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MHA: केंद्र ने किया न्यायाधिकरण का गठन, अलगाववादी मसर्रत आलम के संगठन एमएलजेके पर करेगा फैसला
Mon, 15 Jan 2024 11:11 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 15 Jan 2024 11:11 PM IST
सार
MHA: केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित अधिकरण का मकसद यह तय करना है कि क्या मुस्लिम लीग जम्मू-कश्मीर (मसर्रत आलम गुट) को गैरकानूनी घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।
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गृह मंत्रालय
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सोमवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण का गठन किया। इसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सचिन दत्ता भी शामिल हैं। इस अधिकरण का मकसद यह तय करना है कि क्या मुस्लिम लीग जम्मू-कश्मीर (मसर्रत आलम गुट) को गैरकानूनी घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।
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जम्मू कश्मीर आधारित इस समूह को सरकार ने 27 दिसंबर को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत पांच साल के लिए गैरकानूनी घोषित कर दिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण का गठन किया। इसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सचिन दत्ता शामिल हैं।
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देश में आतंक का राज कायम करने के इरादे से जम्मू कश्मीर में राष्ट्र-विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों में संगठन की संलिप्तता के मद्देनजर संगठन को प्रतिबंधित कर दिया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए कहा था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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