चिंताजनक: माइक्रोप्लास्टिक से सालाना घट सकती है गेहूं-धान की 14 फीसदी पैदावार, समुद्री उत्पादन भी प्रभावित
माइक्रोप्लास्टिक के कारण पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे गेहूं, धान और मक्का जैसी फसलों की पैदावार में सालाना 14% तक गिरावट आ सकती है। यह न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि समुद्री जीवन और खाद्य उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
विस्तार
माइक्रोप्लास्टिक के कारण पौधों की प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ रहा है, जिससे गेहूं, धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार में सालाना 14 फीसदी तक गिरावट हो सकती है। प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और पानी को ग्लूकोज में बदलते हैं और अपना भोजन बनाते हैं। इस प्रक्रिया में जहां पौधें कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते हैं, वहीं ऑक्सीजन भी बनती है, जिसे पौधे वातावरण में मुक्त कर देते हैं। इस दौरान पौधे अपनी जड़ों के जरिए मिट्टी से पानी भी ग्रहण करते हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।
नानजिंग विश्वविद्यालय चीन, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के साथ-साथ अमेरिका और जर्मनी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक न केवल मिट्टी की संरचना को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि पौधों के पोषक तत्व और पानी अवशोषण की प्रक्रिया को भी बाधित कर रहे हैं। यह महीन कण न केवल पृथ्वी पर बल्कि समुद्रों और मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र में भी प्रकाश संश्लेषण को बाधित कर रहे हैं। यानी समुद्रों और मीठे पानी में उगने वाले पौधे भी इसकी वजह से प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा ये पौधों के अंदर विषाक्त पदार्थ भी छोड़ रहे हैं जो क्लोरोफिल भी कम कर रहे हैं। क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण के लिए बेहद आवश्यक होता है।
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36.1 करोड़ मीट्रिक टन अनाज का वार्षिक नुकसान
माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति के कारण भूमि, समुद्र और मीठे पानी के पौधों में प्रकाश संश्लेषण में 18 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो वैश्विक स्तर पर 36.1 करोड़ मीट्रिक टन अनाज का सालाना नुकसान होगा।
समुद्री जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव...
माइक्रोप्लास्टिक के कारण समुद्रों में भी प्रकाश संश्लेषण में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे शैवालों की संख्या में कमी आ रही है। इसका असर समुद्री खाद्य उत्पादन पर भी पड़ रहा है, जिसमें 7.24 फीसदी तक की गिरावट आने की संभावना है। इसकी वजह से सी-फूड पैदावार में 2.43 करोड़ मीट्रिक टन की गिरावट आ सकती है।
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