देवड़ा बोले- आपातकाल याद दिलाता है कि लोकतंत्र का परीक्षण करने पर वो वापस लड़ता है
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25 जून 1975 को यानी आज से 45 साल पहले भारत में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने आपातकाल की घोषणा की। देश में 21 महीनों तक आपातकाल लागू रहा। इसे लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मिलिंद देवड़ा का कहना है कि आपातकाल याद दिलाता है कि लोकतंत्र का परीक्षण करने पर वो पूरी ताकत से लड़ता है।
देवड़ा ने ट्वीट कर कहा, ‘आपातकाल हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र का जब-जब परीक्षण किया जाता है तब-तब वो पूरी ताकत से वापस लड़ता है। यह राजनीतिक पार्टियों पर भी लागू होता है। लोकतांत्रिक संगठन चुनौतियों से बेहतर तरीके से पार पा सकती हैं। लोकतंत्र निरंतर कार्य है, जिसमें प्रतिबद्धता, बलिदान और ईमानदार आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है।’
Emergency reminds us that democracies,when tested,fight back resiliently.This also applies to political parties. Democratic organisations adapt better&overcome challenges.Democracy is constant work in progress,requiring commitment,sacrifice&honest introspection: Milind Deora,Cong pic.twitter.com/dDCmnhc7Oe
— ANI (@ANI) June 25, 2020
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वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी पार्टी भाजपा की तरफ से गुरुवार को एक वीडियो शेयर किया गया है। जिसका शीर्षक है- 25 जून 1975, आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय। इसके अलावा भाजपा ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा, 'कांग्रेस की काली करतूत और भारतीय लोकतंत्र के सबसे दुःखद अध्याय 25 जून 1975 आपातकाल के विरोध में उठे हर स्वर का हृदय से वंदन।'
गृह मंत्री शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'इस दिन 45 साल पहले सत्ता के लिए एक परिवार के लालच ने देश में आपातकाल लागू करवा दिया। रातों रात राष्ट्र को जेल में बदल दिया गया। प्रेस, अदालतें, भाषण... सब खत्म हो गए। गरीबों और दलितों पर अत्याचार किए गए। लाखों लोगों के प्रयासों के कारण, आपातकाल हटा लिया गया था। भारत में लोकतंत्र बहाल हो गया था लेकिन यह कांग्रेस में अनुपस्थित रहा। एक परिवार के हित पार्टी के हितों और राष्ट्रीय हितों पर हावी थे। यह खेदजनक स्थिति आज की कांग्रेस में भी पनपती है।'