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मोदी सरकार की सिंगल यूज प्लास्टिक बैन की ठंडी पड़ी मुहिम, अब तक नहीं तैयार हुई नई नीति

Thu, 26 Nov 2020 04:12 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 26 Nov 2020 04:12 PM IST
सार

इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम और ईवाय नामक संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 90 लाख टन प्लास्टिक का उपयोग होता है, जिसे इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है। जिसमें गुटखे और शैंपू के पाउच, पन्नी, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ, गिलास और कटलरी के कई छोटे सामान शामिल हैं...

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Modi government single use plastic ban policy not yet ready
Plastic - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

मोदी सरकार द्वारा जोर-शोर से शुरू किए गया सिंगल यूज प्लास्टिक बैन अभियान ठंडा पड़ता हुआ नजर आ रहा है। केंद्र सरकार इस मामले में कदम उठाने के लिए चर्चा जरुर कर रही है,लेकिन अभी तक कोई ठोस रुपरेखा बनकर तैयार नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने तय किया है कि 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक को खत्म करेंगे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक विश्स्त सूत्र ने अमर उजाला से कहा, सिंगल यूज प्लास्टिक बैन पर चल रहा हैं लेकिन कोरोना के चलते ये काम प्रभावित हुआ हैं। जल्दबाजी में कोई फैसला लेते हैं तो रोजगार प्रभावित होगा। इसका कहीं न कहीं अर्थव्यवस्था पर प्रभाव देखने को मिलेगाा।
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एक अन्य सूत्र ने अमर उजाला को बताया कि,'पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इसके लिए एक समिति बनाई गई हैं। जो सभी प्रभावों को देखते हुए एक विस्तृत गाइडलाइन पर काम कर रही है।'
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ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान में एसोसिएशन की पर्यावरण समिति के सदस्य हितेन भेड़ा ने अमर उजाला से कहा, शुरुआती दिनों में कुछ राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर ही प्रतिबंध लगाने को लेकर काम किया था, लेकिन अब वे भी इस मामले में कोई रुचि नहीं ले रही हैं।

भेडा ने आगे बताया कि, घोषणा के बाद से लेकर अब तक केवल सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध को लेकर एक या दो ही बैठकें हुई हैं। मार्च माह में समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को भी दी थी। कोविड के बाद ये मामला रुक सा गया है। मंत्रालय अभी नई गाइडलाइन पर काम कर रहा है।

एफएमसीजी सेक्टर में बढ़ा है प्लास्टिक का उपयोग

भेड़ा ने बताया कि, देश में अभी फिलहाल 50 हजार से अधिक प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग औद्योगिक इकाईयां हैं। इस उद्योग में 40 से 50 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम और ईवाय नामक संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 90 लाख टन प्लास्टिक का उपयोग होता है, जिसे इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है। जिसमें गुटखे और शैंपू के पाउच, पन्नी, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ, गिलास और कटलरी के कई छोटे सामान शामिल हैं और ये वह प्लास्टिक है जिसका दोबारा इस्तेमाल नहीं होता और यही प्लास्टिक प्रदूषण का बड़ा कारण है।

रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ते ई-कॉमर्स और संगठित रिटेल उद्योग के कारण लगातार प्लास्टिक की मांग बढ़ रही है। भारत में रोजाना 25 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। इसमें से 94 फीसदी हिस्सा इस तरह के प्लास्टिक का होता है जो आसानी से री-साइकिल हो सकता है। लेकिन 40 फीसदी नालियों को जाम करता है। वहीं नदियों को प्रदूषित करता है।



रिपोर्ट के अनुसार, एफएमसीजी सेक्टर प्लास्टिक उपयोग बढ़ाने वाला क्षेत्र निकलकर सामने आया है। वित्त वर्ष 2019-20 भारत में पैकेजिंग इंडस्ट्री के 5.15 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। देश में सबसे ज्यादा 35 फीसदी पैकेजिंग, इसके बाद निर्माण और बिल्डिंग के क्षेत्र में 23, ट्रांसपोर्ट में 8, इलेक्ट्रॉनिक्स में 8, कृषि में 7 और अन्य क्षेत्रों में 19 फीसदी प्लास्टिक का उपयोग होता है।

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