मोदी सरकार की पहल, सरकारी कामकाज को निपटाने में तेजी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केन्द्र सरकार ने सरकारी फाइलों के आगे सरकने की गति बढ़ाने के लिए कई नई पहल शुरू की है। पीएमओ और कैबिनेट सक्रेटरी ने मंत्रालयों के अधिकारियों से एक्जीक्यूटिव स्तर पर निबटाये जाने वाले मामलों में नियमानुसार बेझिझक निर्णय लेने को कहा है।
इसको लेकर हाल में अधिकारियों को बाकायदा मौखिक स्तर पर ताकीद भी किया गया है। इतना ही नहीं अब कामकाज की लगातार पीएमओ को रिपोर्ट भेजे जाने की रफ्तार भी काफी कम की गई है।
एक मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी के अनुसार पहले ऐसा नहीं था। पहले हर दिन पीएमओ से कोई न कोई जवाब मांगा जाता था। इसके चलते सेक्शन आफिसर, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी तक जवाब तैयार कराने में उलझे रहते थे।
अफसर निर्णय लेने में कतरा रहे थे
दूसरी बड़ी समस्या फाइलों पर मंजूरी की थी। अफसर निर्णय लेने में कतरा रहे थे। एक्जीक्यूटिव स्तर पर भी फाइल लटकी रहती थी। तमाम मामलों में पीएमओ पर निर्भर रहना पड़ता था। लिहाजा कई मामलों में फाइलों का जवाब न आने पर भी मामले लटके रहते थे।
इस स्थिति के चलते मंत्रालय के अफसरों की मेज पर भी फाइलों का ढेर लगा रहता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। जो फाइलें पीएमओ की तरफ जा रही हैं, उन पर न केवल तेजी से निस्तारण हो रहा है बल्कि मंत्रालय के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय में भी इसके चलते तेजी आई है।
एडिशनल सेक्रेटरी के इनपुट पर मुहर लगाते हुए कानून मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव ने भी इसकी पुष्टि की। सूत्र का कहना है कि केन्द्र सरकार के हर विभाग को बाकायदा सर्कुलर भेजा गया है। इसमें अधिकारियों को फाइलों से लेकर कार्यालय की मेज और दफ्तार में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है। सूत्र कहना है कि अधिकारियों को कामकाज में तेजी लाने के लिए भयरहित होकर निर्णय लेने को कहा गया है।
लेकिन चुभता है गुजरात कॉडर
संयुक्त सचिव के अनुसार मौजूदा केन्द्र सरकार के दो साल पूरा कर लेने के बाद से प्रशासनिक और रोजमर्रा के कामकाज के स्तर पर कई नई पहल शुरू हुई है। इसके बाद से कामकाज की गति में भी तेजी से सुधार हुआ है। एक्जीक्यूटिव स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय में भी तेजी आई है। मंत्रालय के सूत्र इसे बाबुओं के कामकाज में गुणात्मक सुधार जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इसे रोजमर्रा की काम करने की शैली में बदलाव आने की संभावना है।
सबकुछ ठीक है लेकिन गुजरात कॉडर चुभ रहा है। करीब दर्जन भर अधिकारियों की प्रतिक्रिया में गुजरात कॉडर के अधिकारियों से प्रतिस्पर्धा साफ देखी गई। कई संयुक्त सचिवों का मानना है कि मौजूदा समय में गुजरात कॉडर के अधिकारियों पर कहीं अधिक किया जा रहा है।
इस राज्य के अधिकारियों को ढंग की तैनाती मिल रही है। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों के बीच ऐसा माना जा रहा है कि गुजरात कॉडर के अधिकारी प्रधानमंत्री जी की कामकाजी शैली से अधिक वाकिफ हैं और बेहतर तरीके से कामकाज की गति बढ़ा सकते हैं।