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चिंताजनक: पेड़ों की एक तिहाई से ज्यादा प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर, दावा...असमय बाढ़-सूखा और आग से बने हालात

Sat, 07 Dec 2024 06:07 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 07 Dec 2024 06:07 AM IST
सार

मूल्यांकन से पता चला है कि दुनिया में पेड़ों की ज्ञात 47,282 प्रजातियों में से कम से कम 16,425 पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। पेड़ों की संकटग्रस्त प्रजातियों की संख्या इस लिस्ट में खतरे में पड़ी पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृपों और उभयचरों की कुल संख्या के दोगुने से भी अधिक है। दुनिया के 192 देशों में पेड़ों की प्रजातियों पर विलुप्त होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है। 

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More than one third of tree species worldwide on verge of extinction Due to climate change
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के चलते दुनियाभर में पेड़ों की एक तिहाई से ज्यादा प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। इसका खुलासा आईयूसीएन रेड लिस्ट में अपडेट के लिए किए गए मूल्यांकन के दौरान हुआ। यह पहला मौका है जब दुनिया के अधिकांश पेड़ों को आईयूसीएन की रेड लिस्ट में शामिल किया गया है।

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मूल्यांकन से पता चला है कि दुनिया में पेड़ों की ज्ञात 47,282 प्रजातियों में से कम से कम 16,425 पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। पेड़ों की संकटग्रस्त प्रजातियों की संख्या इस लिस्ट में खतरे में पड़ी पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृपों और उभयचरों की कुल संख्या के दोगुने से भी अधिक है। दुनिया के 192 देशों में पेड़ों की प्रजातियों पर विलुप्त होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है।  आईयूसीएन के अनुसार उभयचर जीवों की 41 फीसदी प्रजातियां खतरे में हैं। जबकि स्तनधारी जीवों की 26, शंकुधारी वृक्षों की 34, पक्षियों की 12, शार्क और रे की 37, कोरल रीफ की 44, सरीसृपों की 21 और साइकैड पौधों की 71 फीसदी प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। रेड लिस्ट में शामिल 1,66,061 प्रजातियों में से 46,337 प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है।
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इसलिए खतरे में हैं पेड़ों की प्रजातियां
रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन से सूखा, बाढ़, और जंगल की आग जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। ये समस्याएं पेड़ों के जीवित रहने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। जलवायु परिवर्तन का खतरा खासकर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में कहीं ज्यादा स्पष्ट है, जहां समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और तेज तूफान आ रहे हैं। इसके अलावा जंगलों की कटाई, शहरों और सड़कों का निर्माण और कृषि के लिए जमीन खाली कराना जैसी घटनाओं से पेड़ों के आवास नष्ट हो रहे हैं। कीट, रोग और विदेशी आक्रामक प्रजातियां पेड़ पौधों के लिए गंभीर खतरा हैं। ये प्रजातियां अक्सर वैश्विक व्यापार के जरिए आती हैं। प्रदूषण और अति दोहन भी पेड़ों के लिए खतरा बनता जा रहा है। लकड़ी और गैर-लकड़ी उत्पादों के लिए भी पेड़ों की भारी मात्रा में अवैध कटाई की जा रही है।
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द. अमेरिका में 13,668 में 3,356 प्रजातियों पर विलुप्ति का खतरा
दक्षिण अमेरिका में जहां दुनिया में पेड़ों की सबसे ज्यादा विविधता मौजूद है वहां 13,668 में से 3,356 प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा है। दक्षिण अमेरिका दुनिया की लगभग 40 फीसदी पौधों और जानवरों की प्रजातियों का घर है।


भारत में भी घट रही तेजी से संख्या
भारत में भी न केवल सड़कों, घरों आदि से पेड़ गायब हो रहे हैं बल्कि खेतों में भी इनकी संख्या तेजी से घट रही है। कभी गांवों और सड़कों के किनारे आम, नीम, महुआ, बरगद, जामुन जैसे पेड़ों की बहार हुआ करती थी। अब न ही सड़कों पर बरगद, पाकड़ के दरख्त दिखते हैं, न खेतों में आम, महुआ, जामुन। यह पेड़ गायब से होते जा रहे हैं। आईयूसीएन की रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है।

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