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राहत की बरसात कर मोदी सरकार ने बिछाई चुनावी बिसात, मिडिल क्लास पर लगाया दांव
Sat, 02 Feb 2019 02:24 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संदीप भट्ट
Updated Sat, 02 Feb 2019 02:24 AM IST
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Narendra Modi
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अंतरिम बजट के जरिए नाराज चल रहे गांव-किसान और मध्य वर्ग पर राहत की बरसात कर मोदी सरकार ने अगले आम चुनाव के लिए अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। खासतौर से करमुक्त मध्य वर्ग और छोटे किसानों को सीधी नकद राशि के सियासी दांव से सरकार ने सीधे 15 करोड़ लोगों को एक साथ साधने की कोशिश की है। यह वही वर्ग है जिसने लगतार 5 साल राहत की उम्मीद में नाउम्मीदी मिलने के बाद नाराजगी की राह पकड़ ली थी।
इन्हीं की नाराजगी की झलक मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में मिलने के बाद सतर्क सरकार ने अंतरिम बजट केलिए जम कर माथापच्ची की थी। हालांकि यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इन ताबड़तोड़ घोषणाओं से अगले लोकसभा चुनाव में वोटों से भाजपा की झोली कितनी भरेगी।
गौरतलब है कि मध्य वर्ग को जहां वर्ष 2014 के आम बजट के बाद पेश किए गए चार आम बजट में लगातार नाउम्मीदी हाथ लगी थी। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और फसल लागत का डेढ़ गुना कीमत के सरकार केदावे के बावजूद किसान वर्ग सरकार से नाराज चल रहा था। अब जबकि सरकार ने अचानक करमुक्त आय की सीमा में सौ फीसदी की बढ़ोत्तरी की है और अन्य राहतों को जोड़ कर अब करमुक्त आय की सीमा करीब सात लाख हो गई है, तब सरकार को चुनाव से पहले इस वर्ग का अपना मुरीद बनने की उम्मीद है।
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सरकार ने इसी तर्ज पर पूरे देश में ऋण माफी की घोषणा न करने की मजबूरी में छोटे किसानों पर ध्यान केंद्रित किया और दो हेक्टेयर से कम जोत वाले किसानों के खाते में प्रतिवर्ष 6000 रुपये सीध उनके खाते में डालने की घोषणा की। यह महज चुनावी घोषणा न लगे इसलिए सरकार ने इसकी पहली 2000 रुपये की किस्त दिसंबर महीने से जारी करने का प्रावधान कर दिया। अब करमुक्त आय के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या जहां तीन करोड़ है, वहीं छोटे किसान के दायरे में 12 करोड़ किसान आएंगे।
सरकार के एक रणनीतिकारों के मुताबिक अंतरिम बजट और पूर्व की योजनाओं केमाध्यम से मोदी सरकार ने करीब 50 करोड़ लोगों को सीधा लाभ दिया है। इनमें 3 करोड़ मध्यम वर्ग, 12 करोड़ किसान, उज्जवला योजना लाभान्वित 6 करोड़, महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं के लाभान्वित 16 करोड़, असंगठित क्षेत्र के 13 करोड़ लोग शामिल हैं। अब पार्टी की योजना इस लाभान्वितों को खुद से जोड़े रखने की चुनौती है और इसके लिए पार्टी नेतृत्व ने एक दर्जन से अधिक योजना तैयार की है।
बीते करीब डेढ़ साल से किसान के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी सरकार और भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बने थे। उन्होंने ऋणमाफी के जरिए तीन राज्यों में भाजपा से सत्ता छीनी तो इसके जरिए अपने पक्ष में देशव्यापी माहौल बनाने में भी कामयाब रहे। बीते दिनों जब राहुल ने लोगों को न्यूनतम आय की गारंटी देने की घोषणा की सरकार और भाजपा में हलचल मची। अब अंतरिम बजट घोषणा के सहारे 12 करोड़ किसानों को नकद राशि देने व्यवस्था कर सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष की रणनीति के जड़ पर प्रहार करने की कोशिश की है।
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इन्हीं की नाराजगी की झलक मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में मिलने के बाद सतर्क सरकार ने अंतरिम बजट केलिए जम कर माथापच्ची की थी। हालांकि यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इन ताबड़तोड़ घोषणाओं से अगले लोकसभा चुनाव में वोटों से भाजपा की झोली कितनी भरेगी।
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गौरतलब है कि मध्य वर्ग को जहां वर्ष 2014 के आम बजट के बाद पेश किए गए चार आम बजट में लगातार नाउम्मीदी हाथ लगी थी। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और फसल लागत का डेढ़ गुना कीमत के सरकार केदावे के बावजूद किसान वर्ग सरकार से नाराज चल रहा था। अब जबकि सरकार ने अचानक करमुक्त आय की सीमा में सौ फीसदी की बढ़ोत्तरी की है और अन्य राहतों को जोड़ कर अब करमुक्त आय की सीमा करीब सात लाख हो गई है, तब सरकार को चुनाव से पहले इस वर्ग का अपना मुरीद बनने की उम्मीद है।
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सरकार ने इसी तर्ज पर पूरे देश में ऋण माफी की घोषणा न करने की मजबूरी में छोटे किसानों पर ध्यान केंद्रित किया और दो हेक्टेयर से कम जोत वाले किसानों के खाते में प्रतिवर्ष 6000 रुपये सीध उनके खाते में डालने की घोषणा की। यह महज चुनावी घोषणा न लगे इसलिए सरकार ने इसकी पहली 2000 रुपये की किस्त दिसंबर महीने से जारी करने का प्रावधान कर दिया। अब करमुक्त आय के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या जहां तीन करोड़ है, वहीं छोटे किसान के दायरे में 12 करोड़ किसान आएंगे।
सरकार के एक रणनीतिकारों के मुताबिक अंतरिम बजट और पूर्व की योजनाओं केमाध्यम से मोदी सरकार ने करीब 50 करोड़ लोगों को सीधा लाभ दिया है। इनमें 3 करोड़ मध्यम वर्ग, 12 करोड़ किसान, उज्जवला योजना लाभान्वित 6 करोड़, महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं के लाभान्वित 16 करोड़, असंगठित क्षेत्र के 13 करोड़ लोग शामिल हैं। अब पार्टी की योजना इस लाभान्वितों को खुद से जोड़े रखने की चुनौती है और इसके लिए पार्टी नेतृत्व ने एक दर्जन से अधिक योजना तैयार की है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल को जवाब
बीते करीब डेढ़ साल से किसान के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी सरकार और भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बने थे। उन्होंने ऋणमाफी के जरिए तीन राज्यों में भाजपा से सत्ता छीनी तो इसके जरिए अपने पक्ष में देशव्यापी माहौल बनाने में भी कामयाब रहे। बीते दिनों जब राहुल ने लोगों को न्यूनतम आय की गारंटी देने की घोषणा की सरकार और भाजपा में हलचल मची। अब अंतरिम बजट घोषणा के सहारे 12 करोड़ किसानों को नकद राशि देने व्यवस्था कर सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष की रणनीति के जड़ पर प्रहार करने की कोशिश की है।