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Modi Surname Case: राहुल की सांसदी जाने से सजा पर रोक तक कब क्या हुआ, जानें मोदी सरनेम केस की पूरी टाइमलाइन

Fri, 04 Aug 2023 01:50 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 04 Aug 2023 01:50 PM IST
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सार
Modi Surname Case: 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने मोदी उपनाम को लेकर टिप्पणी की थी। इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है।
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Modi surname case: Supreme Court gives relief to Rahul Gandhi, here is the timeline
मोदी सरनेम केस - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में मोदी उपनाम टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस मामले में राहुल को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी है। इससे पहले सात जुलाई को मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।


इस मामले में कांग्रेस नेता को 23 मार्च को सूरत कोर्ट ने दोषी करार दिया गया था। उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद 24 मार्च को उनकी संसद की सदस्यता भी चली गई थी। अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। आइये जानते हैं कि मोदी सरनेम मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

राहुल गांधी
राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला
टिप्पणी कब की थी?
2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, 'कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?' इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

Demo Pic
Demo Pic - फोटो : SOCIAL MEDIA
मामले में फैसला कब आया?
2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में इसी साल 23 मार्च को सूरत की सीजेएम कोर्ट ने धारा 504 के तहत राहुल को दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, कोर्ट ने फैसले पर अमल के लिए 30 दिन की मोहलत दे दी। इसके साथ ही उन्हें तुरंत जमानत भी दे दी गई। 

संसद में राहुल गांधी
संसद में राहुल गांधी - फोटो : Social Media
कोर्ट के फैसले के बाद क्या हुआ?
नियम के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या इससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता चली जाती है। राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। अगले ही दिन 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता जाने का आदेश जारी कर दिया। सजा सुनाए जाने के 11 दिन बाद राहुल को सूरत कोर्ट ने 13 अप्रैल तक जमानत दे दी।

13 अप्रैल को क्या हुआ?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी सजा को चुनौती देते हुए सूरत सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील के साथ दो याचिकाएं लगाई गईं, पहली सजा के निलंबन के लिए, जो अनिवार्य रूप से नियमित जमानत के लिए है जबकि दूसरी याचिक दोषसिद्धि के निलंबन के लिए है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर पी मोगेरा की अदालत दोषसिद्धि पर रोक लगाने की कांग्रेस नेता की याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई की। हालांकि, इस दौरान सूरत कोर्ट ने दोषसिद्धि के खिलाफ राहुल गांधी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। 

राहुल गांधी का सरकारी बंगला
राहुल गांधी का सरकारी बंगला - फोटो : Social Media
सांसदी जाने के बाद खाली किया बंगला 
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 22 अप्रैल को अपना आधिकारिक बंगला खाली कर दिया। कहा कि यह सच बोलने के लिए चुकाई गई कीमत है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन तक 10 जनपथ पर अपनी मां के आवास पर रहेंगे। इससे पहले, 27 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने पूर्व कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी को 22 अप्रैल तक अपना आधिकारिक आवास खाली करने को कहा था। 

तीन मई को क्या हुआ?
तीन मई को दूसरे आवेदन यानी दोषसिद्धि के निलंबन की याचिका पर कोर्ट सुनवाई की। जस्टिस प्रच्छक ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद अंतिम आदेश पारित करेंगे।

गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : SOCIAL MEDIA
गुजरात हाईकोर्ट में क्या हुआ?
सात जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने कहा कि राहुल के खिलाफ कम से कम 10 मामले लंबित हैं। मौजूदा केस के बाद भी उनके खिलाफ कुछ और केस भी दर्ज हुए हैं। ऐसा ही एक मामला वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। न्यायमूर्ति ने कहा कि दोषसिद्धि से कोई अन्याय नहीं होगा। दोषसिद्धि न्यायसंगत एवं उचित है। पहले दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए आवेदन खारिज किया जाता है।
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