होटलों-रेस्टोरेंट्स में ब्रेल लिपि में देना होगा मेन्यू कार्ड, हेरिटेज होटलों को भी नहीं मिलेगी छूट
- राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटी रुल्स का पालन नहीं कर रहे राजधानी के बड़े-बड़े होटल
- हेरिटेज होटलों को भी नियमों से छूट देने से इनकार
- होटलों को ब्रेल लिपि में भी देना होगा मेन्यू कार्ड
विस्तार
देश के सभी होटलों और रेस्टोरेंट्स को दिव्यांग लोगों की सुविधा के मुताबिक सुगम्य (Accessible) बनाना अनिवार्य किया जा चुका है। इस स्पष्ट आदेश के बावजूद देश के कई होटल और रेस्टोरेंट अपने दिव्यांग ग्राहकों को यह सुविधा नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। होटलों के इस व्यवहार से नाखुश निःशक्तजन आयुक्त कार्यालय, दिल्ली ने इनसे जवाब मांगा है।
कार्यालय आयुक्त ने दिल्ली के सभी होटलों-रेस्टोरेंट्स को अपने यहां सुगम्यता की स्थिति पर तीन महीने के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। दिल्ली के मुख्य सचिव, एनडीएमसी, ईडीएमसी, एसडीएमसी सहित सभी संबंधित संस्थाओं से भी अपने यहां चलने वाले होटलों-रेस्टोरेंट्स की सुगम्यता पर स्थिति दाखिल करने का आदेश दिया गया है। मंगलवार को जारी आदेश में हर होटल-रेस्टोरेंट्स में ब्रेल लिपि में मेन्यू कार्ड पेश किये जाने को भी अनिवार्य बनाया गया है।
क्या था मामला
दरअसल, निःशक्तजन आयुक्त कार्यालय दिल्ली के आयुक्त टीडी धारीवाल ने अपने स्तर पर यह पाया था कि राजधानी के अनेक होटल और रेस्टोरेंट अपने यहां दिव्यांग लोगों को सुगम्यता उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने सुओ मोटो एक्शन लेते हुए राजधानी के सभी होटलों-रेस्टोरेंट्स को अपने सेवा परिसर में दिव्यांग ग्राहकों के लिए सुगम्यता उपलब्ध कराने की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी। इसके जवाब में द फेडरेशन ऑफ होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अपने जवाब में बताया कि उनसे संबद्ध 429 बड़े होटलों और रेस्टोरेंट्स ने अपने यहां सुगम्यता की स्थिति पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है। राजधानी के केवल 38 होटलों ने अपने यहां सुगम्यता होने को लेकर आंशिक जानकारी दी है। इसके बाद संबंधित एजेंसियों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी।
कुछ होटलों ने मांगी छूट
इस मामले पर 16 दिसंबर को सुनवाई हुई। कुछ होटलों ने अपनी अलग-अलग बाध्यताओं को दिखाते हुए अपने परिसर में सुगम्यता उपलब्ध कराने से छूट मांगी थी। लेकिन निःशक्तजन आयुक्त कार्यालय ने इस विषय पर कानून में किसी भी तरह का अलग प्रावधान न होने के आधार पर उन्हें कोई छूट देने से इनकार कर दिया।
एंबिएंस मॉल, वसंत कुंज में स्थित टैकोबेल रेस्टोरेंट ने अपने ग्राहकों को सुगम्यता उपलब्ध कराने से यह कहते हुए छूट मांगी थी कि चूंकि वे एक मॉल में सेवा प्रदान कर रहे हैं, इसलिए सुगम्यता उपलब्ध कराना मॉल की जिम्मेदारी है। लेकिन आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि सुगम्यता उपलब्ध कराना सर्विस प्रदाता कंपनी की जिम्मेदारी है। वह इस आधार पर छूट पाने का हकदार नहीं है कि मॉल के निर्माण या उसके ढांचे में परिवर्तन उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। आदेश में कहा गया है कि सुगम्यता उपलब्ध करवाना उनकी जिम्मेदारी है चाहे तो इसके लिए वे अपनी सेवा का स्थान बदल सकते हैं।
कनॉट प्लेस की एक हेरिटेज बिल्डिंग में चलने वाले पाइनियर रेस्टोरेंट ने भी बिल्डिंग की हेरिटेज विशेषता को ध्यान में रखते हुए उसके ढांचे में परिवर्तन को नियमों के खिलाफ बताया। पाइनियर का कहना था कि अगर वे चाहें तो भी नियमों के कारण उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं मिलेगी क्योंकि हेरिटेज इमारत के भवन में बदलाव करना कानूनन संभव नहीं है। आयुक्त कार्यालय ने इन प्रावधानों के बाद भी सुगम्यता देने में छूट देने से इनकार कर दिया। हालांकि, नियमों की उचित समीक्षा के लिए शहरी भवन निर्माण और पर्यटन मंत्रालय को भी पत्र लिखा गया है।
इसी प्रकार राजेंद्र प्लेस में कार्यरत एक कंसल्टेंसी कंपनी ने इस आधार पर छूट मांगी थी कि उनका कार्य सामान्य ग्राहकों को सेवा उपलब्ध कराने का नहीं है। वे केवल होटल निर्माण से संबंधित सलाह देने का कार्य करते हैं। आयुक्त ने इस दलील को इस आधार पर नकार दिया कि चूंकि वे एक पब्लिक बिल्डिंग में काम कर रहे हैं, इसलिए सुगम्यता उपलब्ध करवाना उनका दायित्व है।