राहत : लगातार तीसरे साल झमाझम बरसेंगे बादल, सामान्य से अच्छा रहेगा मानसून
- निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने जारी किया अनुमान, 103 फीसदी तक होगी मानसूनी बारिश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों से लेकर उद्योज जगत तक के लिए बारिश को लेकर राहत की खबर है। लगातार तीसरे साल दक्षिण पश्चिम मानूसन सामान्य से बेहतर रह सकता है।
निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने मंगलवार को बताया कि देश में इस साल जून से सितंबर के बीच मानसूनी सीजन में सामान्य से 103 फीसदी तक बारिश होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का मौसम पूर्वानुमान भी इस सप्ताह के अंत तक सामने आने की संभावना है।
हालांकि चिंता की बात ये है कि स्काईमेट ने पूरे सीजन के दौरान मानसूनी बारिश का जोर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कम रहने की चेतावनी भी दी है यानी देश की कृषि उपज के लिए इस सबसे अहम क्षेत्र में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
देश में 75 फीसदी बारिश के लिए जिम्मेदार जून से सितंबर तक का मानसूनी सीजन ही जिम्मेदार होता है। उत्तरी भारत के अलावा पूर्वोत्तर भारत और कर्नाटक के कुछ इलाकों में भी कम बारिश के आसार हैं। सबसे ज्यादा बारिश मानसूनी सीजन के पहले महीने जून और आखिरी महीने सितंबर में होगी।
स्काईमेट वेदर के अध्यक्ष (मौसम विज्ञान) जीपी शर्मा के मुताबिक, इस साल बारिश का दीर्घकालिक औसत (एलपीए) जून से सितंबर के बीच 103 फीसदी रहेगा। हालांकि इसमें 5 फीसदी कम या ज्यादा के मार्जिन एरर की भी संभावना है। लेकिन इसे सामान्य से अच्छा कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा, 60 फीसदी संभावना सामान्य मानसून की है, लेकिन 15 फीसदी संभावना सामान्य से ज्यादा बारिश की बन रही है। पिछले साल जून से सितंबर तक देश में 880.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी, लेकिन इस बार यह बारिश 907 मिलीमीटर तक हो सकती है।
प्रशांत महासागर में ला नीना के हालात
स्काइमेट के सीईओ योगेश पाटिल के अनुसार, पिछले साल से प्रशांत महासागर में बने ‘ला नीना’ के हालात बने हुए हैं। ला नीना के पूरे मानसूनी सीजन में बने रहने की संभावना है।
हालांकि मानसून के मध्य तक समुद्री तापमान कम होने के संकेत हैं, लेकिन यह बेहद धीमी गति से होगा। ऐसे में मानसून बिगाड़ने वाले ‘अल नीनो’ के उभरने की संभावना इस साल नहीं है।
उन्होंने मानसून के कम या ज्यादा होने से जुड़े एक अन्य अहम फैक्टर भारतीय समुद्री डायपोल (आईओडी) के भी तटस्थ होने और नकारात्मक रहने की संभावना जताई।
साथ ही पाटिल ने कहा कि मानसून को प्रभावित करने वाला एक अन्य अहम सामुद्रिक बदलाव है मैडेन जूलियन ओशिलेशन होता है, जो इस समय हिंद महासागर से दूर है। ऐसे में इसके प्रभाव के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
ऐसी है मानसून की संभावना
- 10 फीसदी संभावना एलपीए की तुलना में 110 फीसदी या उससे अधिक बारिश की
- 15 फीसदी आसार हैं एलपीए की तुलना में 105 से 110 फीसदी तक पानी बरसने के
- 60 फीसदी संभावना एलपीए की तुलना में 96 से 104 फीसदी तक बारिश होने की
- 15 फीसदी आसार हैं एलपीए की तुलना में 90 से 95 फीसदी तक ही वर्षा के
- 00 फीसदी संभावना एलपीए की तुलना में 90 फीसदी से कम पानी बरसने के
किस महीने में कितनी बारिश
| महीना | एलपीए | संभावना |
| जून | 166.9 मिमी | 106 फीसदी |
| जुलाई | 289 मिमी | 97 फीसदी |
| अगस्त | 258.2 मिमी | 99 फीसदी |
| सितंबर | 170.2 मिमी | 116 फीसदी |
अच्छा जा रहा मानसूनी सीजन
- 2019 में सामान्य से 10 फीसदी ज्यादा बारिश
- 2020 में सामान्य से 9 फीसदी ज्यादा बारिश
- 2021 में सामान्य से 3 फीसदी ज्यादा बारिश की संभावना