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मोदी सरकार के दो साल: गरीब अल्पसंख्यकों के कौशल विकास पर रहा फोकस
शादाब रिजवी/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 26 May 2016 12:51 PM IST
सार
- मदरसों के विकास की खातिर बजट में किया इजाफा, वर्ल्ड बैंक से भी लिया ऋण
- अल्पसंख्यक शिल्पकारों को हुनरमंद बनाने के लिए नई योजना ‘उस्ताद’ शुरू
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गुरुद्वारे में टेका मत्था
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों के विकास को खास तवज्जो दी है। सरकार ने जातिगत नहीं बल्कि सबका साथ सबका विकास नारे के अनुरूप गरीब अल्पसंख्यकों के विकास का आधार बनाया है। सरकार ने खास कर बालिका शिक्षा और नौजवानों के स्किल डेवलेपमेंट (कौशल विकास) पर जोर रखा है।
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केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने महत्वाकांक्षी नई विकास योजना उस्ताद (अपग्रेडिंग स्किल एंड ट्रेनिंग ट्रेडिशनल आर्ट/क्राफ्ट फॉर डवलपमेंट) शुरू की है। इसके तहत शिल्पकारों के लिए डिजाइन विकास/कैशल उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाए गए हैं। मदरसों के विकास और उनके बदलाव पर मोदी सरकार का जोर रहा। इस क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट की तस्वीर देख विश्व बैंक से भी 50 मिलियन डॉलर ऋण लिया गया। नतीजतन पहली बार मदरसों में तालीम हासिल करने वाले पांच बच्चे सिविल सर्विसेज में चयनित हुए। लड़कियों को स्कॉलरशिप, फेलोशिप दी गई। केंद्र सरकार की पहल से उनकी योजनाओं से 24 मदरसों और 24 हजार बच्चों को लाभ मिला।
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शिल्पकारों को रोजगार मुहैया कराने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नॉलाजी (निफ्ट), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (निड ), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग (आईआईपी) को सहयोगी बनाया है। इन संगठनों का काम शिल्पकारों को ई मार्केटिंग की जानकारी देना, उत्पादकता बढ़ाना, बेहतर डिजाइन करने में दक्ष करना, आकर्षक पैकेंजिग की जानकारी देना और मेलों का आयोजन कर अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने में सहयोग रहेगा। ‘सीखो और कमाओ’ के नारे के साथ शिक्षा, कौशल और समान अवसर के माध्यम से सशक्तिकरण लाने के उद्देश्य से सरकार ने रोजगारपरक ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया। युवाओं की खातिर बजट में इजाफा किया।
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2013-14 में 20, 164 युवाओं को ट्रेनिंग दी गई। उनको काम खड़ा करने के लिए 16.99 करोड़ रुपये दिए गए। 2014-15 में 20,720 युवाओं को रोजगार के लिए 46.21 करोड़ की मदद की गई। 2015-2016 के वित्त वर्ष में 1,23,330 युवाओं को जोड़ा गया और उनके लिए 191.96 करोड़ रुपये फंड रिलीज किया गया। नई मंजिल और मानस योजनाओं से ज्यादा अल्पसंखयकों को जोड़ा। स्कॉलरशिप देने में दरियादिली दिखाई। खासकर छात्राओं को तवज्जो दी गई।