#MeToo : भाजपा की महिला मंत्रियों ने ही खोला अकबर के खिलाफ मोर्चा, संघ भी आया मी टू के समर्थन में
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मी टू अभियान के तहत 6 महिला पत्रकारों की तरफ से यौन उत्पीड़न करने के आरोपों के बाद विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर मुश्किल में फंसते जा रहे हैं। उनके साथ सरकार में मौजूद कई महिला मंत्रियों ने बृहस्पतिवार को सीधेतौर पर अकबर के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन उन सभी ने आवाज उठाने वाली महिलाओं के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें न्याय अवश्य मिलना चाहिए।
केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने बृहस्पतिवार को साफतौर पर कहा कि वह आवाज उठाने वाली महिलाओं को न्याय मिलने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा, अकबर को खुद आरोपों पर अपना पक्ष रखना चाहिए। संबंधित व्यक्ति होने के नाते अकबर इस मामले पर बोलने के लिए ज्यादा अच्छी स्थिति में हैं।
पत्रकारों के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी ने कहा, मैं इस बात की सराहना करती हूं कि मीडिया उनकी (अकबर की) पूर्व महिला सहयोगियों का सहयोग कर रहा है। लेकिन मीडिया को इस मुद्दे पर मेरी बजाय अकबर से बयान मांगना चाहिए, क्योंकि मैं निजी तौर पर वहां उपस्थित नहीं थी। बता दें कि मी टू अभियान का भारतीय संस्करण बॉलीवुड व टीवी इंडस्ट्री से शुरू होने के बाद राजनीति में पहुंचा है और खुद ईरानी भी राजनीति में आने से पहले टीवी कलाकार के रूप में ही सक्रिय थीं।
रक्षा मंत्री ने भी किया समर्थन
एक टीवी इंटरव्यू में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी इस मामले पर सवाल पूछा गया। निर्मला ने अकबर के मामले पर बोलने के लिए खुद को सही व्यक्ति नहीं बताया, लेकिन उन्होंने यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं का समर्थन किया। निर्मला ने कहा, जो भी महिलाएं इस स्थिति से गुजरी हैं, उनका बहुत बुरा अनुभव रहा होगा। इस वजह से वे अपने साहस से आगे आई हैं, जिसका मैं समर्थन करती हूं।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी अकबर के मामले पर स्पष्ट तौर पर बोलने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने मी टू अभियान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, मैं किसी एक के मामले पर नहीं बोलूंगी। लेकिन इतना कहूंगी कि मी टू अभियान का बहुत बड़ा लाभ हुआ है। काम की जगह पर महिलाएं सुरक्षित हो गई हैं। पहले काम की जगह या सार्वजनिक स्थानों पर अभद्रता होने के बाद महिलाएं संकोच में बोल नहीं पाती थीं, लेकिन अब वह संकोच टूट गया है।
मी टू को मिला आरएसएस का समर्थन
भाजपा का थिंकटैंक कहे जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने बृहस्पतिवार को मी टू अभियान का समर्थन किया। दत्तात्रेय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर आंखी दास की पोस्ट शेयर करते हुए अपना समर्थन जाहिर किया।
दास ने अपने पोस्ट में कहा था, आपको किसी पीड़ित महिला पत्रकार का समर्थन करने के लिए मी टू अभियान की आवश्यकता नहीं है। न आपको महिला होने की आवश्यकता है। आपको महज सही और गलत की समझने की आवश्यकता है। दत्तात्रेय ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, मैं इसे पसंद करता हूं। इन्होंने ठीक वही लिखा है, जो मैं महसूस करता हूं।
अकबर के मामले पर बोलने से बचे पात्रा, प्रसाद
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद बृहस्पतिवार को विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर मी टू अभियान के तहत लगे आरोपों पर पूछे गए सवालों का जवाब देने से कतराते दिखाई दिए। उधर, कोलकाता में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अकबर सरकार का हिस्सा हैं और इस मामले में सरकार को ही निर्णय लेना है।
हालांकि तीन दिन पहले मी टू अभियान को गलत ठहराने वाले भाजपा सांसद उदित राज ने बृहस्पतिवार को फिर एक सवाल उठाया। उदित राज ने पूछा कि यदि किसी आदमी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला की शिकायत गलत साबित हो गई तो उस आदमी की प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान का क्या होगा?
मेनका गांधी ने की थी अकबर के मामले में जांच की मांग
इससे पहले केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने स्पष्ट तौर पर अकबर के मामले की जांच कराए जाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। जो मर्द बड़े पद पर होते हैं, वे अक्सर ऐसा करते हैं। यह मीडिया, राजनीति और अन्य कंपनियों पर भी लागू होता है। हमें आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए। जब मामले खुलने लगे हैं तो हमें हर मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।