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डीएमके में शुरू हुआ एमके स्टालिन युग, इन चुनौतियों का करना होगा सामना

Sat, 01 Sep 2018 11:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Updated Sat, 01 Sep 2018 11:20 AM IST
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MK Stalin era has been started in DMK but the path for new president is not smooth
एमके स्टालिन

करुणानिधि की मौत के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को उनके बेटे एमके स्टालिन को सौंप दिया गया है। करुणानिधि की तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष का पद दिया गया था लेकिन अब इसकी औपचारिक घोषणा हो चुकी है। हालांकि यह घोषणा पहले भी की जा सकती थी लेकिन व्यक्तित्व आधारित पार्टियों के अपने ही कुछ नियम-कायदे होते हैं।

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एमके स्टालिन को भले ही सभी की सहमति से चुना गया है लेकिन उनके बड़े भाई एमके अलागिरी की खिलाफत लगातार मजबूत हो रही है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि स्टालिन अपने भाई को मनाने की कोई योजना निकाल पाते हैं या नहीं। उन्हें अपने दौर को स्टालिन दौर में बदलने के लिए कई परीक्षाओं का सामना करना पड़ेगा।
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उनकी पहली परीक्षा पार्टी और समर्थकों को साथ रखने की है। चूंकि जिन परिस्थितियों में उन्होंने पार्टी की कमान संभाली है उसमें पूरे देश की नजरें तमिलनाडु की राजनीति पर टिकी हुई हैं। इसकी एक वजह राजनीतिक गोलबंदी है और तमिलनाडु की राजनीति एक बड़े शून्य का सामना कर रही है। जयललिता के बाद करुणानिधि के जाने से दोनों ही प्रमुख पार्टियां अपना-अपना चेहरा खो चुकी हैं।

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