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Cheetah: देश में आएंगे और चीते कुछ वर्षों में बढ़ेगा कुनबा, 5-10 साल में सामने आएंगे प्रोजेक्ट चीता के परिणाम
Mon, 19 Sep 2022 05:32 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 19 Sep 2022 05:32 AM IST
सार
लॉरी मार्कर ने कहा कि भारत से विलुप्त होने के बाद चीतों को कहीं और से लाकर बसाने का ही विकल्प बचा था। भारत में इनकी बड़ी आबादी स्थापित करने का लक्ष्य बनाया गया है इसलिए इन्हें अभी और लाया जाएगा।
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चीता (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : पेक्सेल्स
विस्तार
विश्व की प्रमुख चीता विशेषज्ञ और भारत में इन्हें नामीबिया से ट्रांसलोकेट करवाने वाली लॉरी मार्कर का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत को और चीते मिलेंगे। ये चीते नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए जाएंगे। साथ ही कहा, भारत के प्रोजेक्ट चीता के परिणाम अगले 5 से 10 वर्ष में सामने आएंगे।
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लॉरी ने कहा कि भारत से विलुप्त होने के बाद चीतों को कहीं और से लाकर बसाने का ही विकल्प बचा था। भारत में इनकी बड़ी आबादी स्थापित करने का लक्ष्य बनाया गया है इसलिए इन्हें अभी और लाया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका व नामीबिया के साथ इसे लेकर काम हो रहा है। लॉरी ने दावा किया, चीतों को बचाना दुनिया बदलने जैसा है।
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नामीबियाई नामों से ही है अब तक पहचान
आठ चीतों के नाम ओबान, फ्रेडी, सावन्नाह, आशा, सिबली, सैसा और साशा हैं। ये नाम नामीबिया में ही रखे गए थे। केएनपी के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि अभी हम इन्हें नए नाम देने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।
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तीन दिन में एक बार करता है भोजन...
चीता तीन दिन में एक बार भोजन करता है। दो दिन पहले भारत आने से पहले इन्हें भैंस का मीट दिया था। आज फिर इन्हें वही दिया जाएगा।
वन्य जीव संरक्षण में भारत लगातार सफल
52 टाइगर रिजर्व भारत में 18 राज्यों के 75,000 वर्ग किमी में फैले हैं
- यहां विश्व में जंगल के बाघों की 75 फीसदी आबादी
- बाघ संरक्षण के लिए 2022 में 300 करोड़ रुपये आवंटित, 2014 में राशि 185 करोड़ थी
- 2014 में देश में 2,226 बाघ थे, यह संख्या 2018 में 2,967 पहुंचाई गई