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ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने से मिल रहे बड़े फायदे, 2018 में एक लाख से अधिक भारतीयों ने लिया दाखिला

Mon, 01 Apr 2019 11:13 AM IST
Shilpa Thakur वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 01 Apr 2019 11:13 AM IST
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More than one lakh Indian students enrolled in Australian education institutions
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। भारत के एक लाख से भी अधिक छात्रों ने 2018 के दौरान ऑस्ट्रेलिया के शिक्षण संस्थानों में दाखिला लिया है। जो कुल अंतरराष्ट्रीय दाखिले का 12.4 फीसदी है। बीते साल के मुकाबले इसमें 24.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि चीन अब भी आगे है। यहां चीन के 2.56 लाख छात्रों (कुल अंतरराष्ट्रीय दाखिले का 29 फीसदी) ने दाखिला लिया है।


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इसके पीछे का कारण है ऑस्ट्रेलिया द्वारा 'अडिशनल टेंपररी ग्रैजुएट'  वीजा की घोषणा करना। जिसके तहत रजिस्टर्ड यूनिवर्सिटी के क्षेत्रीय कैंपस से ग्रैजुएशन करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के बाद ऑस्ट्रेलिया में एक साल अतिरिक्त काम का अधिकार मिलता है।

वर्तमान नियमों के अनुसार जो छात्र ऑस्ट्रेलिया में बैचलर या मास्टर डिग्री तक की पढ़ाई करते हैं, उन्हें पढ़ाई पूरी होने के बाद दो सालों तक काम करने के लिए वीजा मिल जाता है। नए नियम में इस अवधि को तीन साल किया जाएगा।

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने एक नई स्कॉलरशिप स्कीम की घोषणा की है। ये योजना अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए है। इस योजना के अनुसार हर साल स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को करीब 15,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 7 लाख रुपये) मिलेंगे।
 
सरकार का छात्रों को एक साल अधिक काम करने देने के पीछे उद्देश्य सिडनी, मेलबर्न, पर्थ, ब्रिसबेन और गोल्ड कोस्ट जैसे शहरों से भीड़ को कम करना है। अधिकतर अंतरराष्ट्रीय छात्र और काम करने वाले लोग इन्हीं शहरों में काम करना अधिक पंसद करते हैं। जिससे यहां की आबादी अधिक हो गई है। लेकिन नए वीजा में क्षेत्रीय संस्थानों में पढ़ने का प्रावधान है। 

जिससे लोगों को इन भीड़ वाले इलाकों से हटकर दूसरे क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा। ताकि यहां की आबादी कुछ कम हो सके। इसके अलावा काम के लिए एक साल अधिक का वीजा मिलने से भी अधिक छात्र ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2017 में चीन के 2,30,681 छात्रों ने दाखिला लिया था। 2018 में 2,55,896 छात्रों ने दाखिला लिया। यानि इस दौरान 10.9 फीसदी अधिक छात्रों ने दाखिला लिया है।

भारत के 86,966 छात्रों ने 2017 में दाखिला लिया था। 2018 में ये संख्या 1,08,292 पर पहुंच गई। यानी इस दौरान दाखिले के आंकड़े में 24.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

वहीं अगर नेपाल की बात करें तो 2017 में यहां के 35,212 छात्रों ने दाखिला लिया था, ये संख्या 2018 में 52,243 हो गई। इस आंकड़े में बीते साल के मुकाबले 48.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 

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