देशभर में बाढ़ और बारिश से 'त्राहिमाम', पहाड़ों से मैदान तक पढ़ें यहां हर राज्य की खबर
- बाढ़ और बारिश से जनजीवन प्रभावित
- हिमाचल में 23 की मौत, 850 से ज्यादा सड़कें बंद, हाईवे बहा
- उत्तराखंड में बारिश से उफान पर नदियां, गंगोत्री, यमुनोत्री व बदरीनाथ हाईवे बंद
- जम्मू में बारिश से नदी नाले उफान पर, वैष्णो देवी हेलीकॉप्टर सेवा बंद
- पंजाब में भी उफान पर नदियां, 81 बाढ़ प्रभावित गांवों को खाली कराने के आदेश
- राजस्थान में जानलेवा बारिश से तबाही, 16 की मौत
- कृष्णा की बाढ़ से आंध्रप्रदेश के 87 गांव प्रभावित
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विस्तार
हिमाचल में हाल बेहाल, हाईवे बहा
हिमाचल में हो रही तेज बारिश से आम जनजीवन प्रभावित है। प्रदेश में पांच नेशनल हाईवे समेत 350 से ज्यादा सड़कें बंद हैं। मनाली में नेशनल हाईवे बह गया है। जबकि कई जगह सड़कें और पुल बह गए।
तेज बारिश से कई लोगों की मौत की भी खबर है। जानकारी के अनुसार, चंबा की बंदला पंचायत में घर की दीवार गिरने से दादा और पोती की मौत हो गई है। कुल्लू में एक शख्स के बहने की खबर है। शिमला में भूस्खलन में पांच लोग दबे हैं। बचाव कार्य जारी है। घुमारवीं में बादल फट गया है। जबकि बिलासपुर में आठ मकान ध्वस्त हो गई हैं।
प्रदेश में शुक्रवार रात और शनिवार को सामान्य से 200 फीसदी अधिक बारिश हुई। पालमपुर में बंदला की पहाड़ियों पर बादल फटने से न्यूगल और बनेर खड्ड में बाढ़ आ गई। इससे बंदला के ओम बिजली संयंत्र में छह कर्मचारी फंस गए जिन्हें पुलिस और होमगार्ड ने बचाया। कुल्लू के पतलीकूहल में ब्यास नदी में फंसे दो ट्रक चालकों को भी बचाया गया। चंबा में 15 शिक्षकों को सुरक्षित निकाला गया।
उत्तराखंड में बारिश से उफान पर नदियां, गंगोत्री, यमुनोत्री व बदरीनाथ हाईवे बंद, दो की मौत, 18-20 लोग लापता
उत्तराखंड में शनिवार देर रात से हो रही बारिश ने जन-जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। उत्तरकाशी में बादल फटने की खबर है। कई घर जमींदोज हो गए हैं। अब तक दो लोगों की मौत और करीब 20 लोगों के लापता होने की खबर है।
पहाड़ों की रानी मसूरी में भी कैंपटी-यमुनोत्री मार्ग भारी भूस्खलन के बाद बंद हो गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन जेसीबी के माध्यम से सड़क पर आए मलबे को हटाने में जुटा है। वहीं इसके कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई है।
नई टिहरी और आसपास के क्षेत्रों में भी रातभर से बारिश का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री हाईवे ओजरी डबरकोट में भी बंद हो गया है। यमुना नदी के साथ-साथ सहायक नदी -नाले भी उफान पर हैं। चमोली जिले में भी भारी बारिश के चलते बदरीनाथ नेशनल हाईवे लामबगड़ और पीपलकोटी से टंगणी मे अवरुद्ध हो गया है।
भारी बारिश के बाद से अब अलकनंदा, पिण्डर, धोली,नंदाकनी, बालखिला नदियां उफान पर हैं। वहीं, सडकों पर मलबा आने से चमोली में 19 सडकें भी बंद हैं। उत्तरकाशी में भी जिले के अधिकांश हिस्सो में सुबह से बारिश का सिलसिला जारी है। गंगोत्री राजमार्ग चुंगी-बड़ेथी के पास मलबा और पत्थर आने से बंद हो गया है।
वहीं, गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच भूस्खलन का खतरा देखते हुए यात्रियों को पड़ावों पर रोका गया है। सुबह 8 बजे तक गौरीकुंड से 230 श्रद्धालुओं ने धाम के लिए प्रस्थान किया था। बारिश के चलते रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी पर बना पुराना झूला पुल टूटा गया है।
त्यूनी में भी टोंस नदी के उफान पर पर आने से कई घर खतरे की जद में आ गए हैं। तहसील प्रशासन ने 35 परिवारों के घरों को खाली कराकर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।
जम्मू में बारिश से नदी नाले उफान पर
वैष्णो देवी में चॉपर सेवा बाधित
श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में भारी बारिश और धुंध से कटड़ा-सांझीछत चापर सेवा बाधित रही। जम्मू में तवी नदी सहित अन्य नदी नालों का जलस्तर काफी बढ़ गया। जम्मू में शनिवार को बारिश के कारण तवी नदी का जलस्तर बढ़कर 10 फीट तक पहुंच गया, यहां 14 पर अलर्ट और 17 फीट पर खतरे के निशान हैं। जम्मू और आसपास के हिस्सों में दोपहर तक बारिश होती रही। यहां दिन का तापमान सामान्य से 6.7 डिग्री सेल्सियस गिरकर 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लेकिन दिन में आर्द्रता का प्रतिशत 88 रहने से उमस से राहत नहीं मिल पाई।
यूपी: प्रयागराज में उफान पर गंगा-यमुना, लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंचा पानी
शनिवार की रात 12 बजे सिंचाई बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से जारी बुलेटिन के अनुसार नैनी में यमुना का जलस्तर 80.06 मीटर रिकार्ड किया गया। इसी तरह रात 10 बजे तक फाफामऊ में गंगा 79.85 मीटर, छतनाग में 79.21 मीटर के जलस्तर पर पहुंच गई थीं। यहां गंगा-यमुना, दोनों में 10-11 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि होने से बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने दावा किया है कि इसी रफ्तार से जल स्तर बढ़ता रहा तो रविवार की सुबह तक गंगा बड़े हनुमान मंदिर में प्रवेश कर जाएंगी।
जलस्तर में तेज वृद्धि के चलते देर शाम अक्षयवट मार्ग के अलावा महावीर मार्ग पर पानी भर गया है। वहीं, कछारी बस्तियों में पानी घुसने से रात को अफरातफरी मच गई। खासतौर से बेनी बांध के निकट नालों पर बसे लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। रात को ही सैकड़ों परिवारों को गृहस्थी समेटने के लिए मजबूर होना पड़ा। श्मशान घाट पर भी पानी पहुंचने वाला है।
बेतवा नदी उफनाईं, इटावा में चंबल खतरे के निशान से ऊपर
बुंदेलखंड के माताटीला बांध से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ने से यमुना और बेतवा नदी उफना गईं हैं। मध्यप्रदेश के बांध क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से गंगऊ और बरियापुर बांध से मोटी जलधारा केन नदी में गिर रही है, जिससे केन क्षेत्र के बाशिंदों में संभावित बाढ़ को लेकर दहशत है।
नरौरा बांध से गंगा में सवा लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से फर्रुखाबाद में गंगा चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गई है। बांदा क्षेत्र की केन नदी मेें गंगऊ और बरियापुर बांध से लगातार पानी छोड़ने से जलस्तर बढ़ने लगा है। मानसूनी मौसम में पहली बार केन का जलस्तर 103 मीटर पर पहुंचा। खतरे का निशान 104 मीटर है। बांध क्षेत्रों में बारिश से फिर केन नदी का जलस्तर 20 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने लगा है।
पंजाब में भी उफान पर नदियां, 197 गांवों को खाली कराने के आदेश, सड़कें और टावर बहे
भाखड़ा डैम से छोड़े जा रहे पानी के कारण सतलुज नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंच गया है। रोपड़ हैडवर्क से 2 लाख 23 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है जबकि सिरसा नदी से 25 हजार क्यूसिक के लगभग पानी आ रहा है। 1988 में आई बाढ़ के बाद इतना पानी देखा गया है।
वहीं रोपड़ हेडवर्क से एक लाख 89 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जालंधर के उपायुक्त वरिंदर कुमार शर्मा ने सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट फिल्लौर, नकोदर और शाहकोट को 81 बाढ़ प्रभावित गांवों को खाली करने का आदेश दिया है।
नंगल से निकलने वाली नंगल हाइडल नहर में 12500 क्यूसेक, श्री आनंदपुर साहिब हाइडल में 10150 जबकि नंगल डैम से सतलुज दरिया की तरफ 30 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे उपमंडल नंगल और श्री आनंदपुर साहिब के अधीन सतलुज नदी के किनारे आते विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं।
श्री आनंदपुर साहिब के नजदीक दर्जनों गांव में घुसा पानी
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भाखड़ा डैम में पानी की आमद बढ़ने से खोले गए फ्लड गेटों से श्री आनंदपुर साहिब के नजदीक सतलुज दरिया के किनारे बसे दर्जनों गांव में पानी भर गया है। गांव लोदीपुर, बुरज, गज्जपुर, हरीवाल, चंदपुर, मैंहदली कलां में पानी के कारण खड़ी फसल बर्बाद हो गई। इसके अलावा लोगों के घरों में पानी घुस गया। गांवों को आपस में जोड़ने वाली लिंक सड़कों तक पानी भर गया।
राजस्थान में जानलेवा बारिश से तबाही, 16 की मौत, 2 हजार बीघा फसलें नष्ट
पाली शहर में 13 इंच से ज्यादा बारिश होने से 30 से अधिक मुहल्ले में पानी भर गया। यहां एनडीआरएफ-सिविल डिफेंस के जवानों को बुलाया गया है। भारी बारिश के चलते बूंदी, पाली, अजमेर, भीलवाड़ा में शुक्रवार को स्कूल बंद रहे और शनिवार को भी छुट्टी की घोषणा की गई है। जयपुर में गुरुवार से शुरू हुआ बारिश का दौर शुक्रवार को भी जारी रहा। यहां शुक्रवार को 23.91 मिमी बारिश दर्ज की गई। झालावाड़ व टोंक जिले में तीन-तीन, बारां व सवाई माधोपुर जिले में एक-एक, पाली में दो, जोधपुर में तीन, बूंदी में तीन लोगों की मौत हो गई।
झालावाड़ में गुरुवार को कालीसिंध बांध के 17 गेट खोले गए, जबकि छापी के 9 गेट खोले गए। रायपुर क्षेत्र में चंवली बांध पूरी क्षमता से भर गया। यहां पर चादर चल गई। कालीसिंध में आए उफान ने हजारों बीघा फसलें जलमग्न हो गईं। रायपुर क्षेत्र में 2 हजार बीघा फसलें पानी में डूबने से नष्ट हो गईं। तेज बारिश से स्टेट हाईवे 74 बंद है। कई मार्ग ठप हैं।
मूसलाधर बारिश से चंबल नदी उफान पर भिंड, मुरैना, श्योपुर में बाढ़ जैसे हालात
कोटा बैराज से अबतक 2.79 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। चंबल नदी खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही है। इस कारण श्योपुर, मुरैना और भिंड के 27 गांव टापू बन चुके हैं।
उफान से गांवों के रास्ते बंद हो गए है। मोटर बोट की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। दतिया में भी सिंध नदी से सटे गांवों में भी प्रशासन द्वारा अलर्ट जारी किया गया है। शनिवार को श्योपुर-सवाईमाधौपुर और श्योपुर-बारां मार्ग तो खुल गया है। लेकिन खातौली पुल पर जलभराव के कारण श्योपुर-कोटा मार्ग तीसरे दिन भी बंद रहा।
मुरैना में भी बाढ़ से हालात बने हुए हैं। जिले के नदुआपुरा गांव में मूसलाधार बारिश से घरों में पानी घुस गया है। इसकी वजह से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों को मोटर बोट की मदद से सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है।
भारी बारिश से राज्य का बडवानी भी प्रभावित है। बाढ़ से पूरा इलाका टापू में तब्दील हो चुका है। बारिश के पानी घरों और दुकानों में घुस चुका है। निसरपुर के पास कोटेश्वर तीर्थ भी पानी में डूब गया है। इसमें 14 साधु फंस गए। एनडीआरएफ की टीम ने साधुओं को बोट में बैठाकर निकाला।
केरल में हालात सुधर रहे, मृतकों की संख्या 113 हुई
कृष्णा की बाढ़ से आंध्रप्रदेश के 87 गांव प्रभावित
आंध्रप्रदेश में कृष्णा नदी में लगातार बढ़ रहे पानी से आई बाढ़ में 87 गांव प्रभावित हुए हैं और दो लोगों की मौत हो चुकी है। कृष्णा एवं गंटूर जिले में सैंकड़ों एकड़ जमीन और 24 गांव पूरी तरह पानी में डूबे हैं।11553 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। राज्यपाल बिश्वभूषण हरिचंदन ने बाढ़ ग्रस्त इलाके का हवाई निरीक्षण किया।