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योजना: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए चलाया जाएगा विशेष अभियान, मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

Sun, 20 Feb 2022 01:09 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 20 Feb 2022 01:09 AM IST
सार

विशेष अभियान चलाकर केंद्र सरकार भारत में मेडिकल टूरिज्म को प्रोत्साहित करेगी। इसके तहत स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य बीमा पर विशेष जोर होगा।

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medical tourism: special campaign will be run to improve health services
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वास्थ्य क्षेत्र के संस्थानों को मजबूत करने और वैश्विक स्तर की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए देश में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके दो प्रमुख उद्देश्य हैं, पहला विदेश से इलाज के लिए भारत आने के लिए मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिले। दूसरा, देश के शिक्षण संस्थानों से निकलने के बाद पेशेवरों को बाहर किसी भी देश में कार्य करने में दिक्कत न आए। 

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ‘हील बाय इंडिया’ नाम से आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में भाग लेने वाले एक अधिकारी ने बताया, शिविर में ट्रेनिंग, कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अवसर और नई तकनीक पर चर्चा हुई। इससे भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन सके।
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इसका मकसद देश के प्रशिक्षित पेशेवर लोगों के लिए विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। अगले शिविर की थीम ‘हील इन इंडिया’ (भारत में इलाज) होगी। इससे सरकार भारत में मेडिकल टूरिज्म को प्रोत्साहित करेगी। इसके तहत स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य बीमा पर विशेष जोर होगा।
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शिविर में विदेशी नियोक्ताओं के लिए भारत को प्रतिभावान कर्मचारी उपलब्ध कराने वाला स्रोत बनाने पर भी चर्चा हुई। लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने, विदेशियों को हमारे शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए आकर्षित करने का मास्टर प्लान बनाने पर भी चर्चा हुई।

सरकार इसके लिए अच्छे शिक्षकों की उपलब्धता, भाषाई बाधा, नई तकनीक की उपलब्धता और सकारात्मक सरकारी योजनाओं पर कार्य कर रही है। जिन 50-60 सेक्टर में सबसे अधिक पेशेवर लोगों की मांग विदेशों में है, उन्हें स्किल इंडिया के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा।


उन्होंने कहा, विश्व में डॉक्टरों की कमी के चलते बाहर से युवाओं को भारत में पढ़ने के मौके उपलब्ध कराए जा सकते हैं। देश में भी डॉक्टरों की कमी है, इसलिए हम इन्हें विदेशों में जाने को प्रोत्साहित नहीं कर सकते, लेकिन विकासशील देशों छात्रों के लिए हम कुछ सीटें सुरक्षित रख सकते हैं जिससे कि वो हमारे सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों जैसे एम्स आदि में पढ़ाई कर सकें। नर्सिंग से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों का जापान, नाइजीरिया और इथियोपिया आदि देशों से पहले ही एमओयू हो चुका है।

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