सड़क हादसों में तमिलनाडु पहले नंबर पर, उत्तर प्रदेश में हुईं सबसे ज्यादा मौतें
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सड़क दुर्घटना कम करने के लिए सरकार के तमाम प्रयासों का सकारात्मक परिणाम आते नहीं दिखता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 के मुकाबले साल 2018 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 0.46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान सड़क दुर्घटना के दौरान होने वाली मृत्यु दर में भी 2.37 फीसदी की वृद्धि हुई है।
मंत्रालय ने 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं-2018' नाम से जारी रिपोर्ट में बताया है कि साल 2017 में कुल 464910 दुर्घटनाओं के मुकाबले साल 2018 में कुल 467044 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इस दौरान मृत्यु दर में भी लगभग 2.37 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2017 में 147913 के मुकाबले 2018 में 151471 लोग सड़क दुर्घटना में मारे गए थे। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की संख्या में 2017 की तुलना में 2018 में 0.33 फीसदी की कमी आई है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि साल 2010 तक दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके बाद वर्ष दर वर्ष मामूली उतार-चढ़ाव के साथ वे कुछ हद तक स्थिर हो गए। इसके अलावा साल 2010 से 2018 तक की अवधि में दुर्घटनाओं के साथ-साथ दुर्घटनाओं की वार्षिक वृद्धि दर में भारी गिरावट आई और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विकास की अधिक दर के बावजूद, पिछले दशकों की तुलना में कम थी।
अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर ही हुईं
रिपोर्ट बताती है कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) पर ही हुई हैं। देश के कुल सड़क नेटवर्क में एनएच की हिस्सेदारी महज 1.94 फीसदी ही है जबकि कुल सड़क दुर्घटनाओं में इसकी हिस्सेदारी 30.2 फीसदी है। साल 2018 के दौरान सड़क दुर्घटना की वजह से हुई कुल मौतों में 35.7 फीसदी मौत एनएच पर ही हुई।
कुल सड़क में राज्य के राजमार्गों में सड़क की लंबाई का 2.97 फीसदी हिस्सा है जबकि दुर्घटना में इसकी हिस्सेदारी 25.2 फीसदी जबकि मौत में इसकी हिस्सेदारी 26.8 फीसदी है। अन्य सड़कें, जो कुल सड़कों का लगभग 95.1 फीसदी है, क्रमश: 45 फीसदी दुर्घटनाओं और 38 फीसदी मौतों के लिए जिम्मेदार थीं।
सड़क दुर्घटना में हुई मौत में उपयोगकर्ता के लिहाज से देखें तो इसमें सबसे ज्यादा पैदल चलने वालों ने जान गंवाई। इनकी हिस्सेदारी 15 फीसदी रही। इसमें साइकिल चालकों की हिस्सेदारी 2.4 फीसदी और दोपहिया वाहनों चालकों की हिस्सेदारी 36.5 फीसदी थी। इन तीनों को मिला दें तो सड़क दुर्घटना में हुई मौत में इन तीनों की संयुक्त हिस्सेदारी 53.9 फीसदी रही। यदि दुनिया भर के अन्य देशों से तुलना करें तो कह सकते हैं कि भारतीय सड़कें दुनिया में बेहद असुरक्षित हैं।