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Annapurna Devi: यौन उत्पीड़न पर हाईकोर्ट के फैसले में 'सुप्रीम' हस्तक्षेप की मांग, मालीवाल ने भी बताया शर्मनाक

Fri, 21 Mar 2025 06:29 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 21 Mar 2025 06:29 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट की तरफ से यौन उत्पीड़न के एक मामले में दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग की है। वहीं आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद स्वाति मालिवाल ने इसे शर्मनाक बताया है।

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Minister seeks SC intervention on HC ruling in sexual assault case, Maliwal slams it as 'shameful'
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर मंत्री की सुप्रीम कोर्ट से अपील - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शुक्रवार को कहा कि वह दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास की परिभाषा पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से पूरी तरह असहमत हैं और उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। इस हफ्ते की शुरुआत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि केवल पीड़िता के स्तनों को पकड़ना और पायजामा की डोरी तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जाता, बल्कि यह किसी महिला के खिलाफ हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करने के दायरे में आता है, जिसका उद्देश्य उसे निर्वस्त्र करना या नग्न होने के लिए मजबूर करना है।
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मैं इस फैसले के पूरी तरह खिलाफ हूं- अन्नपूर्णा देवी
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री देवी ने कहा, 'मैं इस फैसले के पूरी तरह खिलाफ हूं और सर्वोच्च न्यायालय को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सभ्य समाज में इस तरह के फैसले के लिए कोई जगह नहीं है।' उन्होंने फैसले के व्यापक निहितार्थों पर भी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने कहा, 'कहीं न कहीं इसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और हम इस मामले पर आगे चर्चा करेंगे।'
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क्या है पूरा मामला?
बता दें कि, यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 वर्षीय लड़की से जुड़ा है, जिस पर 2021 में दो आरोपियों ने हमला किया था। इस हमले के दौरान आरोपियों ने पीड़िता के स्तनों को पकड़ा, उसके पायजामे की डोरी खींची और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास किया। हालांकि इस दौरान राहगीरों के हस्तक्षेप करने पर हमलावर मौके से भाग गए।

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आप राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने की आलोचना
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे शर्मनाक और बिल्कुल गलत बताया। उन्होंने इस तरह के फैसले से समाज में जाने वाले संदेश पर सवाल उठाया, खासकर बच्चों के खिलाफ अपराधों के संबंध में। उन्होंने कहा, 'यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है। वे समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? कि एक छोटी लड़की के साथ इस तरह के जघन्य कृत्य किए जा सकते हैं और फिर भी इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा?' आप सांसद ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप करने और ऐसी न्यायिक व्याख्याओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में बिना देरी किए हस्तक्षेप करना चाहिए और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।' 


डी राजा ने जज की टिप्पणी को बताया भयावह
वहीं सीपीआई महासचिव डी राजा ने भी यौन हिंसा पर न्यायाधीश की टिप्पणी को भयावह बताया है। उन्होंने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- 'स्तनों को पकड़ना या पायजामे का नाड़ा तोड़ना 'दुष्कर्म का प्रयास' नहीं है? यह यौन हिंसा को महत्वहीन बनाता है और हमारे संस्थानों पर पितृसत्ता की कड़ी पकड़ को दर्शाता है। कानून को पीड़ितों के आघात को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि उसे कमतर आंकना चाहिए'। लोग न्यायपालिका को आखिरी उम्मीद के रूप में देखते हैं और इस तरह का आचरण न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है। शर्मनाक!

शिवसेना सांसद ने सीजेआई को लिखा पत्र
इस मामले में शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने CJI संजीव खन्ना को लिखा, मैं अनुरोध करती हूं कि जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा (इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज) को इस तरह का गलत फैसला सुनाने के लिए अयोग्य ठहराया जाए। इसके अलावा, लड़की और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाना चाहिए। अंत में, भविष्य में इस तरह के असंवेदनशील फैसलों को रोकने के लिए सभी स्तरों पर जजों के लिए समय-समय पर संवेदनशीलता प्रशिक्षण आयोजित किया जाना चाहिए। मैं आपसे इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह करती हूं'।
 

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