य के साक्षात्कार भी हैं।
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कराची इंडियन मर्चेंट एसोसिएशन के प्रशासक ने इस आधारशिला के खिलाफ की जा रही बर्बरता को कई बार रोका और उसे बचाया। वहीं कई बार इसकी सफाई किए जाने के बाद अब जाकर इस आधारशिला को पारदर्शी कांच द्वारा ढंक दिया गया। इस आधारशिला की प्रशस्ति में लिखा है कि कराची इंडियन मर्चेंट एसोसिएशन की आधारशिला महात्मा गांधी द्वारा 8 जुलाई, 1934 को रखी गई थी।
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पाकिस्तान में महिला स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय फोरम के संस्थापक डॉ. शेरशाह सैयद ने फ्रेरे रोड पर इमारत के शीर्ष पर गांधी की विशाल प्रतिमा का जिक्र करते हुए कहा कि किसी समय गांधी की प्रतिमा को हटा दिया गया। वह ज्यादा दिन तक वहां नहीं रही। उन्होंने बताया कि गांधी की एक अन्य प्रतिमा कैंटोनमेंट रोड पर स्थित थी लेकिन उसे 1950 में हटा दिया गया।
सैयद के अनुसार कराची में म्यूनिसिपल पार्क को गांधी गार्डन के रूप में जाना जाता था, जिसे छोटी राजनीतिक और सामाजिक सभाओं के लिए उपयोग किया जाता था। यह जगह अपने नाम और स्थान से समाप्त हो गया। कराची के जूलॉजिकल गार्डन को गांधी गार्डन के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब इसका आधिकारिक नाम कराची जूलॉजिकल गार्डन कर दिया गया है।