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Indo-French: भारत का लोहा मनवाने के ट्रैक पर PM मोदी, फ्रांस के साथ नया आयाम रच इस्राइल से बनेगी केमिस्ट्री

Tue, 17 Feb 2026 08:28 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 17 Feb 2026 08:28 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। मोदी ने फ्रांस को भारत का विशेष सहयोगी बताते हुए कहा कि हमारी सहभागिता की कोई सीमा नहीं है। यह समुद्र से भी गहरी और पर्वत से भी ऊंची है।

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Modi’s Diplomatic Push PM Reinforces France Bond, Sets Stage for Israel Alignment
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भारत को क्षेत्रीय चुनौतियों का ‘बॉस’ बनाने की प्रतिबद्धता साफ झलक रही है। उन्होंने फ्रांस राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ नए अध्याय की शुरुआत की। प्रधानमंत्री 25-26 फरवरी को इस्राइल भी जाएंगे। समकक्ष प्रधानमंत्री नेतेन्याहू से भेंट के बाद नया संदेश देंगे।

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पहले बात आज फ्रांस के साथ की 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों ने रक्षा संबंध को अगले 10 वर्ष के लिए नई ऊंचाई पर ले जाने, रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने पर सहमत हुए। फ्रांस के साथ भारत ने 1998 में पहली बार रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया था। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का मुंबई में उद्घाटन किया। नई दिल्ली में युग युगीन भारत की शुरुआत हुई। भारत ने फ्रांस के साथ 20 से अधिक सहमति और समझौतों पर हस्ताक्षर किया। बताते हैं इसे अंतिम रूप देने में विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब भारत और फ्रांस मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत वजन में हल्के और उपयोगी हेलीकाप्टर बनाएंगे। कर्नाटक के वेमगल में टाटा एयर बस एच125 हेलीकाप्टर को असेम्बल करेगी। भारत फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट को लेने की प्रक्रिया में कदम बढ़ा चुका है। हैमर मिसाइल को भी राफेल लड़ाकू विमान में तैनात करने तथा इसके भारत में फ्रांस के साथ मिलकर विकसित करने की सहमति बनी है। भारत और फ्रांस थल सेना के रेसीप्रोकल डिप्लॉयमेंट पर भी सहमत हुए हैं।
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अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत और फ्रांस सहयोगी रहे हैं। ‘त्रिश्ना मिशन (पृथ्वी की सतह की इमेज के लिए)’सहयोग और साझेदारी पर सहमति बनी है। फ्रांस ने ग्रीन हाइड्रोकार्बन में काफी सफलता पाई है। इसके अलावा नागरिक क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा (छोटे रिएक्टर के विकास) के उपयोग में भी सहमति बनी है। दोनों देश एयरोनाटिक्स में स्किल सेंटर की स्थापना, स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में सहयोग समेत अन्य पर सहमत हुए हैं।    
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हथियारों की होड़ में भारत और पाकिस्तान
पाकिस्तान ने हाइपरसोनिक मिसाइल ‘स्मैश’ का परीक्षण करके संदेश दिया है। इसकी मारक क्षमता 350 किमी तक बताई जा रही है। इसके अलावा वह घातक ड्रोन, चीन की हंगोर पनडुब्बी को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रहा है। रक्षा और सामरिक क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि पड़ोसी देश के रणनीतिकारों ने आपरेशन सिन्दूर के बाद कमियों को देखते हुए ताकत बढ़ाने की मुहिम शुरू कर दी है। भारत इसमें कहीं भी पीछे नहीं है। भारत ने चीन की सीमा के पास अग्रिम वायुसैनिक अड्डे पर राफेल लड़ाकू विमान उतारकर संकेत दे दिया है। वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों, जिनमें 18 को तैयार हालत में लेने की प्रक्रिया परवान चढ़ने की उम्मीद है। भारत हिन्द महासागर क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक निगरानी तथा ऑपरेशन के लिए फ्रांस से तकनीक सहयोग की पहल कर रहा है। दोनों देशों की नौसेनाओं में साझेदारी बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा रूस के साथ कई रक्षा सौदों पर प्रक्रिया चल रही है।

भारत-फ्रांस का साथ, दुनिया के लिए संदेश 
भारत का रूस सबसे बड़ा रक्षा मामले का साझीदार देश रहा है। उच्च तकनीकी, हथियार और साझेदारी में अगुआ रहा है। फ्रांस ने भी लीक से थोड़ा आगे बढ़कर हाथ मिलाया है। यूरोपीय देशों में राष्ट्रपति मैक्रों काफी हद तक स्वतंत्र लाइन लेकर चलते हैं। फ्रांस रिश्तों के भरोसे पर जोर देता है। इस तरह से भारत ने फ्रांस के साथ विज्ञान और तकनीक, संयुक्त उद्यम, शोध समेत कई क्षेत्रों में सहमति बनाकर अपनी विविधता को मजबूत किया है। इसमें अमेरिका के लिए भी कूटनीतिक संदेश छिपा है कि हिन्द महासागरीय देश अपनी जरूरत के लिए रुकने वाला नहीं है। परोक्ष रूप से रूस के साथ संबंध, संप्रभुता और विदेश नीति में स्वतंत्रता बनाए रखने की भी झलक है।  


इस्राइल की प्रधानमंत्री की यात्रा पर होगी दुनिया की निगाह
इस्राइल अभी तक एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में फंसा है। अभी मध्य एशिया में तनाव जारी है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महीने के आखिरी सप्ताह (25-26 फरवरी) में इस्राइल जा रहे हैं। वहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतेन्याहू से होगी। नेतेन्याहू और प्रधानमंत्री मोदी की केमिस्ट्री जगजाहिर है। भारत ने इस्राइल को उसके कठिन समय में मदद की है। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। कई क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ेगा। दोनों देशों के बीच में रक्षा क्षेत्र में मिलकर उत्पादन और रणनीतिक साझेदारी की भी शुरुआत हो सकती है। भारत रक्षा ने क्षेत्र में कई सहयोगियों के साथ अपनी निर्भरता को आकार देने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इसमें इस्राइल भी प्रमुख होगा।
 

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