Study: रक्त में मौजूद माइक्रो RNA का मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर से संबंध, अब किया जा सकेगा रोगियों का शीघ्र निदान
शोधकर्ताओं के अनुसार, इंसानों के शरीर में माइक्रो आरएनए छोटे प्रतिलेख समान होते हैं जो संदेशवाहक आरएनए को लक्षित करते हुए एक साथ कई जीन की अभिव्यक्ति को नियंत्रित करते हैं।
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इंसानों के रक्त में मौजूद माइक्रो आरएनए का संबंध मानसिक स्वास्थ्य विकास से मिला है। एक चिकित्सा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इंसानों के शरीर में बाह्य कोशिकाओं (ईवीएस) में माइक्रो आरएनए का विश्लेषण किया है और उसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों से जुड़ा पाया है। ईवीएस, इंसानों के शरीर की अधिकांश कोशिकाएं जैसे न्यूरॉन, तंत्रिका तंत्र के जरिए पैदा होते हैं।
ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन ट्रांसलेशन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इंसानों के शरीर में माइक्रो आरएनए छोटे प्रतिलेख समान होते हैं जो संदेशवाहक आरएनए को लक्षित करते हुए एक साथ कई जीन की अभिव्यक्ति को नियंत्रित करते हैं।
इन्हें बायो फ्लुइड्स और ईवीएस में पाया जा सकता है। इन माइक्रो आरएनए का संबंध मानसिक विकार जैसे अवसाद, चिंता और ध्यान की कमी, अति सक्रियता विकार (एडीएचडी) से मिला है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन के जरिए भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य विकारों से ग्रस्त रोगियों के शीघ्र निदान और उपचार किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि बाह्य कोशिकाओं का सबसे छोटा प्रकार जिसे एक्सोसोम कहते हैं, रक्त के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचता है। यह मस्तिष्क को रोगजनक और अन्य विषाक्त पदार्थों से बचाता है।
प्रो. जेसिका होने राटो माउर ने कहा, “अभी इन माइक्रो आरएनए को मान्य करने के लिए और अधिक काम होना बाकी है। हालांकि हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि बाह्य कोशिकाओं से आनुवंशिक सामग्री को गैर-आक्रामक रूप से पहचाना जा सकता है।” उन्होंने कहा, “हम पूरी तरह से निश्चित नहीं हो सकते हैं कि विश्लेषण किए गए एक्सोसोम मस्तिष्क से आए हैं, लेकिन हम जानते हैं कि वे कई प्रकार के ऊतकों में जीन अभिव्यक्ति को नियंत्रित करते हैं और उन तंत्रों में शामिल हो सकते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम को बढ़ाते हैं।”
116 मरीजों पर हुआ अध्ययन
जानकारी के अनुसार, इस अध्ययन में कुल 116 मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें बचपन में मानसिक विकारों को लेकर परेशानियां रहीं। तीन साल के अंतराल पर इन मरीजों से लिए दो बार रक्त के नमूने लिए गए और उसमें मौजूद बाह्य कोशिकाओं को रक्त सीरम से निकालने के बाद इसकी विशेषता बताई गई।
शोधकर्ताओं ने बाह्य कोशिकाओं से पैदा होने वाले माइक्रो आरएनए को प्राप्त करने के लिए नमूनों के सीक्वेंस किए। इसके बाद मरीजों को चार समूह में रखा गया। हालांकि इससे उन्हें कोई सांख्यिकी महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला लेकिन इसके परिणामों का उपयोग भविष्य के मेटा-विश्लेषण जांच में किया जा सकता है।
भविष्यवाणी करना होगा संभव
आणविक जीव विज्ञान के प्रो. मार्कोस लेइट सैंटोरो का कहना है कि इस अध्ययन के बाद भविष्य में माइक्रो आरएनए को लेकर भविष्यवाणी करना आसान होगा। भविष्य में डीएनए, एक्सोसोम और पर्यावरण को लेकर एकीकृत भविष्यवाणियां करना संभव होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह आगामी दिनों में माइक्रो आरएनए को लेकर वैज्ञानिक शोध बढ़ाएंगे, वैसे वैसे इसकी ताकतों के बारे में दुनिया को पता चलेगा।