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चिकित्सा सुधार : स्वास्थ्य व सहयोगी सेवाओं के लिए राष्ट्रीय नियामक आयोग के गठन का रास्ता साफ, विधेयक को संसद की मंजूरी
Wed, 24 Mar 2021 09:37 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 24 Mar 2021 09:37 PM IST
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- फोटो : PTI
देश के चिकित्सा क्षेत्र में सुधार का रास्ता साफ हो गया है। संसद ने स्वास्थ्य व सहयोगी सेवाओं के लिए नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल विधेयक-2020 को मंजूरी दे दी।
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सहबद्ध (एलाइड) और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग, विधेयक-2020 राज्यसभा में पहले ही पारित हो चुका है। बुधवार को इसे लोकसभा में मंजूरी दी गई। यह इस क्षेत्र के पेशेवरों की शिक्षा और सेवाओं के मानकों का विनियमन करने, स्वास्थ्य क्षेत्र को व्यवस्थित बनाने तथा सुधार लाने के उद्देश्य से लाया गया है।
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स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों के लिए मील का पत्थर
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि यह विधेयक स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों पर केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है, क्योंकि वास्तव में मरीजों की देखरेख के कार्य में नर्सिंग और सहयोगी सेवाओं से जुड़े कर्मियों का योगदान डॉक्टरों से अधिक नहीं तो कम भी नहीं है। यह विधेयक इस क्षेत्र के नियमन एवं इस पेशे से जुड़े लोगों को सम्मान प्रदान करने की दृष्टि से लाया गया है।
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राज्य और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद बनेगी
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इन सेवाओं के लिये 12 सदस्यीय राज्य परिषद के गठन के अलावा एक राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का प्रावधान किया गया है जिसमें राज्यों के प्रतिनिधित्व की की व्यवस्था की गई है।
विधेयक के यह हैं उद्देश्य
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि विधेयक में राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग गठित करने तथा शिक्षा एवं सेवाओं के लिए मानक बनाए रखने, संस्थाओं का निर्धारण करने तथा ऐसी सेवाओं के लिए केंद्रीय रजिस्टर एवं राज्य रजिस्टर बनाने का प्रावधान किया गया है। इनसे संबंधित संस्थाओं में प्रवेश के लिये सामान्य परामर्श के साथ एकसमान प्रवेश परीक्षा की बात कही गई है।
कोरोना महामारी के दौरान दिखा अहम योगदान
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखरेख कार्यकर्ताओं, लैब टेक्निशियनों व अन्य सहयोगी और स्वास्थ्य देखरेख करने वाले पेशेवरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में इस दुनिया में स्वास्थ्यकर्मियों की काफी संख्या में कमी होगी। ऐसे में इस तरह की संस्था से इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी मदद मिलेगी। आयोग में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था भी की गई है।