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Mizoram:मिजोरम के संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए विदेशियों को लेनी होगी अनुमति, पीएपी लागू करने की तैयारी
Sun, 30 Mar 2025 07:09 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजोल
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 30 Mar 2025 07:09 PM IST
सार
मिजोरम सरकार संवेदनशील क्षेत्रों की यात्रा करने वाले विदेशियों के लिए आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्रोटेक्टेड एरिया परमिट को लागू करने जा रही है। यह कदम केंद्र की ओर से म्यांमार की सीमा से लगे पूर्वोत्तर की तीन राज्यों मिजोरम, मणिपुर और नगालैंड में पीएपी को दोबारा लागू करने के निर्देश के बाद उठाया है।
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मिजोरम के सीएम लालदुहोमा
- फोटो : ANI
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विस्तार
मिजोरम सरकार राज्य में संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) प्रणाली को लागू करने जा रही है। यह विदेशी नागरिकों के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए आवश्यक यात्रा दस्तावेज है। राज्य सरकार ने यह कदम केंद्र की ओर से म्यांमार की सीमा से लगे पूर्वोत्तर की तीन राज्यों मिजोरम, मणिपुर और नगालैंड में पीएपी को दोबारा लागू करने के निर्देश के बाद उठाया है।
मिजोरम के गृह सचिव वनलालमाविया ने बताया कि राज्य सरकार पीएपी को लागू करने की दिशा में कदम उठा रही है, जिसे प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी) के रूप में भी जाना जाता है। हम पीएपी को लागू करने की प्रक्रिया में हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर लेंगपुई एयरपोर्ट पर एक होल्डिंग एरिया की भी पहचान की जा रही है।
राज्य के गृह सचिव ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से मिजोरम की राजधानी आइजोल में एक नामित कार्यालय खोलने का अनुरोध किया है ताकि विदेशियों के पंजीकरण में आसानी हो, क्योंकि निकटतम विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय कोलकाता में स्थित है। हालांकि पीएपी अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है, लेकिन संबंधित अधिकारी और कानून प्रवर्तन एजेंसियां सतर्क बनाए हुए हैं।
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पूरा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों को संरक्षित क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है। 2011 में, केंद्र ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम में पीएपी व्यवस्था में छूट दी थी और अफगानिस्तानी, पाकिस्तानी और चीनी नागरिकों को छोड़कर सभी विदेशियों को इससे मुक्त कर दिया था। बाद में यह छूट समय-समय पर बढ़ाई गई और यह दिसंबर 2027 तक प्रभावी थी। पिछले साल लागू हुई था पीएपी
कई हिंसक घटनाओं के बाद गृह मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में सुरक्षा चिंताओं के कारण विदेशी नागरिकों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए फिर से पीएपी लागू कर दिया। इससे पहले मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आरोप लगाया था कि कुछ विदेशी मिजोरम को म्यांमार जाने के लिए ट्रांजिट मार्ग के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे ताकि वहां लोकतंत्र समर्थक बलों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जा सके। इसी कारण राज्य में विदेशी पर्यटकों के लिए पीएपी को फिर से लागू किया गया।
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मिजोरम के गृह सचिव वनलालमाविया ने बताया कि राज्य सरकार पीएपी को लागू करने की दिशा में कदम उठा रही है, जिसे प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी) के रूप में भी जाना जाता है। हम पीएपी को लागू करने की प्रक्रिया में हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर लेंगपुई एयरपोर्ट पर एक होल्डिंग एरिया की भी पहचान की जा रही है।
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राज्य के गृह सचिव ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से मिजोरम की राजधानी आइजोल में एक नामित कार्यालय खोलने का अनुरोध किया है ताकि विदेशियों के पंजीकरण में आसानी हो, क्योंकि निकटतम विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय कोलकाता में स्थित है। हालांकि पीएपी अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है, लेकिन संबंधित अधिकारी और कानून प्रवर्तन एजेंसियां सतर्क बनाए हुए हैं।
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पूरा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों को संरक्षित क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है। 2011 में, केंद्र ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम में पीएपी व्यवस्था में छूट दी थी और अफगानिस्तानी, पाकिस्तानी और चीनी नागरिकों को छोड़कर सभी विदेशियों को इससे मुक्त कर दिया था। बाद में यह छूट समय-समय पर बढ़ाई गई और यह दिसंबर 2027 तक प्रभावी थी। पिछले साल लागू हुई था पीएपी
कई हिंसक घटनाओं के बाद गृह मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में सुरक्षा चिंताओं के कारण विदेशी नागरिकों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए फिर से पीएपी लागू कर दिया। इससे पहले मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आरोप लगाया था कि कुछ विदेशी मिजोरम को म्यांमार जाने के लिए ट्रांजिट मार्ग के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे ताकि वहां लोकतंत्र समर्थक बलों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जा सके। इसी कारण राज्य में विदेशी पर्यटकों के लिए पीएपी को फिर से लागू किया गया।