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अध्ययन: महिलाओं की अपेक्षा पुरुष मानसिक रूप से अधिक कमजोर, डब्ल्यूएचओ व आईसीएमआर के संयुक्त शोध में खुलासा

Thu, 13 Apr 2023 06:15 AM IST
Jeet Kumar परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 13 Apr 2023 06:15 AM IST
सार

जुलाई से दिसंबर 2018 के बीच 76वें राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को लेकर डाटा एकत्रित किया गया। इस दौरान अलग अलग जिलों में रिपोर्ट हुए छह हजार से ज्यादा मानसिक रोगियों से बातचीत भी की गई।

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Men are mentally weaker than women
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

देश में महिलाओं की तुलना में पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य अधिक कमजोर मिल रहा है जबकि हर दूसरा मानसिक रोगी अशिक्षित पाया गया। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक संयुक्त सर्वेक्षण और उस पर हुए अध्ययन में सामने आई है।

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इसके मुताबिक, देश के 100 में से 71 मानसिक रोगियों की उम्र 17 से 59 वर्ष के बीच है। इनमें से करीब 50 फीसदी मरीजों में किसी भी बात को लेकर चिंता करने की परेशानी है जिसे शोधार्थियों ने अध्ययन में बेकार की चिंता उपनाम दिया है।
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सप्ताह भर पहले जर्नल ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि देश में मानसिक स्वास्थ्य, उसे लेकर परिवारों पर खर्च और गरीबी को लेकर अलग अलग राज्यों की स्थिति पर यह अध्ययन किया है।
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जुलाई से दिसंबर 2018 के बीच 76वें राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को लेकर डाटा एकत्रित किया गया। इस दौरान अलग अलग जिलों में रिपोर्ट हुए छह हजार से ज्यादा मानसिक रोगियों से बातचीत भी की गई।

रोजमर्रा के काम को लेकर तनाव
आईसीएमआर के डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि अध्ययन में पता चला कि देश में प्रत्येक 100 में से 71 मानसिक रोगियों की उम्र 17 से 59 वर्ष के बीच थी। इनमें 56.8% पुरुष थे, जबकि 49.7% अशिक्षित थे। इनमें 50% लोगों ने स्वीकार किया है कि वे बेकार में बहुत ज्यादा चिंता करते हैं। वहीं, 29.6% ने असामान्य व्यवहार और 36.6% अपने रोजमर्रा के कामों को लेकर अक्सर तनाव में रहते हैं।

इलाज के नाम पर बोझ...अध्ययन में शामिल बेंगलुरु के रमैया विवि के प्रो. डेनी जॉन ने कहा, मानसिक स्वास्थ्य पर परिवारों द्वारा की जा रहे खर्च और उसके वित्तीय प्रभावों को कम करने के लिए गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। इसकी शीघ्र जांच व प्रबंधन के जरूरी उपायों पर कार्य करना चाहिए।


सरकार की मंशा...पर काम फिर भी नहीं हुए
इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट है लेकिन जमीनी स्तर पर काम कुछ नहीं किया जा रहा। 2017 में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम लागू किया गया लेकिन इसमें कई स्तर पर खामियां हैं जिन्हें अब तक दूर करने का प्रयास नहीं किया है।

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