{"_id":"68d792e853872624b407b3a9","slug":"mohan-bhagwat-says-rss-prayer-is-collective-resolve-of-devotion-to-motherland-2025-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"RSS: मोहन भागवत बोले- संघ की प्रार्थना मातृभूमि के प्रति समर्पण का सामूहिक संकल्प है","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RSS: मोहन भागवत बोले- संघ की प्रार्थना मातृभूमि के प्रति समर्पण का सामूहिक संकल्प है
Sat, 27 Sep 2025 01:02 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
Published by: राहुल कुमार
Updated Sat, 27 Sep 2025 01:02 PM IST
सार
प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि संगठन की 'प्रार्थना' भारत माता की प्रार्थना और देश एवं ईश्वर के प्रति संघ के स्वयंसेवकों का सामूहिक संकल्प है।
विज्ञापन
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि संगठन की 'प्रार्थना' देश और ईश्वर के प्रति स्वयंसेवकों का सामूहिक संकल्प है। मोहन भागवत ने यह बात संघ की प्रार्थना का ऑडियो जारी करने के मौके पर कही।
विज्ञापन
नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने संघ की प्रार्थना का ऑडियो जारी किया। प्रार्थना को गायक शंकर महादेवन ने गाया है। हिंदी में इसकी व्याख्या हरीश भिमानी और मराठी में अभिनेता सचिन खेड़ेकर ने की है।
विज्ञापन
इस मौके पर भागवत ने कहा, यह भारत माता के प्रति भक्ति, प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति है। यह प्रार्थना इस बात की है कि हम देश को क्या दे सकते हैं और फिर ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हमें देश की सेवा करने में मदद करें। उन्होंने कहा कि ऑडियो के माध्यम से यह प्रार्थना अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगी। भागवत ने कहा कि यह प्रार्थना एक ऐसी भावना है, जो स्वयंसेवकों को भारत माता के प्रति भक्ति, प्रेम और समर्पण के सामूहिक संकल्प में सहारा देती है।
विज्ञापन
यह गीत लंदन के एक स्टूडियो में रॉयल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा के साथ रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें सभी विदेशी संगीतकार शामिल थे। आठ अलग-अलग भाषाओं में वॉइस-ओवर दिए गए। मूल संघ प्रार्थना नरहरि नारायण भिड़े द्वारा रचित थी और पहली बार 23 अप्रैल, 1940 को पुणे में संघ शिक्षा वर्ग में यादव राव जोशी द्वारा गाई गई थी। प्रार्थना का प्रारंभिक प्रारूप 1939 में पुणे में एक बैठक के दौरान तैयार किया गया था।