Supreme Court News: चोरी का सामान रखना ही अपराध नहीं, साबित भी करना होगा
पीठ ने आईपीसी की धारा 411 के बारे में विस्तार से बताया जो चोरी की संपत्ति बेईमानी से प्राप्त करने के अपराध से किस तरह संबंधित है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि केवल चोरी के सामान को अपने पास रखना अपराध तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है और अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपी को यह जानकारी थी कि यह चोरी की संपत्ति है। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने आईपीसी के तहत बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने के अपराध के लिए शिव कुमार नाम के एक व्यक्ति को दो साल की जेल की सजा और 1,000 रुपये के जुर्माने को खारिज कर दिया। पीठ ने आईपीसी की धारा 411 के बारे में विस्तार से बताया जो चोरी की संपत्ति बेईमानी से प्राप्त करने के अपराध से किस तरह संबंधित है।
अदालत ने कहा कि सफल अभियोजन के लिए यह साबित करना पर्याप्त नहीं है कि आरोपी या तो लापरवाह था या उसके पास यह सोचने का कोई कारण था कि संपत्ति चोरी की है, या कि वह इस खरीदे गए सामान के बारे में पर्याप्त पूछताछ करने में विफल रहा। विचाराधीन सामान पर कब्जा अवैध नहीं हो सकता है, लेकिन यह जानते हुए कि यह चोरी की संपत्ति थी, इसे दोषी बनाता है। मामले के तथ्यों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि जब हमने कानून की नजर से मामले को देखा तो पाया कि अभियोजन पक्ष यह स्थापित करने में विफल रहा है कि दोषी को इस बात की जानकारी थी कि उसके कब्जे से जब्त किया गया सामान चोरी का माल है।