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Mizoram: मिजोरम में नहीं है कोई मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल, निजी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होती हैं फिल्में
सार
बसंत जो खुद मिजो और हिंदी फिल्म बनाते हैं, ने बताया शायद मिजोरम देश का पहला राज्य है, जहां पर प्रदेश स्तर पर बिना सरकारी मदद के निजी ओटीटी प्लेटफॉर्म है। यहां बनने वाली सभी फिल्में इन प्लेटफॉर्म में रिलीज होती हैं। तथा कई जगह स्क्रीन पर लोगों को दिखाया जाता है। यह अपनी तरह का नया प्रयोग है और इसका यहां पर जबरदस्त क्रेज है।
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मिजोरम।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मिजोरम देश का एक ऐसा राज्य है जहां हर वर्ष 35 से् 40 फिल्में बन रही हैं लेकिन यहां कोई मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल नहीं हैं। इनमें कई फिल्में अंतरराष्ट्रीय स्तर की होती हैं। लेकिन यह देश का पहला राज्य है जहां पर निजी ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं। और सभी फिल्में और अन्य यहीं पर रिलीज होती हैं। जानकारी के अभाव में फिल्मों को सेंसर बोर्ड तक नहीं ले जाया जाता। बॉलीवुड के लिए यहां पर अपार संभावनाएं हैं। यह कहना है मिजोरम के प्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर और मिजोरम फिल्म फोरम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर बसंत मैशनम का।
बसंत कहते हैं, हमारे यहां हर वर्ष 35 से 40 फिल्में बन रही हैं। कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्में बन रही हैं। लेकिन फिल्म फेस्टिवल या फिर प्रतियोगिताओं में हमारे यहां की कम दिखाई देती हैं। इसका कारण है, फिल्म बनाने के बाद सबसे पहले सेंसर बोर्ड से इसे पास कराना होता है, लेकिन जानकारी के अभाव में डायरेक्टर और प्रोड्यूसर फिल्मों को सेंसर बोर्ड के तक लेकर नहीं जाते। सेंसर बोर्ड अगर मिजोरम की राजधानी आईजोल में एक वर्कशॉप करके, इसके प्रति जागरूक करे तो हमारे यहां कि फिल्में भी दुनिया में छा सकती हैं।
बसंत जो खुद मिजो और हिंदी फिल्म बनाते हैं, ने बताया शायद मिजोरम देश का पहला राज्य है, जहां पर प्रदेश स्तर पर बिना सरकारी मदद के निजी ओटीटी प्लेटफॉर्म है। यहां बनने वाली सभी फिल्में इन प्लेटफॉर्म में रिलीज होती हैं। तथा कई जगह स्क्रीन पर लोगों को दिखाया जाता है। यह अपनी तरह का नया प्रयोग है और इसका यहां पर जबरदस्त क्रेज है। जल्द ही एक-दो और ओटीटी प्लेटफर्म आ रही हैं।
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उन्होंने बताया कि मिजोरम बहुत सुंदर प्रदेश है। यहां पर अभी तक बहुत से लोकेशनों का एक्सप्लोर नहीं हुए हैं। अगर बॉलीवुड के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर आएं तो उनके लिए अभार संभावनाएं हैं। यहां पर अवसर की कोई कमी नहीं है। इससे जहां बॉलीवुड़ को नए लोकेशन मिलेंगे वहीं मिजोरम के कलाकारों को भी अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, अगर कोई बॉलीवुड डायरेक्टर अगर यहां आकर फिल्म बनाना चाहता है तो हम उनकी पूरी मदद करेंगे।
सरकार कर रही है, पूरी मददः प्रताप
मिजोरम सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक और नोडल अधिकारी (फिल्म्स) प्रताप क्षेत्री कहते हैं कि यह सच है कि हमारे यहां पर पहले सिनेमा हॉल होते थे लेकिन अब नहीं हैं।
पहले हिंदी फिल्मों की डबिंग होती थी, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ बंद हो गया। लेकिन अब समय के साथ हमारे यहां पर भी बेहतरीन फिल्में बन रही हैं। अब सरकार ने सरकार फिल्म उद्योग के विकास के लिए काफी सजग हो गई है।
हमारे राज्य के कलाकार बॉलीवुड़ की श्याम बहादुर जैसी बड़ी फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं। हमारा राज्य छोटा है, इसके लिए बहुत ज्यादा फंड नहीं है, लेकिन सरकार अब फिल्मों के विकास के लिए मदद कर रही है। निश्चित रूप से सरकार इस ओर ध्यान दे रही है। इससे हमारे कलाकारों को राज्य से बाहर भी अपना हुनर दिखाने का मौका मिलेगा।
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बसंत कहते हैं, हमारे यहां हर वर्ष 35 से 40 फिल्में बन रही हैं। कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्में बन रही हैं। लेकिन फिल्म फेस्टिवल या फिर प्रतियोगिताओं में हमारे यहां की कम दिखाई देती हैं। इसका कारण है, फिल्म बनाने के बाद सबसे पहले सेंसर बोर्ड से इसे पास कराना होता है, लेकिन जानकारी के अभाव में डायरेक्टर और प्रोड्यूसर फिल्मों को सेंसर बोर्ड के तक लेकर नहीं जाते। सेंसर बोर्ड अगर मिजोरम की राजधानी आईजोल में एक वर्कशॉप करके, इसके प्रति जागरूक करे तो हमारे यहां कि फिल्में भी दुनिया में छा सकती हैं।
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बसंत जो खुद मिजो और हिंदी फिल्म बनाते हैं, ने बताया शायद मिजोरम देश का पहला राज्य है, जहां पर प्रदेश स्तर पर बिना सरकारी मदद के निजी ओटीटी प्लेटफॉर्म है। यहां बनने वाली सभी फिल्में इन प्लेटफॉर्म में रिलीज होती हैं। तथा कई जगह स्क्रीन पर लोगों को दिखाया जाता है। यह अपनी तरह का नया प्रयोग है और इसका यहां पर जबरदस्त क्रेज है। जल्द ही एक-दो और ओटीटी प्लेटफर्म आ रही हैं।
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उन्होंने बताया कि मिजोरम बहुत सुंदर प्रदेश है। यहां पर अभी तक बहुत से लोकेशनों का एक्सप्लोर नहीं हुए हैं। अगर बॉलीवुड के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर आएं तो उनके लिए अभार संभावनाएं हैं। यहां पर अवसर की कोई कमी नहीं है। इससे जहां बॉलीवुड़ को नए लोकेशन मिलेंगे वहीं मिजोरम के कलाकारों को भी अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, अगर कोई बॉलीवुड डायरेक्टर अगर यहां आकर फिल्म बनाना चाहता है तो हम उनकी पूरी मदद करेंगे।
सरकार कर रही है, पूरी मददः प्रताप
मिजोरम सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक और नोडल अधिकारी (फिल्म्स) प्रताप क्षेत्री कहते हैं कि यह सच है कि हमारे यहां पर पहले सिनेमा हॉल होते थे लेकिन अब नहीं हैं।
पहले हिंदी फिल्मों की डबिंग होती थी, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ बंद हो गया। लेकिन अब समय के साथ हमारे यहां पर भी बेहतरीन फिल्में बन रही हैं। अब सरकार ने सरकार फिल्म उद्योग के विकास के लिए काफी सजग हो गई है।
हमारे राज्य के कलाकार बॉलीवुड़ की श्याम बहादुर जैसी बड़ी फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं। हमारा राज्य छोटा है, इसके लिए बहुत ज्यादा फंड नहीं है, लेकिन सरकार अब फिल्मों के विकास के लिए मदद कर रही है। निश्चित रूप से सरकार इस ओर ध्यान दे रही है। इससे हमारे कलाकारों को राज्य से बाहर भी अपना हुनर दिखाने का मौका मिलेगा।