ट्रंप के रुख को लेकर विदेश मंत्रालय चौकन्ना...न जाने कब किस मुद्दे पर क्या बोल जाएं
26 अगस्त को फ्रांस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कश्मीर पर चर्चा हुई और तीन बार कश्मीर को लेकर मध्यस्थता का राग अलापने वाले राष्ट्रपति ट्रंप इस पेशकश से भी पलट भी गए। इस दौरान सबसे दिलचस्प घटना यह हुई कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से हाथ मिलाने के बाद उनके हाथ पर थपकी दी। कुल मिलाकर शानदार दोस्ताना अंदाज, लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय इतनी बड़ी कूटनीतिक सफलता के बाद भी नहीं मुस्कराया। विदेश मंत्रालय और भारत सरकार पूरी तरह से शांत, संयत और संतुलित रही।
क्या हुआ था उस दिन
फ्रांस के शहर बियारेत्ज से लौटकर आए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप भेंट के लिए जैसे ही कक्ष में आए तो वहां सरल और दोस्ताना माहौल था। कश्मीर पर मध्यस्थता जैसा कुछ नहीं था। दोनों शिखर नेताओं के बीच आपसी सौहार्द, सहयोग की अच्छी मुलाकात हुई। अनुमान के मुताबिक ट्रंप को उनके सलाहकारों, रणनीतिकारों ने सुझाव दिया होगा कि कश्मीर (अनुच्छेद 370 और वैधानिक बदलाव) भारत का आंतरिक मामला है और भारत और पाकिस्तान आपसी मुद्दे मिल बैठकर सुलझा सकते हैं। अमेरिका का इस मामले में पहले भी यही रुख था। अमेरिकी रणनीतिकार इसमें अभी छेड़खानी नहीं चाहते हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रणनीतिकारों की सलाह मानते हुए प्रधानमंत्री मोदी के साथ गर्मजोशी भरा समय बिताया।
बड़ी कूटनीतिक सफलता है
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की इस भेंट को बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। दरअसल, कूटनीति में कई पहलू देखे जाते हैं, पर्दे के पीछे से हाव-भावों जैसी बारीकियों पर भी निगाह रखी जाती है। यहां तक कि कौन नेता पहले कक्ष में दाखिल हुआ, कौन मिलने के लिए कितनी दूर तक कक्ष में चलकर गया? किसने पहले मिलने के लिए हाथ बढ़ाया, किसके चेहरे पर कैसे भाव थे? किसने किसके कंधे पर हाथ रखा और गर्मजोशी क्या संकेत दे रही थी? इस भेंट से दोनों शिखर नेताओं के बीच एक अच्छी केमिस्ट्री का संदेश गया।
चुप है भारतीय विदेश मंत्रालय
कूटनीति के जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप कब किस मुद्दे पर क्या बोल जाएं, कितना बोल जाएं और कब अपनी ही बात से और कितनी जल्दी पलट जाएं, कहा नहीं जा सकता। बताते हैं वह अमेरिका में भी कई बार अपना रुख बदल चुके हैं। हालांकि अमेरिका के अन्य विभाग अपने उद्देश्यों में पूरी संवेदनशीलता बरतते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की इस गर्मजोशी से भरी मुलाकात पर कोई जश्न मनाने का जोखिम नहीं पालना चाहता।
बस कश्मीर में न हो मानव अधिकार उल्लंघन
कूटनीतिक जानकार अभी काफी संयत है और वह शुक्रिया अदा कर रहे हैं कि अभी तक कश्मीर में हालात नियंत्रण में है। जबकि जुलाई 2016 में सुरक्षा बलों के साथ आतंकी बुरहान वानी की मौत के एक सप्ताह के भीतर हुए प्रदर्शन आदि में करीब 50 लोग इसका शिकार हो गए थे। इसकी तुलना में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पत्थर फैंकने, प्रदर्शन और हिंसा की घटना नहीं हुई है। सरकार अब स्कूल खोल चुकी है और धीरे-धीरे सहूलियतों में छूट दी जा रही है।