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मिशन यूपी: कांग्रेस के ब्राह्मण कार्ड का नारा-अभी नहीं तो कभी नहीं

Wed, 24 Aug 2016 08:11 AM IST
विनोद अग्निहोत्री/अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद अग्निहोत्री/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 24 Aug 2016 08:11 AM IST
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Mission UP: Congress slogan of Brahmin card 'abhi nahi to kabhi nahi'
राहुल गांधी - फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के आक्रामक ब्राह्मण कार्ड का नारा होगा -अभी नहीं तो कभी नहीं। इस नारे के साथ पार्टी राज्य के12 फीसदी से ज्यादा ब्राह्मण मतदाताओं के बीच जा रही है। पार्टी के ब्राह्मण नेताओं को यह नारा रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने दिया है।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ,विधायक ललितेश पति त्रिपाठी, आराधना मिश्रा, राजेश मिश्रा जैसे युवा चेहरों को इस मुहिम को आगे बढ़ाने की कमान दी गई है। इनके पीछे प्रमोद तिवारी, राजेशपति त्रिपाठी,भूधर नारायण मिश्रा जैसे पार्टी के पुराने ब्राह्मण नेता रहेंगे।
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तय किया गया है कि प्रदेश कांग्रेस के ब्राह्मण नेता अपने अपने क्षेत्रों में गैर राजनीतिक मंच के जरिए पूरे राज्य में जिले जिले में ब्राह्मण सम्मेलन करके यह नारा बुलंद करेंगे कि 27 साल बाद किसी दल ने हाशिए पर धकेले गए इस वर्ग की आवाज उठाई है इसलिए अगर अभी भी ब्राह्मण समुदाय नहीं चेता तो फिर आगे कभी कोई दल उनकी बात करने का साहस नहीं जुटा पाएगा।

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ब्राह्मणों की घटती हिस्सेदारी के मुद्दे उठाए जाएंगे

Mission UP: Congress slogan of Brahmin card 'abhi nahi to kabhi nahi'

इस तरह का पहला सम्मेलन 2 सितंबर को लखनऊ और 4 सितंबर को कानपुर में दूसरा सम्मेलन होगा। इसके बाद इलाहाबाद, वाराणसी, झांसी, गोरखपुर, आजमगढ़, बरेली, मेरठ, आगरा, आगरा आदि शहरों में ये सम्मेलन होंगे।

इनमें ब्राह्मण समाज के साथ पिछले 27 साल में हुए अन्याय और घटती हिस्सेदारी के मुद्दों को उठाया जाएगा। हाल ही में इस रणनीति को आगे बढाने के लिए दिल्ली और लखनऊ में कांग्रेस के ब्राह्मण नेताओं की बैठकें हुईं।

पहली बैठक 16 अगस्त को दिल्ली में जितिन प्रसाद के आवास पर हुई जिसमें राज्य के चुनींदा ब्राह्मण नेताओं को बुलाया गया था।  दूसरी बैठक 21 अगस्त को लखनऊ में गोमती नगर के एक शिक्षण संस्थान में हुई।

27 साल से नहीं हुआ कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री

Mission UP: Congress slogan of Brahmin card 'abhi nahi to kabhi nahi'

वरिष्ठ पत्रकार और प्रदेश कांग्रेस चिंतन प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष पं.जगदीश नारायण शुक्ल केअनुसारउत्तर प्रदेश में 27 साल पहले जब कांग्रेस शासन का अंत हुआ तब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे। उसके बाद राज्य में कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं हुआ।

यही नहीं 1980 में राज्य विधानसभा में 92 ब्राह्मण विधायक थे, जिनकी संख्या लगातार घटती गई और अब मात्र 18 विधायक हैं। कांग्रेस की ब्राह्मण राजनीति को कारगर बनाने के लिए शुक्ल भी खासे सक्रिय हैं। उनका कहना है कि  तमाम राजनीतिक दलों के संगठन में भी ब्राह्मणों की हिस्सेदारी घटी है। हालाकि ब्राह्मणों ने कभी भाजपा का दामन थामा तो कभी बसपा का, लेकिन उनकी भागीदारी नहीं बढ़ी।

जबकि ब्राह्मण दलित और मुस्लिम आजादी केबाद से लगातार कांग्रेस का मूल जनाधार रहे हैं। लेकिन 1990 के बाद से पार्टी का यह जनाधार भाजपा, बसपा और सपा में बंट गया। प्रशांत किशोर ने पहले सबसे इसी मूल जनाधार के एक प्रमुख हिस्से ब्राह्मण समुदाय को वापस लाने की रणनीति बनाई है।

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