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मनी लॉन्ड्रिंग: महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री के PA कुंदन को जमानत, लेकिन जेल में ही रहेंगे, जानिए पूरा मामला
Wed, 01 Feb 2023 05:00 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 01 Feb 2023 05:00 PM IST
सार
ईडी ने जून 2021 में कुंदन शिंदे को धन शोधन मामले में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया था, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता देशमुख के निजी सहायक के रूप में काम करते थे।
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कुंदन शिंदे
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के सहयोगी कुंदन शिंदे को एक विशेष अदालत ने धन शोधन के एक मामले में बुधवार को जमानत दे दी। हालांकि, शिंदे जेल में ही रहेंगे क्योंकि वह भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में भी आरोपी हैं, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है।
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देशमुख के निजी सहायक के रूप में काम करते थे कुंदन
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जून 2021 में शिंदे को धन शोधन मामले में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया था, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता देशमुख के निजी सहायक के रूप में काम करते थे। विशेष न्यायाधीश आर एन रोकड़े ने बुधवार को शिंदे की जमानत याचिका मंजूर कर ली।
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याचिका में कुंदन ने कहा- कैद रखना कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग
मामले के अन्य आरोपियों में अनिल देशमुख और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे शामिल हैं। देशमुख जमानत पर बाहर हैं। वाजे अभी भी न्यायिक हिरासत में है। वकील इंद्रपाल सिंह के माध्यम से दायर जमानत याचिका में शिंदे ने कहा था कि उनकी गिरफ्तारी और उन्हें हिरासत में लगातार कैद रखना कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।
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ईडी का देशमुख और शिंदे पर ये आरोप
ईडी ने दावा किया है कि वाजे ने अपने बयान में कहा कि देशमुख ने तत्कालीन गृह मंत्री के आधिकारिक आवास पर एक बैठक के दौरान शिंदे से उनका परिचय कराया था। ईडी का आरोप यह है कि देशमुख ने गृह मंत्री के रूप में सेवा करते हुए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और वाजे के माध्यम से मुंबई के विभिन्न बार और रेस्तरां से 4.70 करोड़ रुपये एकत्र किए।
देशमुख ने एजेंसी के दावों से किया था इनकार
यह धन कथित तौर पर नागपुर स्थित श्री साईं शिक्षण संस्था के माध्यम से किया गया था, जो देशमुख के परिवार द्वारा नियंत्रित एक शिक्षा ट्रस्ट है। देशमुख ने आरोपों से इनकार किया था और दावा किया था कि एजेंसी का पूरा मामला वाजे द्वारा दिए गए दुर्भावनापूर्ण बयानों पर आधारित है।