तमिलनाडु: सचिवालय के लिए समंदर किनारा क्यों? स्टालिन ने उठाए सवाल, मछुआरों के साथ बड़े आंदोलन की चेतावनी
मरीना बीच के पास पट्टिनपक्कम में नए सचिवालय- विधानसभा परिसर के प्रस्ताव को लेकर तमिलनाडु में सियासी विवाद बढ़ गया है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने योजना का विरोध करते हुए कहा कि इससे मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की और कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो डीएमके मछुआरों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगी।
विस्तार
तमिलनाडु में मरीना बीच के पास नया सचिवालय और विधानसभा परिसर बनाने की योजना को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पट्टिनपक्कम के फोरशोर एस्टेट में प्रस्तावित परियोजना का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस योजना से मछुआरों की आजीविका और उनके इलाकों पर असर पड़ सकता है।
स्टालिन ने कहा कि सचिवालय मुख्यमंत्री के काम करने के लिए होता है, समुद्र देखने के लिए नहीं। उन्होंने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा गया तो डीएमके मछुआरों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी।
मछुआरों के विरोध को डीएमके का समर्थन
सोमवार को पट्टिनपक्कम इलाके के कई मछुआरा संगठनों के प्रतिनिधियों ने डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में स्टालिन से मुलाकात की और परियोजना को रोकने के लिए समर्थन मांगा। स्टालिन ने कहा कि डीएमके मछुआरा समुदाय के साथ खड़ी रहेगी और प्रस्ताव वापस लिए जाने तक उनके विरोध का समर्थन करेगी।
स्टालिन ने सरकार से संबंधित शासनादेश वापस लेने और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस प्रस्ताव को खत्म करने की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित जमीन का इस्तेमाल मछुआरों के लिए आवास बनाने में किया जा सकता है।
1,200 करोड़ रुपये की है परियोजना
तमिलनाडु सरकार ने नए सचिवालय और विधानसभा परिसर के लिए पट्टिनपक्कम में 25.55 एकड़ जमीन चिन्हित की है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,200 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकार के 8 सितंबर के शासनादेश में लोक निर्माण विभाग को तीन महीने के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और अंतिम लागत अनुमान तैयार करने का निर्देश दिया गया था। सरकारी जमीन के अलग-अलग हिस्से इस परियोजना के लिए जुटाए गए हैं। इनमें तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड, राजस्व विभाग और ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन की जमीन शामिल है।
ट्रैफिक और स्कूलों को लेकर भी जताई चिंता
स्टालिन ने कहा कि प्रस्तावित जगह के आसपास कई स्कूल हैं और इलाके में पहले से यातायात का दबाव है। उनके मुताबिक, यहां सचिवालय बनने से छात्रों, स्थानीय लोगों और आम जनता को परेशानी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित स्थल के एक किलोमीटर के दायरे में मछुआरों की बस्तियों के साथ कई आवासीय इलाके मौजूद हैं।
उन्होंने दावा किया कि नया सचिवालय बनाने के लिए कई अन्य जगहें उपलब्ध हैं। स्टालिन ने ओमंदुरार सरकारी एस्टेट का भी जिक्र किया, जहां पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के कार्यकाल में नया सचिवालय बनाया गया था। बाद में इस परिसर को सरकारी मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बदल दिया गया था।
'सीएम ने फैसला नहीं लिया' दावे पर सवाल
स्टालिन ने सरकार के उन दावों पर भी सवाल उठाया, जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है और फिलहाल सिर्फ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार की ओर से शासनादेश जारी हो चुका है तो यह कहना कि कोई फैसला नहीं हुआ, उचित नहीं है।
स्टालिन ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह भी दावा किया कि पट्टिनपक्कम की जगह चुनने के पीछे ज्योतिषीय सलाह की बात सामने आई है। हालांकि, यह दावा स्टालिन की ओर से किया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नए सचिवालय- विधानसभा परिसर की योजना को लेकर डीएमके के अलावा एआईएडीएमके समेत अन्य राजनीतिक दलों ने भी आपत्ति जताई है। परियोजना को लेकर मछुआरा संगठनों का विरोध भी जारी है।