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पशु और मानव संघर्ष को कम करने की कवायद: वन्यजीव मंत्रालय ने जारी की एसओपी

Sun, 07 Mar 2021 04:44 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 07 Mar 2021 04:44 AM IST
सार

  • राज्यों को तीन माह में समिति का गठन कर तैयार करनी होगी ऐसे स्थानों की सूची।
  • जैविक बाधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाए।
  • जंगल से सटी जमीन वह चाहे ग्राम समाज की ही क्यों न हो, वहां पशुओं के लिए चारा लगाया जाए।

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Ministry of Wildlife issued standard operating procedure to reduce ever-increasing animal and human conflict
जंगली जानवर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में लगातार बढ़ रहे पशु और मानव संघर्ष को कम करने के लिए वन्यजीव मंत्रालय ने मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। इसमें राज्यों को तीन माह के भीतर समितियों का गठन करने और ऐसे स्थानों को चिह्नित कर सूची तैयार करने को कहा है जहां मानव-पशु संघर्ष की सबसे अधिक संभावनाएं हों या घटनाएं होती हों।

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एसओपी में कहा गया कि इन स्थानों पर जैविक बाधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाए और जंगल से सटी जमीन वह चाहे ग्राम समाज की ही क्यों न हो, वहां पशुओं के लिए चारा लगाया जाए।
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नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की स्थायी समिति ने नीलगाय, जंगली सुअर, हाथी, बाघ, तेंदुआ, शेर, भालू आदि से संघर्ष के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख सचिव, वन और वन्यजीव प्रमुखों के लिए 14 बिंदुओं वाली एसओपी जारी की है। इस पर तुरंत अमल करना होगा।
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समिति ने सिफारिश की है कि वन्य जीवों को वनों के अंदर ही पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराए जाए, जिससे जानवर जंगलों के बाहर कम से कम निकलें। वैज्ञानिक रूप से पहचाने गए जंगली जानवरों के मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए, जिससे मानव का हस्ताक्षेप कम हो और पशुओं के मार्ग में वन और खेतों के मध्य जैविक बाधाओं की निर्माण करके फसलों के पैटर्न में बदलाव किया जाए।

पशु सदैव सुपाच्य और स्वादिष्ट फसलों की ओर आकृष्ट होते हैं ऐसे में ऐसी फसलों को बदलने से भी पशुओं के आक्रामक व्यवहार में कमी आ सकती है। राज्यों द्वारा गठित समिति को कम से कम छह माह में एक बार मिलना होगा। वह संघर्ष रोकने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ले सकेगी उन्हें आमंत्रित कर सकेगी और आवश्यकता अनुसार जंगली जानवरों को मारने, उन्हें डराने के लिए विस्फोटकों का प्रयोग, बिजली की तारों को बिछाने आदि के लिए विभिन्न विभागों के साथ मिलकर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।


समिति मनुष्य वन्य जीव संघर्ष के दौरान प्रभावित व्यक्तियों के लिए मुआवजा संबंधी मसलों पर तुरंत फैसला लेने में भी सक्षम होगी। इसके अलावा एसओपी में रैपिड रिस्पांस टीमों (आरआरटी) की स्थापना करने को कहा गया ताकि जल्द से जल्द प्रभावित स्थान और मनुष्य और पशु की सहायता की जा सके। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी के साथ 24 घंटे सातों दिन चलने वाले सार्वजनिक हेल्पलाइन टोल फ्री नंबरों के साथ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

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